रक्सौल-वीरगंज के रास्ते नेपाल पहुंची बेली ब्रिज की पहली खेप, भारतीय दूतावास ने सौंपा
नेपाल के नुवाकोट और रसुवा में भोटेकोसी और त्रिशूली नदी में आई बाढ़ के बाद भारत सरकार ने राहत सामग्री भेजनी शुरू कर दी है। रक्सौल-वीरगंज सीमा के माध्यम से तीन बेली ब्रिज की मदद से यातायात बहाल होगा। भारतीय राजदूत ने बताया कि अब तक 130 टन से अधिक राहत सामग्री नेपाल भेजी गई है।

रक्सौल,एक संवाददाता। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई भीषण आकस्मिक बाढ़ के बाद नेपाल के प्रभावित इलाकों में यातायात बहाल करने के लिए भारत सरकार की राहत सामग्री पहुंचने लगी है। शनिवार को रक्सौल-वीरगंज सीमा के रास्ते 70 मीटर लंबे बेली ब्रिज के पार्ट-पुर्जों की पहली खेप ट्रकों से हेटौंडा स्थित सड़क डिवीजन कार्यालय पहुंची, जहां इसे आधिकारिक रूप से नेपाली अधिकारियों को सौंप दिया गया। नेपाल के नुवाकोट और रसुवा जिले में बाढ़ व भूस्खलन के कारण 35 पक्के और 17 झूला पुल बह गए हैं, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। नेपाल सरकार के आपातकालीन अनुरोध पर भारत सरकार ने 70 मीटर लंबाई के तीन बेली ब्रिज देने का निर्णय लिया है।
हेटौंडा में आयोजित हस्तांतरण कार्यक्रम में मकवानपुर-1 के सांसद प्रकाश गौतम, हेटौंडा की मेयर मीना कुमारी लामा, भारतीय दूतावास के प्रथम सचिव नारायण सिंह, सड़क डिवीजन के प्रतिनिधि किरण कार्की सहित स्थानीय प्रशासन, नेपाल पुलिस और एपीएफ के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। बेली ब्रिज के चालू होने से सर्वाधिक प्रभावित बेटरावती क्षेत्र में यातायात और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति अस्थायी रूप से बहाल हो सकेगी। बेली ब्रिज की शेष खेप भी जल्द ही इसी रास्ते नेपाल पहुंचेगी। भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने रसुवा भोटेकोसी त्रिशूली त्रासदी को ले कर नेपाल को भारत की ओर से दी जा रही निरंतर बाढ़ राहत सहायता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 26 अगस्त 2026 से अब तक भारत ने भारतीय वायु सेना के 8 विमानों के जरिए 130 टन से अधिक राहत सामग्री भेजी है, जिसमें तिरपाल, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लाइट और दवाइयां शामिल हैं। इसके अलावा चिलिमे और लांगटांग में राहत अभियानों के लिए विशेष टनल रेस्क्यू टीम सहित 54 विशेषज्ञ कर्मियों को तैनात किया गया है। साथ ही डीएनए किट व फॉरेंसिक सहायता प्रदान की गई है तथा आवागमन बहाल करने के लिए बेली ब्रिज के उपकरण दिए गए हैं, जिनमें 230 फीट लंबे पुल के लिए 16 ट्रक सामग्री और सात अन्य पुलों के लिए आवश्यक उपकरण शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारत नेपाल के हर दुःख सुख का साथी है,सहायता आगे भी जारी रहेगी।


