खेल : नीरज, मीरा और लवलीना पर दारोमदार

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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शोल्डर -स्पर्धाओं में कटौती के चलते भारत के लिए ग्लास्गो खेलों में लगातार दो दशक

खेल : नीरज, मीरा और लवलीना पर दारोमदार

इंट्रो भारतीय खिलाड़ी ग्लास्गो राष्टमंडल खेलों में तिरंगा फहराने को तैयार हैं। स्पर्धाओं में कटौती के चलते भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती शीर्ष पाँच में रहने की है। पिछले 24 साल से भारत लगातार शीर्ष पाँच में रह रहा है। भारत का दारोमदार भाला फेंक में दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा, ओलंपिक की पूर्व रजत पदक विजेता वेटलिफ्टर मीराबाई चानू और ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन के कंधों पर होगा。

उद्घाटन समारोह

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ग्लास्गो, एजेंसी। ओवो हाइड्रो पर गुरुवार को रंगारंग उद्घाटन समारोह के साथ खेलों के महाकुंभ की रणभेरी बजेगी। करीब 11 दिन तक चलने वाले इन खेलों में दुनिया भर के खिलाड़ियों के बीच भारत के 125 खिलाड़ी भी दांव पर लगे 215 स्वर्ण पदकों के लिए दमखम दिखाएंगे। इनमें छह खेलों में पैरा खेलों की स्पर्धाएं भी साथ में होंगी।

चुनौतियाँ

ग्लास्गो के सामने चुनौती यह साबित करने की है कि कम बजट में भी खेल हो सकते हैं। वहीं खेलों में कटौती ने भारत की राह मुश्किल कर दी है। भारत मैनचेस्टर 2002 राष्ट्रमंडल खेलों के बाद से हमेशा शीर्ष पांच में रहा है। इस बार हॉकी, कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस और निशानेबाजी के नहीं होने से यह कर पाना मुश्किल लग रहा है। चार साल पहले बर्मिंघम में इन्हीं खेलों में भारत के 61 में से आधे पदक आए थे। ऐसे में अब एथलेटिक्स, मुक्केबाजी और भारोत्तोलन पर जिम्मेदारी है।

नीरज की चुनौती

नीरज को रूमेश से मिलेगी चुनौती

आठ साल बाद इन खेलों में ताल ठोक रहे स्टार भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा खिताब के सबसे बड़े दावेदार हैं। हालांकि उन्हें श्रीलंका के रूमेश थरंगा से कड़ी चुनौती मिलेगी। थरंगा ने पिछले महीने रोम डायमंड लीग में 92.62 मीटर का थ्रो फेंककर सनसनी फैला दी थी। नीरज ने दोहा डायमंड लीग में 85.69 मीटर की दूरी नापी थी जो उनका इस सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हैं। उन्होंने इससे पहले 2018 में इन खेलों में शिरकत की थी और चैंपियन बने थे। उनके अलावा रोहित यादव और यशवीर सिंह भी चुनौती पेश करेंगे। इन तीनों भारतीयों को पेरिस ओलंपिक चैंपियन पाकिस्तान के अरशद नदीम से भी टक्कर मिलेगी।

अन्य उम्मीदें

श्रीशंकर, पारुल और सर्वेश से भी उम्मीद

भारत ने एथलेटिक्स में 32 सदस्यीय दल उतारा है जो 22 पदक स्पर्धाओं में भाग लेगा। नीरज के अलावा ऊंची कूद में सर्वेश कुशारे, लंबी कूद में मुरली श्रीशंकर और स्टीपलचेज खिलाड़ी पारुल चौधरी से भी पदक की उम्मीद होगी। त्रिकूद में प्रवीण चित्रावेल और महिला व पुरुष चार गुणा 400 मीटर रिले टीमें भी पदक दौड़ में होंगी। बर्मिंघम में एथलीटों ने आठ पदक जीते थे।

चानू और लवलीना

चानू की निगाह पदक के ‘चौके’ पर

भारोत्तोलन में निगाह फिर मीराबाई चानू पर होंगी जो लगातार चौथा पदक जीतना चाहेंगी। मणिपुर की 31 वर्ष की चानू पिछले दो राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। चानू 48 किलो भार वर्ग में चुनौती पेश करेंगी। हालांकि ओलंपिक में इस भारत के खत्म होने के कारण वह एशियाड में 49 किलो ग्राम में उतरेंगी। उनके अलावा बिंद्यारानी देवी (58 किलो) और लवप्रीत सिंह (प्लस 110) भी पदक के दावेदार हैं। कुल 11 भारतीय भारोत्तोलक चुनौती पेश करेंगे।

