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कौन हैं इजरायल के खिलाफ फैसला सुनाने वाले भारतीय जज दलवीर भंडारी, जिनके आदेश की चर्चा

अंतरराष्ट्रीय अदालत में भारतीय जज जस्टिस दलवीर भंडारी ने भी राफा में इजरायली सैन्य कार्रवाई रोकने के आदेश का समर्थन किया है। कोर्ट ने कहा है कि इजरायल गाजा में मासूमों की जान ना ले।

कौन हैं इजरायल के खिलाफ फैसला सुनाने वाले भारतीय जज दलवीर भंडारी, जिनके आदेश की चर्चा
Ankit Ojhaलाइव हिन्दुस्तान,तेल अवीवMon, 27 May 2024 11:53 AM
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इंटरनेशल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) ने शुक्रवार को इजरायल को आदेश दिया है कि राफा में तत्काल सैन्य अभियान रोक दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि गाजा पट्टी में इजरायली हमले में बड़ी संख्या में मासूमों की जान गई है। ऐसे में युद्धविराम आवश्यक है। कोर्ट के इस फैसले का समर्थन आईसीजे में भारतीय जज दलवीर भंडारी ने भी किया है। बता दें कि जस्टिस दलवीर भंडारी 2012 से ही अंतरराष्ट्रीय अदलत में जज हैं। 

जस्टिस दलवीर भंडारी का जन्म 1947 में जोधपुर में हुआ था। 2014 में उन्हें पद्मभूषण से नवाजा गया था। वह कई सालों तक सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज रहे। उससे पहले वह बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस थे। साल 2005 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्ति किया गया था। इस दौरान उन्होंने कई अहम फैसले सुनाए। संवैधानिक कानून, आपराधिक कानून, फैमिली लॉ और लेबर इंडस्ट्रियल लॉ के क्षेत्र में उन्होंने अपने फैसलों से नजीर पैदा की। 

आईसीजे में जाने के बाद भी समुद्री विवाद, अंटार्कटिका, परमाणु निशस्त्रीकरण, आतंकी फंडिंग और अन्य मामलों को लेकर कई अहम सुनवाई कीं। जस्टिस दलवीर भंडारी कई साल तक दिल्ली में सेंटर फॉर इंटरनेशल लॉ असोसिएशन के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। तलाक के मामले में उन्होंने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा था कि अगर पति पत्नी लंबे समय से अलग-अलग रह रहे हैं और उनके बीच भावनात्मक संबंध खत्म हो गया है तो यह तलाक का आधार हो सकता है। इसके बाद केंद्र सरकार को हिंदू मैरिज ऐक्ट 1955 में बदलाव पर विचार करना पड़ा। जस्टिस दलवीर भंडारी ने 1971 मे शिकागो के लॉ स्कूल से कानून में पोस्ट ग्रैजुएशन किया था। 

बता दें कि आईसीजे में इजरायल को लेकर यह फैसला दक्षिण अफ्रीका की अपील पर सुनाया गया। दक्षिण अफ्रीका ने याचिका में कहा था कि गाजा पट्टी में नरसंहार हो रहा है। ऐसे में इजरायल को ऐसी कार्रवाई नहीं करनी चाहिए जिससे कि आम लोगों की जिंदगी खतरे में पड़े और संसाधन खत्म हो जाएं। कोर्ट ने 13-2 के समर्थन से अपना फैसला सुनाया। इस फैसले का समर्थन यूगांडा की जज जूलिया सेबुतिंदे और इजरायली हाई कोर्ट के प्रेसिडेंट अहारो बराक ने नहीं किया था। 

आईसीजे के आदेश के बाद भी इजरायल ने इसे मानने से इनकार कर दिया। इजरायल के सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि राफा में अंतरराष्ट्रीय कानूनों को ध्यान में रखते हुए ही कार्रवाई की जा रही है। इजरायल ने कहा कि जहां भी जरूरी लगेगा, सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं यूएन में फिलिस्तीन के राजदूत रियाद मंसूर ने इस फैसले पर खुशी जाहिर की।