खेल : नीदरलैंड्स से हारकर भारत सेमीफाइनल से बाहर
हॉकी विश्व कप एम्सटेलवीन, एजेंसी। भारत का हॉकी विश्व कप में पदक का 51

हॉकी विश्व कप एम्सटेलवीन, एजेंसी। भारत का हॉकी विश्व कप में पदक का 51 साल का इंतजार इस बार भी खत्म नहीं हो पाया। पुरुष हॉकी टीम को शनिवार को आखिरी क्वार्टर में दो गोल गंवाना महंगा पड़ा। इसका खामियाजा हरमनप्रीत सिंह की टीम को विश्व कप के सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर होकर भुगतना पड़ा। ओलंपिक चैंपियन नीदरलैंड्स ने भारत को दूसरे दौर के पहले मुकाबले में 3-1 से पराजित किया।
भारत की चुनौती
भारत को 1975 के बाद पहली बार अंतिम चार में पहुंचने के लिए यह मैच हर हालत में जीतना था। पहले हाफ में अच्छा खेल दिखाने के बावजूद भारतीय टीम ने आखिरी दस मिनट में गलतियां कर मैच गंवा दिया। टीम को अब दूसरे दौर का आखिरी मैच सोमवार को अर्जेंटीना से खेलना है। इसके बाद टीम पांचवें से आठवें स्थान के क्लासीफिकेशन मुकाबले खेलेगी। भारत के लिए मैच का एकमात्र गोल कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने 52वें मिनट में पेनाल्टी पर किया। नीदरलैंड्स के लिए डुको टेलगेनकेंप (41वें मिनट), येप होडेमेकर्स (51वें मिनट) और वान डैम यिप (55वें मिनट ) ने मैदानी गोल दागे।
टीम की स्थिति
पहले दौर में इंग्लैंड से हारने वाली भारतीय टीम दूसरे दौर में कोई अंक लेकर नहीं आई थी। अब अर्जेंटीना को हराने के बाद भी उसके तीन ही अंक होंगे। इससे उसके अंतिम चार में पहुंचने की उम्मीदें खत्म हो गई। विश्व कप में भारतीय टीम नीदरलैंड्स को कभी हरा नहीं सकी है। यहां 1973 विश्व कप के फाइनल में उसे डच टीम ने पेनाल्टी शूटआउट में हराया था।
मैच का विश्लेषण
भारतीय टीम ने पहले हाफ में बेहद सधा हुआ खेल दिखाकर डच टीम को बांधे रखा। भारतीय बैकलाइन ने जहां कोई गलती नहीं की, वही मिडफील्ड में गेंद पर लंबे समय कब्जा नहीं रहने दिया। तीसरे मिनट में भारत ने दबाव बनाते हुए दाहिनी ओर से सर्कल में प्रवेश किया लेकिन डच डिफेंडरों ने प्रयास को सफल नहीं होने दिया। आठवें मिनट में हार्दिक के पास पर राजिंदर गेंद लेकर डी के भीतर गए लेकिन एक बार फिर भारत डच डिफेंस को भेद नहीं सका। मैच का पहला पेनाल्टी कॉर्नर डच टीमको 13वें मिनट में मिला लेकिन यिप यानसेन की ड्रैग फ्लिक को मनप्रीत ने अपनी रशिंग से बखूबी ब्लॉक किया। पहले पंद्रह मिनट में मैच पर भारतीय डिफेंस का दबदबा रहा। दूसरे क्वार्टर के शुरुआती मिनट में ही नीदरलैंड्स को लगातार तीन पेनाल्टी कॉर्नर मिले जिनमें से एक पर भी गोल नहीं हो सका।


