ट्रेंडिंग न्यूज़

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News विदेशकैसे वेस्ट बनाम रेस्ट बन रही इजरायल की जंग, चीन और रूस उठा रहे पूरा फायदा; भारत का क्या रोल

कैसे वेस्ट बनाम रेस्ट बन रही इजरायल की जंग, चीन और रूस उठा रहे पूरा फायदा; भारत का क्या रोल

हमास से जंग में यह तो साफ समझ आता है कि गाजा पर हमले के चलते अरब देश एकजुट क्यों हैं। लेकिन असल सवाल यह है कि चीन और रूस जैसे देश भी इजरायल के विरोध में आखिर क्यों जाते दिख रहे हैं।

कैसे वेस्ट बनाम रेस्ट बन रही इजरायल की जंग, चीन और रूस उठा रहे पूरा फायदा; भारत का क्या रोल
Surya Prakashलाइव हिन्दुस्तान,तेल अवीवMon, 13 Nov 2023 03:18 PM
ऐप पर पढ़ें

इजरायल और हमास के युद्ध ने बीते कुछ सालों में दुनिया का सबसे बड़ा ध्रुवीकरण किया है। इस संघर्ष ने अरब देशों समेत पूरी इस्लामिक दुनिया और चीन, रूस को एक पाले में खड़ा किया है तो ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी जैसे यूरोपीय देश और अमेरिका दूसरे गुट में हैं। इस मामले में यह साफ समझ आता है कि गाजा पर हमले के चलते अरब देश एकजुट क्यों हैं। लेकिन असल सवाल यह है कि चीन और रूस भी इजरायल के विरोध में क्यों जाते दिख रहे हैं। 7 अक्टूबर को हुई घटना के बाद से दुनिया वेस्ट और रेस्ट में बंट गई है। हां, भारत जैसे देश अपवाद हैं, लेकिन ज्यादातर मुल्कों ने इस मामले में स्पष्ट लाइन ली है। वहीं भारत ने इस मामले में बीच का रास्ता ही अपनाया है, जो रुख उसका गुटनिरपेक्ष आंदोलन के दौर से चला आ रहा है।

एक तरफ पश्चिमी दुनिया के देश सीधे तौर पर इजरायल संग खड़े दिखे तो वहीं चीन और रूस ने संतुलन की नीति अपनाते हुए पहले हमास के अटैक की निंदा की। फिर इजरायल के सैन्य ऐक्शन की भी आलोचना कर रहे हैं और उससे पीछे हटने की अपील कर रहे हैं। इस जंग के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद तक में इजरायल की सेना को पीछे धकेलने के लिए प्रस्ताव आ चुके हैं, लेकिन रूस और चीन ने उसका विरोध किया है। इजरायल के खिलाफ सुरक्षा परिषद में 4 प्रस्ताव आ चुके हैं, लेकिन अमेरिकी वीटो के चलते खारिज हुए हैं। वहीं चीन और रूस एक ही पाले में खड़े दिखे हैं।

इन प्रस्तावों में इजरायल की निंदा की गई है, जबकि अमेरिका ने यह कहकर वीटो लगाया कि इसमें इजरायल के सेल्फ डिफेंस के अधिकार का तो जिक्र ही नहीं है। यही नहीं हमास के प्रतिनिधिमंडल ने तो रूस का दौरा तक किया है। कहा जाता है कि वहां पर बंधकों को रिहा करने और सीजफायर की संभावनाओं पर बात हुई थी। चीन और रूस दोनों ने ही बीते कुछ दशकों में इजरायल के साथ संबंध मजबूत किए थे। चीन ने तो बड़े पैमाने पर इजरायल में निवेश भी किया। वहीं इजरायल ने रूस को सीरिया में छिड़े गृह युद्ध के दौरान मदद की थी।

कैसे इजरायल से दोस्ती के बाद भी पलट गए दोनों देश

लेकिन दोनों देशों के लिए अरब वर्ल्ड को नजरअंदाज करना भी आसान नहीं है। अरब वर्ल्ड इजरायल के सैन्य हमलों से चिंतित है। यह गुस्सा यहां तक है कि इजरायल से दोस्ती करने वाले यूएई और सऊदी अरब तक ने फिलहाल उससे दूरी बना ली है। जानकार मानते हैं कि इस रणनीति के पीछे वजह यह है कि अमेरिका के ध्रुव वाले वर्ल्ड ऑर्डर को वैकल्पिक व्यवस्था के साथ चुनौती दी जा सके। इसी के तहत चीन अरब वर्ल्ड को साथ लेना चाहता है। जबकि यूक्रेन युद्ध के बाद अकेला पड़ा रूस इस मौके को दुनिया के एक ध्रुव को साथ लेने के मौके के तौर पर देख रहा है।

UN में आए प्रस्ताव से भी चीन-रूस को ही फायदा

संयुक्त राष्ट्र में भी इजरायल के खिलाफ शनिवार को जो प्रस्ताव आया था, उसमें 145 वोट पक्ष में पड़े। अमेरिका समेत महज 7 वोट खिलाफ थे और 18 देश गैरहाजिर रहे। इससे साफ था कि ग्लोबल साउथ, अरब वर्ल्ड, साउथ अमेरिका और यूरोप के बड़े हिस्से समेत तमाम देश इजरायल के विरोध में खड़े दिखे। ऐसे में चीन और रूस अमेरिका को इस मसले पर अलग दिखाकर बड़े पैमाने पर दुनिया में गोलबंदी का हिस्सा बनना चाहते हैं। यही दोनों की स्मार्ट स्ट्रैटजी है।