चीनी आक्रामकता को दो टूक: नियम आधारित हिंद-प्रशांत भारत-जापान की साझा प्राथमिकता

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-जापान शिखर सम्मेलन में कहा कि दोनों देश चीन की आक्रामकता का सामना करने के लिए एकजुट हैं। तकनीकी, रक्षा, और ऊर्जा सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने के कई समझौते किए गए। जापान अगले 10 वर्षों में भारत में 10 खरब येन निवेश करेगा। दोनों देशों के बीच रिश्ते नागरिकों के आपसी संपर्क पर आधारित हैं।

चीनी आक्रामकता को दो टूक:  नियम आधारित हिंद-प्रशांत भारत-जापान की साझा प्राथमिकता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत- जापान दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। मुक्त, समृद्ध और नियम आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र दोनों की साझा प्राथमिकता है। गुरुवार को दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-जापान शिखर सम्मेलन में चीन की आक्रामकता के खिलाफ स्पष्ट संदेश देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त बयान में ये बात कही। जापान की प्रधानमंत्री ताकाइची सनाए ने इसका पुरजोर समर्थन किया। जापान की प्रधानमंत्री ताकाइची सनाए ने भारत के साथ रणनीतिक सहयोग बढ़ाने की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि एक मुक्त, खुशहाल और नियमों पर आधारित हिंद-प्रशांत, दोनों देशों के लिए एक साझा प्राथमिकता बनी हुई है। उन्होंने ये भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की महासागर पहल जापान की संशोधित फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक (एफओआईपी) नीति के साथ काफी हद तक जुड़ी हुई है। दरसल भारत जापान समेत तमाम माहागरीय देश हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामकता का सामना कर रहे हैं जिसका मुकाबला करने के लिए भारत-जापान एकजुट दिखे। प्रधानमंत्री मोदी ने तकाइची को 'मेरी छोटी बहन' संबोधित किया और कहा कि वे जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री, एक दूरदर्शी और लोकप्रिय नेता हैं। इतना ही नहीं, वे जापान के नारा प्रीफेक्चर से आती हैं, जो भारत-जापान की साझा बौद्ध विरासत का एक बहुत महत्वपूर्ण केंद्र है। मोदी ने कहा कि वैश्विक उथल-पुथल के दौर में हमारी रणनीतिक संपत्ति आपसी विश्वास है। भारत-जापान की साझेदारी इस कसौटी पर खरी उतरी है.

एआई संस्थानों का जापानी भागीदारों संग समझौता

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले कई दशकों में आटोमोटिव से लेकर इलेक्ट्रानिक्स तक, जापान ने भारत की विकास प्रगति का अहम हिस्सेदार बनकर दोस्ती और विश्वास की एक अमूल्य पूंजी बनाई है। अब प्रधानमंत्री ताकाइची की यात्रा से हम अपनी विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक भागीदारी के नए अध्याय की शुरुआत कर रहे हैं। मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री ताकाइची और मेरा विश्वास है कि तकनीकी भागीदारी हमारे सहयोग का सबसे मजबूत स्तंभ बनेगी। भारतीय एआई इकोसिस्टम के कई प्रमुख संस्थानों ने भी अपने जापानी भागीदारों के साथ समझौते किए हैं। जापान की सटीक तकनीक और भारत की साफ्टवेयर क्षमता का संगम वैश्विक एआई विकास को नई गति और शक्ति देगा.

रक्षा क्षेत्र में पहली सह विकास परियोजना पर समझौता

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में भारत और जापान के पहली सह विकास परियोजना पर समझौता किया है। नेवल रडियो एंटीना का यह प्रोजेक्ट रक्षा तकनीक भागीदारी में एक नएअध्याय की शुरुआत करेगा। भविष्य में भी हम ऐसी तकनीकों को मिलकर विकसित करेंगे, जो क्षेत्रीय शांति, समुद्री सुरक्षा तथा नियम आधारित व्यवस्था को मिलकर मजबूत करेंगे। मोदी ने कहा कि भारत-जापान निवेश भागीदारी निरंतर सुदृढ हो रही है। पिछले एक वर्ष में 100 से अधिक नए कारोबार समझौते हुए हैं, जिनसे भारत में 10 अरब डालर से अधिक निवेश आएगा.

भारत में दस खरब येन निवेश करेगा जापान

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, वित्तीय सेवा एजेंसियों के बीच समझौते से निवेश की रफ्तार बढेगी। लक्ष्य है कि अगले 10 वर्षों में जापान से भारत में 10 खरब येन निवेश आएगा और भारत में जापान की कंपनियों की संख्या दोगुनी होगी। भारत में लगातार हो रहे सुधारों से कारोबार सुगमता बढी है। जापान की कंपनीज़ भी इसका लाभ उठा सकती हैं। पीएम मोदी ने कहा कि आज के अनिश्चितता भरे युग में भारत और जापान दोनों आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा का महत्व अच्छी तरह समझते हैं। इसी दिशा में आर्थिक सुरक्षा के लिए एक संयुक्त रोडमैप तैयार किया है। इसके माध्यम से हम सेमीकंडक्टर, क्वांटम और एडवांस मैटीरियल जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करेंगे.

ऊर्जा सुरक्षा क्षेत्र में भी बड़े करार

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा क्षेत्र में भारत जापान बायोगेस इनीसीएटिव के जरिए एक हजार बायोगैस और आर्गेनिक फर्टिलाइजर संयंत्र लगाने में सहायता मिलेगी। तेल संकट जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए ऊर्जा सुरक्षा मजबूती पर भी एक महत्वपूर्ण पहल हुई है। साथ ही बैटरी, ग्रीन हाइड्रोजन और परमाणु ऊर्जा में हमारा सहयोग विश्व के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य में महत्वपूर्ण योगदान देगा। दोनों देशों ने अगली पीढ़ी का मोबिलिटी पार्टनरशिप फ्रैम्वर्क तैयार किया है। इससे भारत ऑटोमोटिव सेक्टर में शिप-बिल्डिंग, एविएशन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में अपनी सफलता को दोहराएगा.

दुनिया की प्रगति को नई ऊंचाई मिलेगी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारे संबंधों की बड़ी ताकत हमारे नागरिकों के बीच संबंध हैं। हम टैलेंट मोबिलिटी, स्किलिंग और टेक्निकल इंटर्नशिप प्रोग्राम के अवसर भी बढ़ा रहें हैं। दोनों देशों के बीच रिसर्च,एजुकेशन और स्टार्ट-अप सहयोग भी सुदृढ़ कर रहें हैं। उन्होंने कहा कि हमारे संबंधों की नींव अटूट आपसी विश्वास पर टिकी है। मुझे पूरा विश्वास है कि हमारी यह विशेष साझेदारी, सशक्त और समृद्ध जापान के आपके विजन, विकसित भारत के हमारे संकल्प और विश्व की प्रगति को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी.

तीन मुद्दों पर चीन की घेराबंदी

1.खुले, मुक्त तथा नियम आधारित हिंद प्रशांत क्षेत्र की वकालत

2.क्वाड को पहले की भांति सक्रिय करने पर जोर

3.चीन पर से निर्भरता कम करने के लिए जापान से दुर्लभ खनिज पर समझौता

अन्य प्रश्न

भारत और जापान के बीच किन किन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौते किए गए हैं?
भारत और जापान के बीच तकनीकी, रक्षा, और ऊर्जा सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौते किए गए हैं।
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