यूके की कारें, स्कॉच, चॉकलेट, कॉस्मेटिक्स मंगवानी होंगी सस्ती
भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता लागू हो गया है। यह समझौता व्यापार, निवेश और रोजगार में वृद्धि का प्रयास है। भारतीय बाजार में यूके के उत्पादों के दाम में कमी और भारतीय उत्पादों पर कर में छूट मिलेगी। यह दरमियान भारतीय नौकरीपेशा और व्यापारियों को भी राहत मिलेगी।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। भारत-यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता आज से लागू होगा। समझौते को दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार का अनुमान है कि समझौते के बाद अब आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार में तेज बढ़ोतरी होगी। मौजूदा सालाना कारोबार 56 अरब डॉलर का है, जिसके अगले पांच वर्षों में बढ़कर दोगुना होने की संभावना है। अब भारतीय बाजार में यूके स्कॉच व्हिस्की, जिन, एक तीन करोड़ तक की प्रीमियम कारें, कॉस्मेटिक, ब्यूटी उत्पाद, मेडिकल उपकरण, कुछ दवाएं, मशीनरी और औद्योगिक उपकरणों के दाम कम होंगे। यूके से जुड़े बाजार में 99 फीसदी भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क नहीं लगेगा। इससे भारतीय कपड़े, चमड़े के सामान, समुद्री उत्पाद, रत्न, आभूषण, खिलौने, रसायन और इंजीनियरिंग सामान बिना किसी कर के यूके बाजार में बिकेंगे। इससे यूके के बाजार में भारतीय उत्पाद बेहतर प्रतिस्पर्धा कर पाएंगे। वहीं, भारत ने यूके से जुड़े उत्पादों के लिए अपने बाजार में 89.5 फीसदी टैरिफ लाइन पर उत्पाद शुल्क को शून्य कर दिया है。
नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी राहत
समझौते के तहत सामाजिक सुरक्षा के 4,000 करोड़ रुपये बचेंगे जो अभी तक भारतीयों को यूके में नौकरी करने पर भरने पड़ रहे थे। अब यूके में अस्थाई काम के लिए जाने वाले भारतीय कर्मचारियों को तीन साल तक यूके में सामाजिक सुरक्षा कर नहीं देना होगा। इससे करीब 75,000 भारतीय कर्मचारियों और 900 से अधिक भारतीय कंपनियों को सीधे तौर पर 4000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत होगी। इसके साथ ही, आईटी, हेल्थकेयर (डॉक्टर-नर्स), वित्तीय सेवा और शिक्षा क्षेत्र के पेशेवरों के लिए यूके जाने के नियम आसान हो गए हैं। भारत के 1800 शेफ (रसोइये), योग शिक्षक और शास्त्रीय संगीतकार भी अब हर साल समझौते के तहत आसानी से काम करने यूके जा सकेंगे।
व्यापारियों को राहत
छोटे व्यापारियों और ई-कॉमर्स को बढ़ावा देने के लिए नियमों को बहुत आसान बना दिया गया है। अब निर्यातक खुद ही अपने सामान की शुद्धता और देश (ओरिजिन) को प्रमाणित कर सकेंगे, जिससे कागजी कार्रवाई में लगने वाला समय बचेगा। इसके साथ ही, एक हजार पाउंड (करीब एक लाख रुपये) से कम के छोटे पार्सल के लिए किसी भी तरह के कागजी दस्तावेज की जरूरत नहीं होगी।
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