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सैनिकों को आराम और हमास की सुरंगे बनेंगी कब्रिस्तान, इजरायल के AI लड़ाके कैसे गाजा पर बरपा रहे कहर

इजरायल और हमास के बीच जंग में नया मोड़ आ गया है। इजरायली सेना अपने सैनिकों को आराम देकर एआई टूल्स से हमास का खात्मा कर रही है। एआई से टारगेट फिक्स कर हमास की सुरंगों को कब्रिस्तान बनाया जा रहा है।

सैनिकों को आराम और हमास की सुरंगे बनेंगी कब्रिस्तान, इजरायल के AI लड़ाके कैसे गाजा पर बरपा रहे कहर
Gaurav Kalaलाइव हिन्दुस्तान,गाजाSun, 10 Dec 2023 12:42 PM
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इजरायल और हमास आतंकियों के बीच चल रही जंग जारी है। बेतहाशा खून-खराबे के बाद भी इजरायली सेना ने गाजा पर कहर बरपाना नहीं छोड़ा है। उधर, हमास भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। इजरायल इस महायुद्ध में हमास आतंकियों को खोजने के नए तरीकों पर लगातार काम कर रहा है। हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई है कि इजरायल के एआई लड़ाके हमास आतंकियों को खोज रहे हैं और उन्हें मिटा रहे हैं। मौजूदा हालातों को देखते हुए यह लग रहा है कि इजरायल के लिए यह तकनीक फायदेमंद है क्योंकि वह कई मोर्चों पर अपने सैनिकों को आराम देकर एआई तकनीक की मदद से हमास की सुरंगों को कब्रिस्तान बना रहा है। फायदे के इस सौदे में एक बड़ा सवाल भी है कि जंग में एआई को उतारकर क्या इजरायल ने नए और खतरनाक युग का आगाज कर दिया है!

पिछले हफ्ते, रिपोर्टें सामने आईं थी कि इजराइल रक्षा बल (आईडीएफ) गाजा में हमास के खिलाफ युद्ध में एआई तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। हमास की सुरंगों को AI टूल्स की मदद से कब्रिस्तान बनाया जा रहा है। इजरायली सेना इस अत्याधुनिक तकनीक से टारगेट को फिक्स करने के लिए हब्सोरा (हिब्रू में "द गॉस्पेल") नामक एक एआई प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं। कथित तौर पर इस प्रणाली का उपयोग बमबारी के लिए अधिक से अधिक टारगेट खोजना और हमास आतंकियों और आम नागरिकों को ढूंढने के लिए किया जा रहा है।

दुनिया में तबाही लाएगा इजरायल का यह कदम
इजरायल ने युद्ध में एआई तकनीक की मदद से हमास का सफाया करना शुरू कर दिया है। एआई एक ऐसी तकनीक है, जिससे वह हमास आतंकियों को ढूंढकर मार रहा है। युद्ध में एआई तकनीक के आ जाने से दुनिया में जंग का रूप बदल गया है। कई एक्सपर्ट इजरायल के इस कदम की जमकर आलोचना भी कर रहे हैं क्योंकि इस रोबोटिक तकनीक से भले ही वह अपने टारगेट तक पहुंच पा रहा हो, उसके सैनिकों को आराम मिल रहा हो लेकिन भविष्य के लिए यह बेहद खतरनाक हो सकता है। एआई एक मशीन है जो निर्देशों का पालन करते हुए अपने काम को अंजाम देती है। अगर इसमें कोई तकनीकी दिक्कत आ गई तो यह भीषण तबाही ला सकती है।

ऐसे कई उदाहरण हैं, जिन्होंने हाल ही में दुनिया को बताया कि एआई तकनीक से खेलना जान हथेली पर रखने से कम नहीं। पिछले महीने साउथ कोरिया में एक शख्स को एआई ने सब्जी का टोकरा समझ लिया था और अपने हाथों से मसलकर उसकी जान ले ली। उससे पहले अमेरिका में भी ऐसी ही एक घटना सामने आई थी जब फॉक्सवैगन कार रिपेयरिंग के दौरान एआई में तकनीकी खराबी आ गई और उसने कार की सफाई कर रहे शख्स को मशीन समझकर उठा कर फेंक दिया। इस घटना में भी शख्स की मौत हो गई थी।

कई मानवीय संस्थाएं इजरायल के इस कदम को घातक बता रही हैं क्योंकि इसमें आम नागरिकों के भी बड़े पैमाने पर मारे जाने की संभावना है। गाजा की लड़ाई में एआई तकनीक ने युद्ध के सभी स्तरों पर प्रभाव डाला है। वह हब्सोरा तकनीक को न सिर्फ टारगेट पर हमला करने बल्कि खुफिया निगरानी के लिए भी इस्तेमाल कर रहा है। ऐसे में वह बिना किसी मानवीय मदद के अपने टारगेट को हासिल कर सकता है। इस तकनीक की मदद से इजरायल हमले में मारे जाने वाले लोगों की संख्या का सटीक अंदाजा भी लगा सकता है। 

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