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चीन की नींद होगी हराम, सेला टनल जल्द बनकर होगी तैयार, भारतीय सेना को तवांग पहुंचने में होगी और आसानी

हिन्दुस्तान,नई दिल्लीAditya Kumar
Thu, 21 Oct 2021 04:16 PM
चीन की नींद होगी हराम, सेला टनल जल्द बनकर होगी तैयार, भारतीय सेना को तवांग पहुंचने में होगी और आसानी

केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि सेला सुरंग अरुणाचल प्रदेश में दिरांग घाटी को तवांग से जोड़ेगी। बता दें कि सुरक्षा के लिहाज से भारत के लिए यह सुरंग बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आइए जानते हैं कि इस सुरंग की क्या खासियत है और यह तवांग के आम लोगों के साथ ही भारतीय सेना के लिए क्यों महत्वपूर्ण है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने 2019 बजट में इस प्रोजेक्ट की घोषणा की थी। पीएम नरेंद्र मोदी ने साल 2019 में बालीपारा-चारद्वार-तवांग रोड के जरिए तवांग तक हर मौसम में सड़क संपर्क की सुविधा के लिए सेला टनल प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी थी। 14 अक्टूबर 2021 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विस्फोट के जरिए मुख्य ट्यूब का रास्ता खोलने के लिए बटन दबाया है। आसान भाषा में इसका मतलब है कि टनल की खुदाई पूरी हो चुकी है।

2022 तक तैयार होगी सुरंग 

1.5 किलोमीटर लंबी और 13,700 फीट की ऊंचाई पर बन रही सुरंग अपने आखिरी चरण में पहुंच चुकी है। 2022 तक इस इस प्रोजेक्ट को पूरा कर लिए जाने की उम्मीद है। इस सुरंग को नए ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड का इस्तेमाल करके बनाया जा रहा है। इसके बन जाने से कम बर्फबारी वाले क्षेत्र से आसानी से तवांग पहुंचा जा सकेगा। यह टनल हर मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। माने तवांग के लोगों को अब यात्रा में कम समय लगेगा।

सेना मुख्यालय से घट जाएगी दूरी

इस टनल की अहमियत को ऐसे समझिए कि इसके बनने से तवांग और चीन बॉर्डर की दूरी 10 किलोमीटर तक घट जाएगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस टनल के बनने से बोमडिला और तवांग के बीच 171 किलोमीटर का रास्ता बहुत आसान हो जाएगा। इसके साथ ही असम के तेजपुर से तवांग की दूरी करीब एक घंटे तक कम हो जाएगी। बता दें कि सेना की चार कोर मुख्यालय तेजपुर में है।

सेना को ऐसे होगा फायदा

हाल ही में अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिक लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल को पार कर भारतीय इलाके में घुस आए थे जहां भारतीय सैनिकों के साथ उनकी झड़प हुई थी। चीन और भारत के बीच डेढ़ साल के अधिक से संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस टनल के बनने से तवांग सेक्टर में सेना की आवाजाही आसान हो जाएगी। बॉर्डर तक जरूरी साजो सामान भी पहले से कम वक्त में पहुंच सकेगा। सुरंग के पूरा होने से खराब मौसम में भी सेना की आवाजाही प्रभावित नहीं होगी और कम समय में तवांग पहुंचा जा सकेगा।

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