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कैसे ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष का केंद्र बन रहा भारत, जानें समीकरण

लाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीAditya Kumar
Thu, 25 Nov 2021 02:00 PM
कैसे ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष का केंद्र बन रहा भारत, जानें समीकरण

हाल ही में भारत में इजरायल के राजदूत नाओर गिलान ने ईरान को मिडिल ईस्ट में सबसे बड़ा अस्थिर करने वाला देश बताया। यह बात उन्होंने अपने पहले प्रेस कांफ्रेंस में कही। उन्होंने नए क्वाड को लेकर भी बात रखी जिसमें अमेरिका, इजरायल, भारत और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। हारेत्ज़ की रिपोर्ट बताती है कि नाओर के इस कमेंट के बाद भारत में ईरानी दूतावास और इजरायली विदेश मंत्रालय के डायरेक्टर जनरल एलोन उश्पिज के बीच विवाद शुरू हो गया। ईरानी एंबेसी ने नाओर को 'दुष्ट विचारधारा वाला यहूदी दूत' बताया। उनके कमेंट को बचकाना कहा। इसके साथ ही इजरायल को 'टेरर हाउस' और 'स्वार्थी और खून का प्यासा शासन' बता दिया। इस पर फिर नाओर ने शुक्रिया कहते हुए कहा कि अगर 57 की उम्र में मुझे कोई साहसी और बचकाना कहता है तो मैं इसे तारीफ के तौर पर देखता हूं।

पहली बार नहीं है जब नई दिल्ली इजरायल-ईरान संघर्ष के लिए मैदान बना हो

जनवरी 2021 में इजरायली एंबेसी के सामने हुए छोटे स्तर के ब्लास्ट के लिए इजरायल ने ईरान को जिम्मेदार बताया था। 2012 में भी इस क्षेत्र में हुए एक ब्लास्ट में एक इजरायली डिप्लोमैट सहित 4 लोग घायल हो गए थे।

कबीर तनेजा थिंक टैंक ग्रुप ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के साथ जुड़े हुए हैं। मामले को लेकर उन्होंने हारेत्ज़ से बात करते हुए बताया है कि भारत ने मिडिल ईस्ट में किसी का पक्ष नहीं लेने को लेकर निवेश किया है। 2012 ब्लास्ट के बाद नई दिल्ली ने तेहरान को साफ बताया था कि भारतीय जमीन पर इस तरह की गतिविधियों से दोनों देशों के संबंध पर असर पड़ेगा। भारत ने 2020 में भी इसी तरह का संदेश तेहरान को दिया था।

1992 में इजरायल के साथ आधिकारिक तौर पर राजनयिक संबंध स्थापित करने के बाद से भारत ने ईरान और इजरायल दोनों के साथ सफलतापूर्वक संबंध बनाए हुए हैं। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि इजरायल ने हमेशा से भारत को ईरान से दूरी बनाने को कहा है। लेकिन इस तरह से भारत की जमीन से ईरान को लेकर ऐसा पहली बार कहा गया है कि ईरान मिडिल ईस्ट में अस्थिरता फैलाने में जुटा हुआ है। भारत नहीं चाहेगा कि वह इजरायल-ईरान विवाद में घसीटा जाए।

भारत इजरायल संबंध से ईरान परेशान?

हाल के सालों में भारत और इजरायल के संबंध मजबूत होते जा रहे हैं। यह सच है कि भारत, इजरायल से बड़ी मात्रा में हथियार खरीदता है। 2020 स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, भारत रूस और फ्रांस के बाद तीसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता इजरायल से अपने हथियारों का 13 फीसद आयात करता है। दोनों देशों के बीच ट्रेड भी बढ़ता जा रहा है। दोनों ही देश 2022 में फ्री ट्रेड अग्रीमेंट पर भी साइन करने वाले हैं।

हाल के महीनों में भारत के विदेश मंत्री और सैन्य प्रमुख इजरायल का दौरा कर चुके हैं। इजरायली पीएम नफ्ताली बेनेट 2022 की शुरुआत में भारत के दौरे पर आने की तैयारी में हैं। ग्लासगो में COP26 जलवायु शिखर सम्मेलन में जब पीएम मोदी और नफ्ताली मिले तो उन्होंने मोदी से मजाक में कहा था कि इजरायल में आप सबसे लोकप्रिय हैं। आइए मेरी पार्टी में शामिल हो जाइए।

भारत और इजरायल के बीच संबंध से ईरान परेशान रहा है। यही कारण है कि ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने पिछले साल कश्मीर का मुद्दा उठाया था। 2010 में उन्होंने कश्मीर क्षेत्र को लेकर भारतीय पॉलिसी को 'यहूदी शासन' बताया था। लेकिन ऐसे कम उदाहरण हैं जब ईरान ने कश्मीर मसले को उठाया हो। हालंकि 2017 में जब पीएम मोदी इजरायली दौरे पर थे तो ईरान ने दो हफ्ते में दो बार कश्मीर मसले पर भारत को सुनाया था।

इजरायल और यूएई के कारण भारत और ईरान संबंधों पर अब तक गहरा असर नहीं डाला है। हालांकि 2019 में अमेरिका द्वारा ईरान पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद नई दिल्ली और तेहरान के बीच संबंध अशांत हो गए थे। ईरान में इस बात की निराशा था कि भारत ने ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर कुछ नहीं कहा।

हारेत्ज़ से बात करते हुए विदेश नीति विश्लेषक आर्यमन भटनागर ने कहा है कि भारत का झुकाव ईरान के बदले खाड़ी देश और इजरायल की ओर अधिक है। भारत ईरान में निवेश नहीं करता लेकिन खाड़ी के देशों से तेल आयात कर सकता है। इन देशों में प्रवासी भारतीयों की बड़ी आबादी है। भारत का इजरायल के साथ मजबूत सुरक्षा संबंध है। इस सबके बावजूद भारत इजरायल और ईरान के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता है।

गोल्डन गेटवे

अफगानिस्तान के हालात को देखते हुए ईरान और भारत फिर से नजदीक जा रहे हैं। 2021 की गर्मियों में भारतीय विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर दो बार तेहरान का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने नए राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी से भी मुलाकात की है। दोनों देश मिलकर चाबाहर पोर्ट को विकसित करने का काम कर रहे हैं। इस पोर्ट के जरिए भारत पाकिस्तान को बायपास करते हुए सेंट्रल एशिया तक आसानी से पहुंच सकेगा। यह पोर्ट दोनों देशों के लिए 'गोल्डन गेटवे' जैसा है।

इस पोर्ट से इजरायल के कोई हित प्रभावित नहीं होते दिख रहे हैं। वैसे एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि कोई भी देश भारत पर कुछ भी करने के लिए दबाव नहीं बना सकता है। भारत हर किसी को हर मसले पर खुश नहीं कर सकता है। यह बताता है कि भारत अपनी विदेश नीति पर किस तरीके से काम कर रहा है।

(हारेत्ज़ के लिए इस लेख को सौदामिनी जैन ने लिखा है।)

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