चिली से व्यापार करार के लिए वार्ता आगे बढ़ेगी
भारत-चिली व्यापार समझौते की बातचीत की प्रगति की समीक्षा के लिए वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल इस महीने के अंत में चिली की यात्रा करेंगे। दोनों देश 2006 में तरजीही व्यापार समझौता लागू कर चुके हैं और इसे अब व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते में बदलने पर चर्चा कर रहे हैं।

नई दिल्ली, एजेंसी। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल भारत-चिली व्यापार समझौते की बातचीत में हुई प्रगति की समीक्षा के लिए इस महीने के अंत में चिली की यात्रा करेंगे। एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। भारत और चिली ने 2006 में तरजीही व्यापार समझौता (पीटीए) लागू किया था। अब दोनों देश इसके दायरे को बढ़ाकर व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) के रूप में विस्तार देने के लिए बातचीत कर रहे हैं। सीईपीए का उद्देश्य दोनों देशों के बीच मौजूदा पीटीए को व्यापक बनाना है। इसके तहत डिजिटल सेवाओं, निवेश को बढ़ावा देने, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) तथा महत्वपूर्ण खनिजों समेत कई क्षेत्रों को शामिल करने का प्रस्ताव है। चिली, लातिन अमेरिकी एवं कैरेबियाई (एलएसी) क्षेत्र में भारत का पांचवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है。
बातचीत में प्रगति की समीक्षा
अधिकारी ने बताया कि सचिव की इस यात्रा के दौरान बातचीत में हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर, हमें अच्छे समझौते का विकल्प मिलता है तो हम आगे बढ़ेंगे। अगर ऐसा नहीं मिलता है तो कोई जल्दबाजी नहीं है। वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि भारत मर्कोसुर समूह के साथ तरजीही व्यापार समझौते के लिए बातचीत आगे बढ़ा रहा है। मर्कोसुर लातिन अमेरिका का एक व्यापारिक समूह है, जिसमें ब्राजील, अर्जेंटीना, उरुग्वे और पैराग्वे शामिल हैं।
एफटीए का महत्व
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चार साल में नौ एफटीए हुए : गोयल
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि पिछले चार साल में अंतिम रूप दिए गए नौ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) ने घरेलू उद्योग के लिए बड़े अवसर खोले हैं। उन्होंने कहा कि ये समझौते सामूहिक रूप से वैश्विक व्यापार के करीब दो-तिहाई हिस्से से जुड़े हैं। वहीं, वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-जुलाई के दौरान देश का निर्यात करीब 15 प्रतिशत बढ़ा है। उन्होंने साथ ही भरोसा जताया कि चालू वित्त वर्ष 2026-27 में एक हजार अरब डॉलर के वस्तु एवं सेवा निर्यात का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा। वित्त वर्ष 2025-26 में निर्यात 863 अरब डॉलर रहा था।


