Know about newly elected Sri Lankan President Gotabaya Rajapaksa - जानिए श्रीलंका के नए राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के बारे में DA Image
7 दिसंबर, 2019|2:26|IST

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जानिए श्रीलंका के नए राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के बारे में

gotabaya rajapaksa

श्रीलंका में गृहयुद्ध के दौरान विवादित रक्षा सचिव रहे गोटबाया राजपक्षे ने रविवार को राष्ट्रपति चुनाव में जीत दर्ज की। राजपक्षे की विजय के बाद श्रीलंका में एक बार फिर चीन की गतिविधियों के बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। दरअसल, पूरे राजपक्षे परिवार का चीन के प्रति झुकाव जगजाहिर है। 

सभी तमिल और मुस्लिम बाहुल्य प्रांतों में हारे :
गोटबाया राजपक्षे 52.25 फीसदी वोटों से राष्ट्रपति चुनाव जीते हैं। वह अधिकांश सिंहल बहुल वाले दक्षिणी जिलों में जीत हासिल की है जबकि तमिल बहुसंख्यक वाले गृह युद्ध से प्रभावित उत्तरी प्रांत और मुस्लिम बहुल पूर्वी प्रांत में 65 से 70 फीसदी वोटों से हार गए। 

भारत से पुराना नाता - 
गोटबाया का भारत से पुराना नाता रहा है। उन्होंने 1980 में असम में उग्रवाद निरोधी अभ्यास में हिस्सा लिया था। वर्ष 1983 में उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से रक्षा अध्ययन में स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की। बतौर रक्षा सचिव वह 2012 और 2013 में भारत की यात्रा पर आए थे।

प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से हैं गोटबाया : 
गोटबाया का जन्म 20 जून, 1949 को मतारा जिले के पलटूवा में हुआ था। नौ भाई-बहनों में पांचवें नंबर के गोटबाया श्रीलंका के प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता डीके राजपक्षे प्रतिष्ठित राजनेता होने के साथ ही श्रीलंका फ्रीडम पार्टी के संस्थापक सदस्य भी थे। गोटबाया 1971 में बतौर कैडेट अफसर सीलोन आर्मी में शामिल हुए थे। वर्ष 1991 में गोटबाया सर जॉन कोटेलवाला रक्षा अकादमी के उप कमांडेंट नियुक्त किए और 1992 में सेना से सेवानिवृत्त होने तक इस पद पर बने रहे। 20 वर्षों की सैन्य सेवा के दौरान उन्हें श्रीलंका के तीन राष्ट्रपति जेआर जयवर्धने, रणसिंघे प्रेमदासा और डीबी विजेतुंगा से वीरता पुरस्कार प्राप्त हुए। 

सेवानिवृत्ति के बाद परास्नातक किया :-
सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद 1992 में गोटबाया ने कोलंबो विश्वविद्यालय से सूचना प्रौद्योगिकी (आइटी) में परास्नातक की डिग्री हासिल की। वर्ष 1998 में अमेरिकी सूचना प्रौद्योगिकी पेशेवर के तौर पर लॉस एंजिलिस स्थित लोयला लॉ स्कूल में काम किया। गोटबाया 2005 में भाई महिंदा राजपक्षे के राष्ट्रपति चुनाव अभियान में मदद करने के लिए स्वदेश लौटे और श्रीलंका की दोहरी नागरिकता ली। इसके बाद 2005 से 2014 तक रक्षा सचिव की जिम्मेदारी निभाई। 

लिट्टे के खात्मे में ‘टर्मिनेटर’ की अहम भूमिका :-
गोटबाया को को ‘लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम’ (लिट्टे) के साथ तीन दशक से चल रहे गृहयुद्ध को 2009 में निर्दयतापूर्ण तरीके से खत्म करने का श्रेय जाता है। इसके लिए उन्हें ‘टर्मिनेटर’ कहा जाता था। गोटबाया की अपने देश में खलनायक एवं नायक दोनों की छवि है। बहुसंख्यक सिंहली बौद्ध उन्हें युद्ध नायक मानते हैं। वहीं अधिकतर तमिल अल्पसंख्यक उन्हें खलनायक मानते हैं और अविश्वास की नजर से देखते हैं। 

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