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इब्राहिम रईसी का हेलीकॉप्टर पहाड़ से टकराया या हुआ था हमला? ईरान की सेना ने बताया सच

ईरान की सरकारी मीडिया ने दुर्घटना के सैन्य जांचकर्ताओं के हवाले से कुछ अहम जानकारियां दी हैं। यह भी कहा गया कि इस बात का कोई संकेत नहीं मिले हैं जो यह साबित करें कि किसी तरह का हमला हुआ हो।

इब्राहिम रईसी का हेलीकॉप्टर पहाड़ से टकराया या हुआ था हमला? ईरान की सेना ने बताया सच
Niteesh Kumarलाइव हिन्दुस्तान,तेहरानFri, 24 May 2024 04:02 PM
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ईरान के दिवंगत राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी को देश की सबसे पवित्र शिया दरगाह में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। उनकी कुछ दिन पहले हेलीकॉप्टर दुर्घटना में विदेश मंत्री और 6 अन्य लोगों के साथ मृत्यु हो गई थी। रईसी को लेकर जा रहा हेलीकॉप्टर के पहाड़ से टकरा गया जिसके तुरंत बाद उसमें आग लग गई थी। ईरान की सरकारी मीडिया ने दुर्घटना के सैन्य जांचकर्ताओं के हवाले से यह बताया है। यह भी कहा गया कि इस बात का कोई संकेत नहीं मिले हैं जो यह साबित करें कि किसी तरह का हमला हुआ हो। यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब रईसी की मौत को लेकर कई तरह की बातें हो रही थीं। 

हेलीकॉप्टर हादसे की जांच के प्रभारी सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ ने इसे लेकर गुरुवार देर रात अपना बयान जारी किया। इसमें दुर्घटना को लेकर कोई दोष नहीं लगाया गया है। हालांकि, बयान में कहा गया कि इसे लेकर और अधिक जानकारी आगे की जांच के बाद दी जाएगी। जनरल स्टाफ की ओर से जारी बयान के मुताबिक, दुर्घटना से पहले कंट्रोल टॉवर और हेलीकॉप्टर के क्रू मेंम्बर्स के बीच कम्युनिकेशन में कुछ भी संदिग्ध नहीं रहा। इसमें कहा गया कि हेलीकॉप्टर को लेकर अंतिम संदेश दुर्घटना से लगभग 90 सेकंड पहले मिला था।

इमाम रजा दरगाह के अंदर कब्र में दफनाए गए रईसी
बता दें कि इब्राहिम रईसी को मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह के अंदर कब्र में दफनाया गया। इस दरगाह में शिया समुदाय के 8वें इमाम दफन हैं। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और उन्होंने काले कपड़े पहने हुए थे। उनके जनाजे में हालांकि उतनी भीड़ शामिल नहीं हुई, जितनी 2020 में बगदाद में अमेरिकी ड्रोन हमले में रिवोल्यूशनरी गार्ड जनरल कासिम सुलेमानी के मारे जाने के बाद के जनाजे में थी। इसके पीछे रईसी को लेकर लोगों की भावनाएं संभावित संकेत हो सकती हैं। रईसी सरकार ने 2022 में महसा अमीनी की मौत को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान सख्त कार्रवाई की थी, जिसे लेकर लोगों में गुस्सा था। अमीनी को ईरान की महिलाओं के लिए अनिवार्य हिजाब नहीं पहनने के लिए हिरासत में लिया गया था।