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जस्टिन ट्रूडो ने फिर भारत को चिढ़ाया- हम तो सवाल उठाएंगे, चाहे मोदी सरकार को बुरा लग जाए

नाडा के आंतरिक मामलों में भारत के दखल के आरोपों पर सवाल पूछे जाने पर जस्टिन ट्रूडो ने यह बात कही। बीते साल सितंबर से ही दोनों देशों के बीच खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर तनाव है।

जस्टिन ट्रूडो ने फिर भारत को चिढ़ाया- हम तो सवाल उठाएंगे, चाहे मोदी सरकार को बुरा लग जाए
Surya Prakashलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीThu, 11 Apr 2024 11:39 AM
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कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिस ट्रूडो ने एक बार फिर से भारत को चुभने वाला बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने अपने नागरिकों के अधिकारों की आवाज उठाई, भले ही उससे भारत की नरेंद्र मोदी सरकार को चिढ़ हुई हो। कनाडा के आंतरिक मामलों में भारत के दखल के आरोपों पर सवाल पूछे जाने पर जस्टिन ट्रूडो ने यह बात कही। बीते साल सितंबर से ही दोनों देशों के बीच खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर तनाव की स्थिति है। कनाडा ने इस मामले में भारतीय एजेंट्स का हाथ होने का आरोप लगाया था। इसे लेकर अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की भी प्रतिक्रिया आई थी।

भारत ने निज्जर हत्याकांड से अपना ताल्लुक बताने की खबरों को खारिज किया था तो वहीं ट्रूडो सरकार से सबूत भी मांगे थे। अब तक जस्टिन ट्रूडो की सरकार इस मामले में कोई सबूत नहीं दे पाई है। फिर भी जस्टिन ट्रूडो भारत पर आरोप लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं। यहां तक कि पिछले दिनों उनकी सरकार ने कनाडा चुनाव में भारत के दखल के आरोप लगाए थे। हालांकि जांच में ऐसे आरोप गलत पाए घए। जस्टिन ट्रूडो ने कहा, 'पहले की कंजरवेटिव सरकार भारत की मौजूदा सरकार के साथ नरम रिश्तों के लिए जानी जाती थी। लेकिन हमारी सरकार कनाडा के अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। भले ही भारत को बुरा लगे, लेकिन हम उनकी आवाज उठाएंगे।'

जस्टिन ट्रूडो ने नाम नहीं लिया, लेकिन उसका साफ इशारा सिख समुदाय को लेकर था। हालांकि उनका यह दावा भी गलत है क्योंकि वह खालिस्तानियों और सिख समुदाय को आपस में जोड़ते नजर आए। बता दें कि जस्टिन ट्रूडो की कनाडा में ही एक वर्ग और विपक्ष ने भारत पर बेजा आरोप लगाने के लिए तीखी आलोचना की है। उन्होंने बीते साल 18 सितंबर को कनाडा की संसद में कहा था कि हमारे पास विश्वसनीय सबूत हैं कि हरदीप सिंह निज्जर की हत्या और भारतीय एजेंट्स के बीच ताल्लुक है। उनके इस आरोप क बाद कनाडा और भारत के रिश्ते निचले स्तर पर आ गए थे। यही नहीं भारत ने कनाडा के 41 राजनयिकों को देश निकाला दे दिया था।