लवलीना पहले पदक को बेताब

मुक्केबाजी में लवलीना (75 किलो) राष्ट्रमंडल खेलों में पहला पदक जीतने की बेताब होंगी। यही एकमात्र पदक है जो उनके पास नहीं हैं। उनके अलावा विश्व चैंपियन जैसमीन लंबोरिया (57 किलो) बर्मिंघम में जीते अपने कांसे का रंग सुनहरा करने को उत्सुक होंगी। एशियाई चैंपियन प्रीति पवार (54 किलो), साक्षी चौधरी (51 किलो) और अरूंधति चौधरी (70 किलो) भी दावेदारों में हैं। पुरुष वर्ग में नरेंदर बेरवाल (प्लस 90 किलो) और विश्व कप पदक विजेता सचिन सिवाच (60 किलो) से उम्मीदें हैं।

अन्य गेम्स

लॉन बॉल में भी आस

लॉन बॉल में भारत ने बर्मिंघम में महिला वर्ग में स्वर्ण और पुरुष वर्ग में रजत पदक जीते थे। इस बार भी उसे दोहराना चाहेंगे। जूडो में पिछले खेलों में तीन पदक मिले थे जिसे बेहतर करने का लक्ष्य होगा। तैराकी में

पैरा एथलीटों से भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। इस बार छह खेलों में पैरा स्पर्धायें भी साथ में हो रही है।

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नंबर गेम

-74 देशों के खिलाड़ी पेश करेंगे चुनौती

-3000 से अधिक खिलाड़ी करेंगे जोर आजमाइश

-11 दिन तक चलेगा खेलों का महाकुंभ

-10 खेलों की 215 स्पर्धा सात स्टेडियम में होंगी

-2 अगस्त को होगा खेलों का समापन

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32 साल के सबसे छोटे खेल

ग्लास्गो में होने वाले यह खेल पिछले तीन दशक (32 साल) के सबसे छोटे राष्ट्रमंडल खेल होंगे। इनमें लागत में कटौती के कारण चार स्थानों पर सिर्फ दस खेलों की स्पर्धाएं होंगी। इससे पहले 1994 में कनाडा में भी दस स्पर्धाएं आयोजित की गईं थी। ग्लास्गो दूसरी बार इन खेलों की मेजबानी कर रहा है। इससे पहले 2014 में यहां यह खेल आयोजित हुए थे।

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पिछले खेलों से 60 प्रतिशत कम बजट

ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया प्रांत को इन खेलों की मेजबानी मिली थी लेकिन बढ़ती लागत के कारण उसने हाथ खींच लिया। राष्ट्रमंडल खेलों का भविष्य ही खतरे में पड़ते देख ग्लास्गो ने मेजबानी के लिए हामी भरी। पहले भी 2014 में मेजबान रह चुके स्कॉटलैंड के इस शहर ने करीब 160 मिलियन पाउंड (करीब 2065 करोड़ रुपये) के बजट में इन खेलों का आयोजन किया है। यह बर्मिंघम में 2022 में हुए राष्ट्रमंडल खेलों से 60 प्रतिशत कम है।

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समापन समारोह में शंकर-रश्मिका देंगे

प्रसिद्ध गायक-कंपोजर शंकर महादेवन और अभिनेत्री रश्मिका मंधाना दो अगस्त को होने वाले समापन समारोह में प्रस्तुति देंगे। समारोह में भारत 2030 के 100वें संस्कण की मेजवानी के लिए झंडा प्राप्त करेगा। इस दौरान करीब 20 मिनट की प्रस्तुति होगी। पीएम नरेंद्र मोदी के भी समारोह में शामिल होने की संभावना है।

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पहली बार दोनों ध्वजवाहक महिला खिलाड़ी

भारत के राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में यह पहला मौका होगा जब उद्घाटन समारोह में दोनों ध्वजवाहक महिला खिलाड़ी होंगी। वेटलिफ्टर मीराबाई चानू और मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन यह जिम्मेदारी संभालेंगी।

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भारतीय चुनौती

-125 कुल खिलाड़ी दमखम दिखाएंगे

-101 मुख्य खेलों और 24 पैरा खेलों में

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सामान्य प्रश्न

भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती शीर्ष पाँच में रहने की है।
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