चीन के बाद जापान में पुन: उपयोग योग्य रॉकेट का परीक्षण
विकल्प हेडिंग 1. चीन के बाद जापान ने भी री-यूजेबल रॉकेट तकनीक में भरी

टोक्यो, एजेंसी। वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स को चुनौती देने की दिशा में जापान ने शनिवार को बड़ा कदम उठाया। चीन के परीक्षण के एक दिन बाद जापान ने पुन: उपयोग योग्य (री-यूजेबल) रॉकेट आरवी-एक्स का पहला सफल परीक्षण किया। इस सफलता को अंतरिक्ष प्रक्षेपण की लागत घटाने और भविष्य में अधिक प्रतिस्पर्धी लॉन्च प्रणाली विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जाएक्सा) ने बताया कि आरवी-एक्स रॉकेट ने पूर्वोत्तर जापान के नोशिरो परीक्षण केंद्र से उड़ान भरी। करीब एक मिनट से भी कम समय तक चले इस परीक्षण के दौरान रॉकेट ने निर्धारित ऊंचाई तक पहुंचने के बाद हवा में कुछ देर स्थिर (हॉवर) रहकर क्षैतिज दिशा में नियंत्रित उड़ान भरी। फिर सुरक्षित रूप से निर्धारित स्थान पर उतर गया.
लागत घटाने पर फोकस
जापान लंबे समय से ऐसी तकनीक विकसित करने की कोशिश कर रहा है, जिससे रॉकेटों का दोबारा इस्तेमाल किया जा सके। इससे उपग्रहों और अन्य पेलोड को अंतरिक्ष में भेजने की लागत में भारी कमी आएगी। वर्तमान में जापान का एच-3 रॉकेट केवल एक बार इस्तेमाल किया जा सकता है। री-यूजेबल तकनीक विकसित होने पर यह उसकी अगली पीढ़ी का कम लागत वाला विकल्प बन सकता है.
आगे और ऊंची उड़ान की तैयारी
जाएक्सा और मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज संयुक्त रूप से आरवी-एक्स रॉकेट का विकास कर रहे हैं। करीब 7.3 मीटर लंबा और 1.8 मीटर व्यास वाला यह रॉकेट अधिक टिकाऊ इंजन और सुरक्षित लैंडिंग के लिए चार शॉक-एब्जॉर्बिंग लैंडिंग गियर से लैस है। वह भविष्य के परीक्षणों में इस रॉकेट को लगभग 100 मीटर की ऊंचाई तक ले जाने की योजना बना रहा है.
चीन से भी बढ़ी प्रतिस्पर्धा
जापान का यह परीक्षण ऐसे समय हुआ है, जब एक दिन पहले ही चीन ने भी रॉकेट के पहले चरण (फर्स्ट स्टेज) की सफल रिकवरी का दावा किया था। इससे साफ है कि एशिया की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच अंतरिक्ष तकनीक और वाणिज्यिक प्रक्षेपण सेवाओं की प्रतिस्पर्धा तेज होती जा रही है.
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