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ICJ के एक कदम से कैसे और मजबूत हो गए नेतन्याहू, US से इजरायल तक अचानक यूं बदल गया माहौल?

Israel ICJ Case: कुछ दिनों पहले तक कहा जा रहा था कि इजरायल में अब बेंजामिन नेतन्याहू के दिन गिने-चुने बचे हैं लेकिन ICJ के मामले ने इजरायल में अब उनके प्रति सहानुभूति की लहर पैदा कर दी है।

ICJ के एक कदम से कैसे और मजबूत हो गए नेतन्याहू, US से इजरायल तक अचानक यूं बदल गया माहौल?
Pramod Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीFri, 24 May 2024 04:07 PM
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पिछले करीब साढ़े सात महीने से गाजा पर लगातार बम बरसा रहे इजरायल के खिलाफ दक्षिण अफ्रीका ने संयुक्त राष्ट्र की सर्वोच्च अदालत इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) में याचिका दायर की है और युद्ध अपराधी ठहराने के साथ-साथ इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। ताकि गाजा में इजरायली सैन्य ऑपरेशन रोका जा सके। माना जा रहा है कि आज (24 मई को) ICJ  अपना फैसला सुना सकती है। हाल ही में 20 मई को ICJ के चीफ प्रॉसिक्यूटर करीम खान ने बेंजामिन नेतन्याहू और इजरायली रक्षा मंत्री योव गैलेंट समेत हमास लीडर याह्या सिनवार के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने की मांग की थी। 

अगर इंटरनेशनल कोर्ट का फैसला इजरायल के खिलाफ आता है तो बेंजामिन नेतन्याहू पर मानसिक दबाव बढ़ने के अलावा कुछ नहीं हो सकता है क्योंकि नेतन्याहू इजरायल से लेकर अमेरिका तक और मजबूत बनकर उभरे हैं। इसे इस बात से समझा जा सकता है कि जिस नेतन्याहू के खिलाफ इजरायल में विरोध-प्रदर्शन हो रहे थे और विपक्षी दल जिनकी आलोचना करते नहीं थक रहे थे, वही दल अब इंटरनेशनल कोर्ट के मामले में बेंजामिन नेतन्याहू के साथ आ खड़े हुए हैं। 

कुछ दिनों पहले तक कहा जा रहा था कि इजरायल में अब नेतन्याहू के दिन गिने-चुने बचे हैं लेकिन ICJ के मामले ने इजरायल में अब उनके प्रति सहानुभूति की लहर पैदा कर दी है। इतना ही नहीं अमेरिका में भी फिलिस्तीन समर्थकों ने भारी-विरोध प्रदर्शन किया था। कुछ दिनों पहले तक अमेरिका भी इजरायल पर हथियार सप्लाई पर बैन लगाने की बात कर रहा था लेकिन जैसे ही ICJ में इजरायल के खिलाफ मामले में प्रगति हुई, अमेरिका ने अपना स्टैंड बदल दिया है और फिर से इजरायल को समर्थन देना चालू कर दिया है। 

अभी हाल ही में अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र में खुलकर इजरायल का पक्ष लिया है। इसके अलावा बाइडेन प्रशासन को लगता है कि अगर नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी होता है तो यह उसके लिए अपमानजनक होगा क्योंकि वह शुरू से ही इजरायल का समर्थन करता रहा है। साथ ही पूरी दुनिया में यह संदेश जाएगा कि अमेरिका से साथी देश को दंडित किया गया है। इससे वैश्विक राजनीति में अमेरिका का पलड़ा कमजोर पड़ सकता है।

यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि नेतन्याहू के मजबूत होने का सबसे बड़ा कारक  ICJ के चीफ प्रॉसिक्यूटर करीम खान बनकर उभरे हैं, जिनके पैनल में कुल छह सदस्य हैं और उनमें से पांच उनके ही देश के रहने वाले हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि खान ने ऐसे समय नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने की मांग की, जब उनके ही देश में उनकी ही वार कैबिनेट के एक मंत्री यह धमकी दे रहे थे कि वह सरकार से इस्तीफा दे देंगे लेकिन ICJ में मामले में हुई प्रगति ने इजरायल की अंदरूनी राजनीति को यू-टर्न लेने पर मजबूर कर दिया है। अब वही मंत्री  नेतन्याहू का खुलकर समर्थन कर रहे हैं।

दूसरी तरफ, नेतन्याहू के सबसे कट्टर राजनीतिक दुश्मन और विपक्ष के नेता यार लैपिड ने भी ICJ के चीफ प्रॉसिक्यूटर करीम खान की मांग को एक "आपदा" बताकर उसकी निंदा की है। उन्होंने एक्स पर लिखा कि इंटरनेशन कोर्ट की  गिरफ्तारी वारंट पूरी तरह से नैतिक विफलता है। हम नेतन्याहू और सिनवार के बीच अपमानजनक तुलना स्वीकार नहीं कर सकते। हम इजरायल के नेताओं और हमास के नेताओं की बराबरी नहीं कर सकते। कुल मिलाकर देखें तो करीम खान के दांव से नेतन्याहू का पलड़ा देश के अंदर और देश के बाहर दोनों जगह भारी हो गया है।