एकतरफा अमेरिकी प्रतिबंधों के मुकाबले के लिए ब्रिक्स का गठन: पजेश्कियान
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि ब्रिक्स का गठन अमेरिका के एकतरफा प्रतिबंधों का मुकाबला करने के लिए किया गया है। उन्होंने इसके उद्देश्य को अमेरिकी सर्वसत्तावाद को खत्म करना बताया। चाबहार परियोजना पर भारत के निवेश पर बातचीत की गई, जिसमें दोनों देशों के सहयोग को विस्तारित करने की जरूरत पर जोर दिया गया।

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि ब्रिक्स का गठन अमेरिका के एकतरफा प्रतिबंधों की व्यवस्था का मुकाबला करने के लिए किया गया था। ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान शनिवार को एक साक्षात्कार में ये बात कही। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने जोर देते हुए कहा कि ब्रिक्स का उद्देश्य अमेरिका के सर्वसत्तावाद को खत्म करना है। उन्होंने ब्रिक्स को वॉशिंगटन की उस क्षमता के लिए सीधी चुनौती बताया, जिसके तहत वह अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी देश पर आर्थिक प्रतिबंध लगा सकता है। उन्होंने कहा कि हम यहां जिस मकसद से आए हैं वह अमेरिका द्वारा शुरू की गई उस प्रक्रिया का मुकाबला करना है, जिसमें वह अपनी इच्छानुसार किसी भी देश पर प्रतिबंध लगा देता है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स को अपने सदस्य देशों को ऐसे वैकल्पिक व्यापार और सहयोग के तरीके विकसित करने में सक्षम बनाना चाहिए जो किसी एक देश द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से स्वतंत्र हों। उन्होंने कहा कि हमें आपसी बातचीत, व्यापार और सहयोग के तरीकों को बदलना है, ताकि यह इस बात पर निर्भर न रहे कि कोई एक देश अपनी इच्छा से दूसरे देशों पर प्रतिबंध लगा सकता है। एकजुटता के जरिए अमेरिका को एकतरफावाद के रास्ते से हटाना है。
चाबहार में भारत के निवेश पर चर्चा
पेजेश्कियान से पूछा गया कि क्या प्रधानमंत्री मोदी के साथ बातचीत में चाबहार परियोजना और भारत के निवेश का मुद्दा उठा? इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा, दोनों पक्षों ने कई संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत वहां निवेश कर सकता है। फिलहाल वहां भारत का कुछ निवेश है और यह काम आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का सहयोग केवल बंदरगाह के बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसमें व्यापार, साझेदारी और व्यापक स्तर पर आपसी संपर्क का नेटवर्क भी शामिल हो सकता है।


