लाल सागर पर सऊदी गठजोड़ में भारत के जुड़ने के आसार नहीं

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सऊदी अरब ने लाल सागर को हूती विद्रोहियों के चंगुल से मुक्त कराने के लिए एक समुद्री गठजोड़ बनाया है। इसमें भारत शामिल नहीं है, जिससे भारत नाराज है। हूती विद्रोही बाब अल-मंदेब पर टोल लगाना चाहते हैं, जिससे वाणिज्यिक नौवहन प्रभावित हो रहा है। भारत स्थिति पर नजर रखे हुए है।

लाल सागर पर सऊदी गठजोड़ में भारत के जुड़ने के आसार नहीं

नई दिल्ली, मदन जैड़ा। लाल सागर को हूती विद्रोहियों के चंगुल से मुक्त कराने के लिए सऊदी अरब द्वारा बनाए जा रहे समुद्री गठजोड़ में भारत के शामिल होने के आसार नहीं हैं। उच्च पदस्त्र सूत्रों ने यह जानकारी दी है।

गठजोड़ का निर्माण

सऊदी अरब ने गुरुवार को 13 अन्य देशों के साथ लाल सागर की सुरक्षा के लिए एक सुमद्री गठबंधन बनाने का ऐलान किया था, जिसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश भी शामिल हैं। कुल 43 देशों के प्रतिनिधियों ने इस मुद्दे पर सऊदी अरब द्वारा आहूत बैठक में हिस्सा लिया था, लेकिन भारत इसमें शामिल नहीं था। लाल सागर पर यमन के निकट 29 किमी चौड़े बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर हूती विद्रोहियों का कब्जा है। विगत 20 जुलाई से उन्होंने इसे बाधित कर रखा है। इससे वाणिज्यिक नौवहन प्रभावित हो रहा है। दरअसल, होर्मुज के बंद होने के कारण ज्यादातर पोत लाल सागर से होकर गुजर रहे थे, लेकिन हूती विद्रोहियों के कब्जे के बाद यहां से भी आवागमन प्रभावित हो चुका है। होर्मुज के बंद होने के कारण सऊदी अरब का ज्यादादर कच्चा तेल इसी रास्ते से भेजा जा रहा था। इसलिए वह सर्वाधिक प्रभावित देश है। इसलिए उनके कब्जे से मुक्त कराने के लिए उसने यह गठजोड़ तैयार किया है। सूत्रों का कहना है कि इसके लिए कुल 51 देशों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन भारत को नहीं बुलाया गया। इससे भारत नाराज है। इसी प्रकार संयुक्त अरब अमीरात को भी आमंत्रित नहीं किया गया।

हूती विद्रोहियों की योजनाएँ

टोल लगाना चाहते हैं हूती विद्रोही

सूत्रों के अनुसार हूती विद्रोही बाब अल-मंदेब पर टोल लगाना चाहते हैं ताकि वहां से गुजरने वाले पोतों से उगाही की जा सके। यह वैसी ही कोशिश है जैसे ईरान होर्मुज में कर रहा है। बता दें कि हूती विद्रोही समूह ईरान समर्थित है और कोई बड़ी बात नहीं कि ईरान के इशारे पर ही हूती विद्रोहियों ने यह कदम उठाया हो ताकि दुनिया के समक्ष ऊर्जा संकट पैदा किया जा सके और इसके लिए अमेरिका पर दबाव बने। इस गठजोड़ में अमेरिका भी शामिल होगा या नहीं यह भी अभी स्पष्ट नहीं है। भारत की तरफ से सऊदी के गठजोड़ पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि लाल सागर की स्थिति पर भारत पैनी निगाह रखे हुए है।

सामान्य प्रश्न

भारत को क्यों इस समुद्री गठजोड़ में शामिल नहीं किया गया?
सूत्रों का कहना है कि इस गठजोड़ के लिए कुल 51 देशों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन भारत को नहीं बुलाया गया।
Hindustan | Bureau

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