सूरीनाम में बनारस के कलाकारों ने बिखेरा जलवा
वाराणसी, मुख्य संवाददाता। नगर की लोकगायिका सरोज वर्मा के नेतृत्व में 10 सदस्यीय भारतीय सांस्कृतिक दल ने सूरीनाम में अपनी कला का जलवा बिखेरा। इस दल ने भोजपुरी संगीत एवं लोकनृत्यों की प्रस्तुति से सूरीनाम वासियों का दिल जीत लिया। दल ने सूरीनाम उत्सव में संस्कार गीतों, लोकगीतों और उनके सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व की जानकारी साझा की।

वाराणसी, मुख्य संवाददाता। नगर की लोकगायिका सरोज वर्मा के नेतृत्व में 10 सदस्यीय भारतीय सांस्कृतिक दल ने सूरीनाम में अपनी कला का जलवा बिखेरा। यह दल सूरीनाम हेरिटेज फेस्टिवल में शिरकत करके हाल ही में लौटा है। इसने महोत्सव में भोजपुरी संगीत एवं लोकनृत्यों की प्रस्तुति से सूरीनाम वासियों का दिल जीत लिया। यह जानकारी सूरीनाम से लौटे दल की मुखिया सरोज वर्मा ने सोमवार को लंका स्थित एक आर्ट गैलरी में पत्रकारों से बातचीत में दी।
भारतीय दल की सहभागिता
उन्होंने बताया कि इस प्रथम संस्करण में भारतीय दल की सहभागिता महत्वपूर्ण रही, क्योंकि भोजपुरी लोकगीत और लोकनृत्य के माध्यम से उत्तर भारतीय लोक परंपरा को इस बहुसांस्कृतिक आयोजन का हिस्सा बनने का अवसर मिला। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के माध्यम से आमंत्रित दल के अन्य कलाकारों में ढोलक वादक सुभाष कन्नौजिया, की-बोर्ड वादक राम आश्रय मौर्य, तबला वादक सौरभ मिश्रा, बांसुरी वादक प्रत्यूष मेहता, हारमोनियम वादक नागेंद्र शर्मा, लोकनृत्यांगना वर्तिका वर्मा, कीर्तिका वर्मा, शुभांगी शर्मा और अंबिका तिवारी शामिल रहीं।
संस्कार गीतों का महत्व
सरोज वर्मा ने बताया कि सूरीनाम उत्सव में संस्कार गीतों, लोकगीतों और उनके सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व की विस्तार से जानकारी साझा की गई। प्रतिभागियों ने गीतों के अर्थ और उनके सांस्कृतिक संदर्भों को बेहद रुचि के साथ समझा। भारत के कलाकारों ने कजरी, सोहर, विवाह गीत और भजन प्रस्तुत किए। वहां के लोगों के लिए ये गीत अपनी पारिवारिक और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े अनुभव बन गए।


