ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर फर्जी पोस्ट, इजरायल-अमेरिका तक हड़कंप

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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- भारत में मौजूद एक अज्ञात एक्स अकाउंट से दावा किया गया - अमेरिकी

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर फर्जी पोस्ट, इजरायल-अमेरिका तक हड़कंप

वॉशिंगटन, एजेंसी। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक फर्जी पोस्ट से इजरायल से लेकर अमेरिका तक हड़कंप मच गया। यह कुछ ही घंटों में भारत से इजरायल और अमेरिका तक पहुंच गया। बाद में इस दावे का इस्तेमाल इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने भाषण में किया। वहीं, ट्रंप प्रशासन के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत माइक वॉल्ट्ज और अमेरिकी सीनेटर रिक स्कॉट ने भी इसे सोशल मीडिया पर साझा किया। 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' ने इस दावे के प्रसार की पड़ताल की। रिपोर्ट के मुताबिक पांच अगस्त की सुबह भारत में मौजूद एक अज्ञात एक्स अकाउंट से यह दावा किया गया। इसमें कहा गया कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी ने कहा कि जब तक इजरायल और अमेरिका के पास परमाणु हथियार हैं, तब तक ईरान भी परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं छोड़ेगा। पोस्ट के साथ वाहिदी की तस्वीर और परमाणु विस्फोट के बाद बने मशरूम क्लाउड की एआई से तैयार तस्वीर भी लगाई गई थी। हालांकि, रिपोर्ट में वाहिदी के इस तरह का बयान देने का कोई सबूत नहीं मिला। ईरान के परमाणु हथियार बनाने का भी कोई सार्वजनिक प्रमाण नहीं है।

कुछ घंटों में कई देशों तक पहुंचा दावा

रिपोर्ट के अनुसार, करीब 1.75 लाख फॉलोअर्स वाले एक भारतीय अकाउंट से शुरू हुआ यह दावा दो घंटे के भीतर करीब 82 हजार फॉलोअर्स वाले दूसरे भारतीय अकाउंट तक पहुंचा, जहां इसका हिंदी अनुवाद साझा किया गया। इसके बाद खुद को 'मोसाद कमेंट्री' बताने वाले एक इजरायली अकाउंट ने इसे आगे बढ़ाया। इस अकाउंट का नाम इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद से मिलता-जुलता है, लेकिन उसके उससे जुड़े होने की पुष्टि नहीं है। करीब आधे घंटे बाद इजरायल के चैनल-14 ने इस कथित बयान को अंग्रेजी में प्रसारित किया और इसे ईरान की ओर से परमाणु बम बनाने की पहली खुली स्वीकारोक्ति बताया। इसके कुछ ही मिनट बाद नेतन्याहू के बेटे याइर नेतन्याहू ने भी इसे साझा किया। तीन घंटे से भी कम समय बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने येरुशलम स्थित माउंट हर्जल पर एक भाषण में इस दावे का हवाला देते हुए इसे ईरान की मंशा का सबूत बताया।

अमेरिकी अधिकारियों ने भी किया साझा

अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने सोशल मीडिया पर दावा साझा करते हुए लिखा कि ईरान आखिरकार उस बात को स्वीकार कर रहा है, जो वर्षों से स्पष्ट थी। फ्लोरिडा के सीनेटर रिक स्कॉट ने भी इसे दोबारा साझा किया। फॉक्स न्यूज ने भी इस दावे को प्रसारित किया। हालांकि, न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक वॉल्ट्ज की पोस्ट बाद में बिना किसी स्पष्टीकरण के एक्स से हटा दी गई।

ईरान ने झूठा बताया

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने इस दावे को खारिज करते हुए इसे इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ झूठ के सैलाब का उदाहरण बताया। उन्होंने ऐसे दावों के पीछे इजरायल का हाथ होने का आरोप लगाया। हालांकि, इसके समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया। बघई ने कहा कि ईरान के खिलाफ इसी तरह के आरोप पिछले दो दशक से सैन्य कार्रवाई को उचित ठहराने के लिए इस्तेमाल किए जाते रहे हैं।

प्रश्नोत्तर

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर फर्जी पोस्ट कब शुरू हुई थी?
यह दावा पांच अगस्त की सुबह भारत में मौजूद एक अज्ञात एक्स अकाउंट से किया गया।
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