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चीन के चक्कर में फंसे गोताबाया राजपक्षे और लगा दी देश की लंका?

चीनी कर्ज के बोझ को कम करने के लिए श्रीलंका ने हंबनटोटा पोर्ट को चीन को पट्टे पर दे दिया। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि श्रीलंका ने करीब-करीब अपने सारे स्ट्रेटजिक संपत्तियों को दांव पर लगा दिया है।

चीन के चक्कर में फंसे गोताबाया राजपक्षे और लगा दी देश की लंका?
Aditya Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीThu, 14 Apr 2022 01:14 PM

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श्रीलंका की इकॉनमी का बुरा हाल है। कोलंबो सहित देश के कई शहरों में लोग विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं और राष्ट्रपति गोताबाया राजपक्षे से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। कोरोना के कारण पर्यटन से कम कमाई, सोशल स्पेंडिंग, खाने की चीजों, फ्यूल और विदेशी मुद्रा आदि को श्रीलंका के ताजा हालात के पीछे का कारण बताया जा रहा है। लेकिन कोलंबो के मौजूदा हाल के पीछे गोताबाया राजपक्षे का क्या रोल रहा है, आइए समझने की कोशिश करते हैं।

राजपक्षे ने अर्थव्यवस्था की बर्बादी की अध्यक्षता की?

2019 में राष्ट्रपति बनने के तुरंत बाद गोताबाया ने महंगी टैक्स कटौती की। इसके बाद जैविक खेती को लेकर कई गलत कदम उठाए जससे चावल और चाय जैसे महत्वपूर्ण निर्यात वाली चीजों पर लगाम लग गई। फिर विकास और प्रोजेक्ट्स के नाम पर श्रीलंका ने चीन से कर्ज लिया। इस सबसे हुआ ये कि एशिया में श्रीलंका की मुद्रास्फीति दर सबसे तेज करीब 19 फीसद पर पहुंच गई। विदेशी मुद्रा 2 बिलियन डॉलर से भी कम बची है। ऐसे में सरकार ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया है और कहा है कि वह विदेशी कर्ज के भुगतान की स्थिति में नहीं है।

चीन के चक्कर में फंस गए गोताबाया?

कोलंबो सिटी पोर्ट प्रोजेक्ट को लेकर ऐसी कल्पना की गई कि इसे ऐसे तैयार करेंगे जिससे खूब पैसा कमाएंगे। पोर्ट सिटी एक महंगी कल्पना है। कितनी महंगी? 1.4 बिलियन डॉलर का प्रोजेक्ट है जो कि श्रीलंका में सबसे बड़ा निवेश है। इसे 2041 तक पूरा करने का प्लान है। लेकिन यह साफ नहीं है कि उस वक्त भी इस प्रोजेक्ट से कितनी कमाई की जा सकती है।

इस प्रोजेक्ट को 2014 में शुरू किया गया था जब गोताबाया के भाई महिंदा राष्ट्रपति थे जो कि अभी देश के पीएम हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि राजपक्षे परिवार ने सोचा कि चीन और भारत दोनों से लाभ कमाते हैं। यही कारण है कि श्रीलंका ने 99 साल की लीज पर चीन को 116 हेक्टेयर की जमीन दे दी।

भारत से बदले चीन को दी तरजीह?

भारत अपने नजदीक चीनी गतिविधियों को लेकर अलर्ट रहा है और श्रीलंका में चीनी एन्क्लेव नहीं देखना चाहता है। भारत को श्रीलंका की गतिवधियों पर तब और शक होना शुरू हुआ जब राजपक्षे ने भारत और जापान को दक्षिणी टर्मिनल के बगल में कोलंबो पोर्ट पर एक टर्मिनल के पुनर्निर्माण के सौदे से बाहर कर दिया। राजपक्षे सरकार ने पूर्वी टर्मिनल का स्वामित्व स्थानीय हाथों में रखने का फैसला किया लेकिन इसके बावजूद चीन को एक बड़ा हिस्सा दे दिया। इसके बाद नाराज भारत को मनाने के लिए श्रीलंका ने बिना किसी टेंडर के नए पश्चिमी टर्मिनल में 51 फीसद की हिस्सेदारी दे दी।

क्षेत्रीय जियोपॉलिटिक्स में फंस गया श्रीलंका?

चीनी कर्ज के बोझ को कम करने के लिए श्रीलंका ने हंबनटोटा पोर्ट और कोलंबो हाईवे प्रोजेक्ट सहित कई प्रोजेक्ट्स को चीन को पट्टे पर दे दिया। एक्सपर्ट्स मानते हैं 2.2 करोड़ आबादी वाले इस देश ने करीब-करीब अपने सारे स्ट्रेटजिक संपत्तियों को दांव पर लगा दिया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर क्षेत्रीय जियोपॉलिटिक्स में फंसकर श्रीलंका का ये हाल है तो अमेरिका-चीन के बीच शीत युद्ध में किसी का भी पक्ष लेना श्रीलंका के लिए और भी घातक हो सकता है।

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