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ऐसा जादूगर जिसने रातों-रात खड़ा किया ऐसा नकली शहर, मिस्र समझकर फायरिंग करने लगे जर्मन सैनिक

Great Magician in World War II: दुनिया का ऐसा महान जादूगर, जिसने द्वितीय विश्व यु्द्ध में रातों-रात नकली शहर बना डाला। वो इतना असली दिख रहा था कि जर्मनी ने असली मिस्र समझकर उस पर हमला बोल दिया।

ऐसा जादूगर जिसने रातों-रात खड़ा किया ऐसा नकली शहर, मिस्र समझकर फायरिंग करने लगे जर्मन सैनिक
Gaurav Kalaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीThu, 30 May 2024 01:11 PM
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Great Magician in World War II: दुनिया का वो महान जादूगर, जिसने द्वितीय विश्व युद्ध में रातों-रात नकली शहर बना डाला। वो इतना असली दिख रहा था कि जर्मनी ने असली मिस्र समझकर उस पर हमला बोल दिया। जब द्वितीय विश्व युद्ध अपने उफान में था, एक ब्रिटिश जादूगर ने ऐसी कलाकारी दिखाई कि क्रूर जर्मन सेना चकमा खा गई। इसने रातों-रात समुद्र में नकली मिस्र शहर बना डाला। जब जर्मन सैनिक अपने लाव-लश्कर के साथ मौके पर पहुंचे तो असली शहर समझकर जमकर बमबारी की। जर्मन सैनिकों को लगा कि वह शहर को तबाह कर चुके हैं और वहां से निकल गए। यही नहीं इस जादूगर ने इससे पहले नाजी सैनिकों को चकमा देने के लिए कार्डबोड की मदद से रेगिस्तान में नकली जर्मन जहाज बना दिया। इस जादूगर के करतब देखने के बाद इसे ब्रिटिश सरकार ने सेना में एक टीम की कमान सौंप दी थी।

हम बात कर रहे हैं, 20वीं सदी के महान जादूगर जैस्पर मास्कलीन की। वह 1930 तक ब्रिटेन के सबसे प्रसिद्ध जादूगरों में से एक हो चुके थे। कुछ लोग उन्हें ब्रिटिश इतिहास का सर्वकालिक महान जादूगर भी मानते हैं। 1937 की एक फिल्म में उन्हें एक दर्जन धारदार ब्लेड निगलते हुए भी दिखाया गया था। हालांकि यह उनके सर्वकालिक करतबों के आगे कुछ खास नहीं।

विश्व युद्ध में ऐसा जादू दिखाया, नाजी भी खा गए चकमा
जैस्पर के लिए जादू कोई नहीं चीज नहीं थी। यह उन्हें विरासत में मिली थी। उनके पहले उनके दादा हवाई करतब दिखाने में माहिर थे। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, जैस्पर ने अपने जीवन का सबसे बड़ा कारनामा किसी मंच पर नहीं, दूसरे विश्व युद्ध के दौरान काहिरा के पास एक रेगिस्तान में किया। यहां वो ब्रितानी सेना के साथ काम पर थे और अपनी स्पेशल टीम की मदद से नाजियों को चकमा देने में कामयाब रहे। 

जब द्वितीय विश्व युद्ध की घोषणा हुई तब जैस्पर 37 वर्ष के थे। युद्ध के दौरान उन्होंने ब्रिटिश रॉयल इंजीनियरिंग कोर के लिए स्वेच्छा से काम किया। अपनी आत्मकथा 'मैजिक: टॉप सीक्रेट' में, जैस्पर ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान एक टीम का नेतृत्व करने का दावा किया। उन्होंने लोगों को लंदन की टेम्स नदी में कार्डबोर्ड और शीशे की मदद से एक जर्मन जहाज बना दिया।

जैस्पर की मैजिक गैंग ने किया कमाल
इस उपलब्धि के तुरंत बाद, ब्रिटिश सेना ने जैस्पर से संपर्क किया और उन्हें 'फोर्स ए' में शामिल होने का ऑफर दिया। यह उस वक्त एमआई 9 का एक खुफिया विभाग था, जिसे दुश्मन की सेना से शहरों को बचाने के लिए स्पेशल तौर पर नियुक्त किया गया था। जैस्पर के अनुसार, सेना ने उन्हें एक टीम की कमान सौंपी। जिसे कई लोग 'द मैजिक गैंग' या 'द क्रेजी गैंग' कहते थे। जैस्पर के अलावा उनकी टीम में इलेक्ट्रीशियन, केमिस्ट, सेट डिजाइनर, आर्किटेक्ट, चित्रकार और अन्य लोग शामिल थे।

रातों-रात नकली मिस्र खड़ा कर दिया
जैस्पर का दावा है कि वह और उनकी टीम जर्मन हमलावरों से मिस्र को छिपा सकते थे और उन्होंने यह काम करके भी दिखाया। जैस्पर के अनुसार, उन्होंने शहर से लगभग 5 किलोमीटर दूर एक खाड़ी में नकली इमारतें, एक लाइटहाउस और विमान भेदी बंदूकें बना डाली। जब जर्मन विमान हमला करने आए, तो उन्होंने कुछ नकली इमारतों पर हमला किया। नाजी हमलवारों को लगा कि वे शहर को बर्बाद कर चुके हैं और वहां से निकल गए। 

रणनीति से जर्मन सैनिक खा गए चकमा 
1942 में अल-अलामिन की दूसरी लड़ाई के दौरान, जैस्पर और उनकी टीम ने दुश्मन से बचने के लिए 'ऑपरेशन बर्ट्राम' नामक एक योजना तैयार की। जिसके लिए उन्होंने धुएं और शीशों का इस्तेमाल किया। उनकी यह रणनीति आज भी किताबों में सैन्य रणनीति के रूप में पढ़ाई जाती है। जैस्पर की पुस्तक के अनुसार, ऑपरेशन की बड़ी सफलता जर्मनी को यह विश्वास दिलाना था कि मित्र देशों की सेनाएं दक्षिण से हमला करेंगी, जबकि वास्तव में ब्रिटिश मार्शल बर्नार्ड मोंटगोमरी की सेना ने उत्तर से हमला कर चुकी थी।

उत्तर से सेना की बढ़त को छुपाने के लिए, जैस्पर ने 1000 टैंकों को ट्रकों के रूप में छिपाने के लिए कैनवास और प्लाईवुड का इस्तेमाल किया। जबकि दक्षिण में उन्होंने 2000 नकली टैंक, एक रेलवे लाइन, पानी के पाइप का नकली निर्माण कर दिया। उनके द्वारा बनाए गए नकली टैंक बिल्कुल असली दिखते थे।