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मुंह बाए खड़ी है नई महामारी? यह गुफा है दुनिया की सबसे घातक बीमारी का घर, कैसी बनी इतनी खतरनाक

केन्या के माउंट एल्गॉन नेशनल पार्क में स्थित दुनिया की सबसे घातक गुफा किटम है, जो अगली महामारी का कारण बन सकती है। यह गुफा मानव इतिहास के कुछ सबसे घातक विषाणुओं का घर बन गई है।

मुंह बाए खड़ी है नई महामारी? यह गुफा है दुनिया की सबसे घातक बीमारी का घर, कैसी बनी इतनी खतरनाक
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Himanshu Tiwariलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीTue, 23 Apr 2024 06:55 PM
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पूरा विश्व अभी कोरोना महामारी की मार से उबरा नहीं कि एक नई बीमारी मुंह बाए हुए खड़ी नजर आ रही है। हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई जिसमें इस बात का खुलासा हुआ है कि एक गुफा अगली महामारी कारण बन सकती है। साइंस टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, केन्या के माउंट एल्गॉन नेशनल पार्क में स्थित दुनिया की सबसे घातक गुफा किटम है, जो अगली महामारी का कारण बन सकती है। रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है कि यह गुफा मानव इतिहास के कुछ सबसे घातक विषाणुओं का घर बन गई है। इबोला वायरस और मारबर्ग वायरस जैसी खतरनाक बीमारियों की शुरुआत भी इसी गुफा से होने की सूचना मिली है।

गुफा कैसे बनी इतनी खतरनाक?
विशेषज्ञों को चिंता है कि यह गुफा अगली महामारी- मारबर्ग वायरस का घर हो सकती है। इसके बारे में पुष्टि करते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक चेतावनी जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि मारबर्ग वायरस अगली महामारी को रूप दे सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मारबर्ग एक अत्यधिक विषैली बीमारी है जो रक्तस्रावी बुखार का कारण बनती है। यह बीमारी शरीर की कार्यात्मक क्षमता को कम कर देती है और हृदय प्रणाली को नुकसान पहुंचाती है। 88 प्रतिशत तक की मृत्यु दर के साथ, यह वायरस उस वायरस से संबंधित है जो इबोला जैसी खतरनाक बीमारी का कारक है। 

नहीं है कोई इलाज
संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थ के संपर्क में आने से मारबर्ग वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैला सकता है। इसके अतिरिक्त, किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए तौलिये या अन्य वस्तुओं को छूने से भी यह बीमारी अन्य लोगों में भी फैल सकती है। रिपोर्ट्स बताते हैं कि किसी मरीज में लक्षण दिखने से पहले वायरस को "इनक्यूबेट" होने में कम से कम तीन सप्ताह लगते हैं। हालांकि, इसके लक्षण ज्यादातर मलेरिया और इबोला से मिलते जुलते हैं। वायरस से संक्रमित कई लोगों की आंखें गहरी और कांतिहीन चेहरे विकसित हो जाते हैं। बाद के चरणों में यह योनि, आंख, नाक और मसूड़ों से रक्तस्राव का कारण भी बन सकता है। दुर्भाग्य से, इस वायरस के लिए कोई टीका उपलब्ध नहीं है।