भारतवंशी अनिल मेनन अंतरिक्ष स्टेशन का एंटीना बदलने के लिए स्पेसवॉक पर निकले
भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन और सोफी एडेनो ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से बाहर निकाला। यह अनिल का दूसरा स्पेसवॉक है और सोफी का पहला है। सोफी स्पेसवॉक करने वाली पहली फ्रांसीसी महिला बनीं। उन्होंने एंटीना को बदलने का कार्य किया, जो नासा के लिए महत्वपूर्ण है।

अंतरिक्ष यात्री भारतीय मूल के अनिल मेनन और सोफी एडेनो मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से बाहर निकले। दोनों अंतरिक्ष स्टेशन के स्पेस-टू-ग्राउंड एंटीना को बदलने का काम कर रहे हैं। यह अनिल का दूसरा स्पेसवॉक है। उनकी जड़ें भारत के केरल से जुड़ी हैं। वहीं, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी की अंतरिक्ष यात्री सोफी का यह पहला स्पेसवॉक है। एडेनो स्पेसवॉक करने वाली पहली फ्रांसीसी महिला बन गई हैं。
दोनों अंतरिक्ष यात्रियों ने की तैयारी
दोनों के जरूरी उपकरणों और सुरक्षा व्यवस्था की जांच पूरी करने के बाद ह्यूस्टन स्थित मिशन कंट्रोल सेंटर ने एडेनो का स्वागत करते हुए कहा कि अंतरिक्ष में आपका स्वागत है। इसके बाद दोनों आईएसएस के जेड1 ट्रस की ओर बढ़े। यह अंतरिक्ष स्टेशन की मुख्य ढांचे वाली रीढ़ के बीच वाले हिस्से में स्थित है। आईएसएस पृथ्वी से करीब लगभग 418 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्कर लगा रहा है।
एंटीना इसलिए है महत्वपूर्ण
यह एंटीना नासा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके जरिए अंतरिक्ष स्टेशन से धरती तक डेटा भेजा जाता है। इससे ह्यूस्टन स्थित मिशन कंट्रोल सेंटर और अंतरिक्ष स्टेशन के बीच तेज गति से संचार संभव होता है। यह स्पेसवॉक अंतरिक्ष स्टेशन के निर्माण, रखरखाव और उसमें सुधार के लिए किया जा रहा 282वां स्पेसवॉक है।
इस महीने भी स्पेसवॉक कर चुके हैं मेनन
इस महीने की शुरुआत में अनिल और अंतरिक्ष यात्री जेसिका मीर ने भी आईएसएस के बाहर करीब छह घंटे 27 मिनट बिताए थे। उन्होंने अंतरिक्ष स्टेशन की बिजली व्यवस्था के एक हिस्से को भविष्य में लगाए जाने वाले एक और रोल-आउट सोलर पैनल के लिए तैयार किया था।


