खेल : जर्मनी की नजर खिताब का बचाव करके चौथी बार चैंपियन बनने पर
हॉकी विश्व कप का 16वां संस्करण शनिवार से शुरू हो रहा है। इस बार 16 टीमें भाग लेंगी। मौजूदा चैंपियन जर्मनी चौथी बार खिताब की रक्षा की कोशिश करेगा। भारत को इंग्लैंड से चुनौती मिलेगी, जबकि नीदरलैंड्स को अर्जेंटीना से महत्वपूर्ण मुकाबला करना होगा। भारत की हॉकी टीम को अप्टन से समर्थन प्राप्त है।

एफआईएच विश्व कप : शनिवार से शुरू हो रहा है हॉकी का महाकुंभ, मौजूदा चैंपियन की राह रोकने को तैयार नीदरलैंड्स और ऑस्ट्रेलिया की टीमें जर्मनी की नजर खिताब का बचाव करके चौथी बार चैंपियन बनने पर
विश्व कप का रिकॉर्ड
04 बार सर्वाधिक खिताब जीतना है पाकिस्तान की टीम ने
03 बार नीदरलैंड्स, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी चैपियन बनीं
01 बार भारत और बेल्जियम की टीमों ने खिताब जीता
16वां संस्करण विश्व कप का 16 दिन चलेगा, 16 टीमें खेलेंगी
भारत की उम्मीदें
नई दिल्ली। शनिवार से शुरू होने वाले हॉकी विश्व कप के 16वें संस्करण के लिए 16 टीमें कमर कसकर तैयार हैं। दो देशों (बेल्जियम और नीदरलैंड्स नंबर दो ) की संयुक्त मेजबानी में हो रहे इस हॉकी महाकुंभ में जहां सभी प्रमुख टीमें खिताब का दावा पेश करने उतरेंगी, वहीं मौजूदा चैंपियन जर्मनी की नजर खिताब का बचाव करते हुए चौथी बार चैंपियन बनने पर होगी।
रोकेंगी दिग्गज टीमें : जहां एक ओर जर्मनी लगातार दूसरा खिताब जीतने को ऐड़ी-चोटी का जोर लगाएगा, वहीं मेजबान टीमें बेल्जियम (नंबर वन रैंक) और नीदरलैंड्स (नंबर 2 रैंक) के साथ ही इंग्लैंड (नंबर 3) और ऑस्ट्रेलिया (नंबर 4) उसकी राह रोकने को तैयार हैं। फिलहाल जर्मनी विश्व रैंकिंग में पांचवें स्थान पर है। ऐसे में टूर्नामेंट में उसकी राह उतनी आसान भी नजर नहीं आ रही।
चुनौतियाँ और रणनीतियाँ
जर्मनी के पूल बी में ही शीर्ष बेल्जियम की टीम भी है। ऐसे में चैंपियन टीम को पूल में फ्रांस और मलेशिया पर बड़ी जीत दर्ज करनी होगी। दूसरी ओर, नीदरलैंड्स को पूल ए में सातवीं रैंक अर्जेंटीना से बड़ी चुनौती मिल सकती है। हालांकि जापान और न्यूजीलैंड की टीमें भी कड़ी टक्कर देने में सक्षम हैं। पूल सी में ऑस्ट्रेलिया को छठी रैंकिंग वाली स्पेन की मजबूत टीम का भी सामना करना होगा। हालांकि इसके अलावा पूल में आयरलैंड और दक्षिण अफ्रीका से उसे कोई खतरा नजर नहीं आता।
भारत की राह आसान : विश्व रैंकिंग में आठवें स्थान पर मौजूद भारत को पूल डी में सबसे बड़ी चुनौती इंग्लैंड से मिलेगा। दुनिया में तीसरे नंबर की टीम इंग्लैंड के खिलाफ हालांकि भारत का पलड़ा आंकड़ों में भारी है। दोनों के बीच नौ मैच में से चार भारत ने और तीन इंग्लैंड ने जीते जबकि दो ड्रॉ रहे। फिलहाल 12वीं रैंकिंग पर मौजूद चार बार के चैंपियन पाक के खिलाफ भारत का रिकॉर्ड 3-2 है। वहीं वेल्स के साथ हुए एक मैच में भारत जीता था।
इसके बावजूद भारत को पूल चरण में कोई भी मुकाबल हल्के में नहीं लेना होगा। भारतीय दारोमदार कप्तान हरमनप्रीत सिंह के खेल के साथ ही उनके कुशल नेतृत्व पर होगा। साथ ही, मिडफील्डर हार्दिक सिंह और मनप्रीत सिंह के अलावा फॉरवर्ड मनदीप सिंह और अभिषेक भी हर मुकाबले में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
अप्टन का योगदान
अप्टन क्रिकेट के बाद अब हॉकी टीम से चाहते हैं विश्व खिताब
एमस्टेलवीन, एजेंसी। भारत की 2011 क्रिकेट विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा रहे मानसिक अनुकूलन कोच पैडी अप्टन को अब हॉकी टीम से भी विश्व खिताब की उम्मीद है। हालांकि उनका मानना है कि टीम को टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही चैंपियन वाली सोच विकसित करनी होगी।
चैंपियन की सोच हो : पेरिस ओलंपिक में पुरुष हॉकी टीम के कांस्य पदक अभियान में शामिल रहे अप्टन ने कहा, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चैंपियन टूर्नामेंट में चैंपियन की सोच लेकर ही आते हैं। वे यह साबित करने के लिए कि वे चैंपियन हैं, फाइनल जीतने का इंतजार नहीं करते। हमें भी यह सुनिश्चित करना होगा कि हम किसी भी अन्य टीम की तरह फिट हों, हमारा आहार किसी भी अन्य टीम की तरह अच्छा हो तथा नींद और आराम के मामले में हमारा ध्यान विश्व चैंपियन मानकों के अनुरूप हो।
तैयारी में अतंर : उन्होंने कहा कि क्रिकेटरों और हॉकी खिलाड़ियों को तैयार करने में सबसे बड़ा अंतर टीम की गतिशीलता में है। उन्होंने कहा, क्रिकेट में अधिकांश काम खिलाड़ी के व्यक्तिगत प्रदर्शन पर केंद्रित होता है, जबकि हॉकी में टीम का प्रदर्शन बहुत महत्वपूर्ण होता है। किसी खिलाड़ी की मानसिकता उसके आसपास के खिलाड़ियों को कैसे प्रभावित करती है, यह बहुत महत्वपूर्ण है।


