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अमेरिका में गन कल्चर: हर दिन गोलीबारी में होती हैं 39 मौतें

अमेरिका में गन कल्चर

अमेरिकी राज्य फ्लोरिडा में बुधवार को एक स्कूल में गोलीबारी में कम से कम 17 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। एक आंकड़े के अनुसार अमेरिका में हर दिन 39 मौतें फायरिंग से होती है। अमेरिका में गन कल्चर के चलते मास शूटिंग की घटनाएं बहुत आम बात है। 2014 से अब तक 1363 मास शूटिंग की घटनाएं हो चुकी है। वजह भी साफ है अमेरिका में बंदूक रखना उतना ही आसान है जैसे भारत में लाठी-डंडा रखना।

दरअसल 15 दिसंबर 1791 को अमेरिकी संविधान में दूसरा संशोधन हुआ तो उसमें बंदूक रखने को एक बुनियादी अधिकार माना गया। अमेरिका का दूसरा संविधान संशोधन कहता है, एक नियंत्रित नागरिक सेना स्वतंत्र राज्य की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। इसलिए लोगों को हथियार रखने से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।' 

गन वायलेंस आर्काइव के अनुसार 2014 से अब तक अमेरिका में गोलीबारी की घटनाओं में 58,581 लोगों मौत हुई है। यानि हर दिन 39 मौतें। इसमें आत्महत्या का आंकड़ा शामिल नहीं है। अमेरिका में हर साल हजारों के लाइसेंसी बंदूक से आत्महत्या कर लेते हैं। साल 2014 में 21,386 लोगों ने बंदूक से गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी।

अमेरिका, जिसका दुनिया की आबादी में 5 फीसदी हिस्सेदारी ​है, लेकिन दुनिया भर में लाइसेंसी हथियारों के मामले में इसकी हिस्सेदारी 35 से 50 फीसदी है। अमेरिका का संघीय कानून हथियारों का लाइसेंस देने के मामले में सख्त है, लेकिन राज्यों का कानून अलग है। अमेरिका में बंदूक रखना उतना ही आसान है जैसे भारत में लाठी-डंडा रखना। यहां 88.8 फीसदी लोगों के पास बंदूकें हैं जो दुनिया में प्रति व्यक्ति बंदूकों की संख्या के लिहाज से सबसे बड़ा आंकड़ा है।

साल       घटनाएं       मौत
2014-    51863  12,556
2015-    53726  13,515
2016-    58851  15,094
2017-    61497  15,590
2018-     6572   1,826

1991 से बाद अमेरिका में मास शूटिंग की बड़ी घटनाएं
लास वेगास, 2017- 58 मौतें
फ्लोरिडा, 2016-  49 मौतें
वर्जिनिया, 2007- 32 मौतें
सैंडी हुक, 2012-  27 मौतें
टेक्सास, 2017-   26 मौतें
टेक्सास, 2017-   23 मौतें
फ्लोरिडा, 2018-   17 मौतें
कैलिफोर्निया, 2015- 14 मौतें
टेक्सास,  2009- 13 मौतें

एआर 15 राइफल से ज्यादातर मास शूटिंग

असॉल्टवेपंस डॉट इन्फो के मुताबिक, 1986 से 2009 के बीच अमेरिका में 33 लाख एआर 15 राइफल बेचे गए हैं। 1994 के बाद से कई तरह के बंदूक को प्रतिबंधित कर दिया गया, लेकिन नेशनल राइफल एसोसिएशन की लगातार पैरवी के बाद यह प्रतिबंध हटा लिया गया। इसकी कीमत केवल 940 डॉलर है। इस बंदूक की कीमत अमेरिका में 13 इंच के मैकबुक से भी कम है। एआर 15 राइफल से एक मिनट में 45 राउंड फायरिंग की जा सकती है। इसके अलावा यह 3000 फुट प्रति सेकेंड की दूरी से फायर करता है। फ्लोरिडा में हुए हमले में भी हमलावर के पास यही राइफल था।

बराक ओबामा भी नहीं हो सके थे सफल

दुनिया भर में लाइसेंसी हथियारों का 35 से 50 फीसदी अमेरिका में है। यही वजह है कि प्रति 10 लाख आबादी पर सरेआम गोली चलाने (मास शूटिंग) की घटनाएं अमेरिका में सबसे ज्यादा हैं। 2012 में इसकी दर 29.7 रही। 

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को अमेरिका में हथियार कानूनों को सख्त बनाने का मुखर समर्थक माना जाता था। लेकिन, दुनिया के सबसे ताकतवर शख्स रहे ओबामा की भी इस मुद्दे पर एक ना चली। 2012 में सैंडी हुक में गोलीबारी की घटना के बाद हथियार कानूनों को सख्त बनाने की दिशा में कुछ ठोस प्रयास हुए थे लेकिन वे सफल न हो सके और सीनेट में हथियार कानूनों को सख्त बनाने के प्रस्ताव गिर गए थे। रिपब्लिकन पार्टी के नेता ऐसे बदलाव के मुखर विरोधी हैं। इस समय अमेरिकी कांग्रेस में रिपब्लिकनों का दबदबा है। एनआरए की तरह वे भी मानते हैं कि बंदूक रखना और इसे लेकर चलना आत्मरक्षा के लिए जरूरी है।

मजबूत हथियार लॉबी सख्त कानून के राह में रोड़ा
संवैधानिक व्याख्या को बदलने की अड़चन के बीच अमेरिका की शक्तिशाली हथियार लॉबी भी हथियारों पर नियंत्रण के प्रयासों की मुखर विरोधी है। इनमें नेशनल राइफल एसोसिएशन (एनआरए) नाम सबसे ऊपर आता है। इसका अनौपचारिक नारा ही है कि ‘बंदूकें किसी को नहीं मारतीं, लोग एक-दूसरे को मारते हैं।’ इस संगठन के सदस्यों की संख्या 50 लाख होने की वजह से इस संगठन का राजनीतिक वजन भी खासा है।

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  • Web Title:Gun culture in the United States know about mass shooting facts in us