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23 जनवरी, 2020|1:49|IST

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खुलासा: फर्जी उत्पादों के प्रचार से भर रही गूगल की जेब

Google

सर्च इंजन की दुनिया के बेताज बादशाह गूगल के लिए फर्जी उत्पादों का प्रचार कमाई का नया जरिया बनकर उभरा है। ‘डेली मेल’ की हालिया पड़ताल में सामने आया है कि गूगल सर्च परिणामों में वांछित जानकारी से संबंधित उत्पादों के विज्ञापन को प्रमुखता से दिखाने के लिए कंपनियों से मोटी रकम वसूल रहा है। उसने साइट पर विज्ञापनों के लिए उपलब्ध जगह की नीलामी के लिए बकायदा बड़ा नेटवर्क स्थापित कर रखा है।

ऐसे सामने आया सच
‘डेली मेल’ के एक पत्रकार ने विज्ञापनदाता के तौर पर गूगल से संपर्क किया तो पता चला कि कंपनी ऐसे विज्ञापनदाताओं की तलाश में जुटी है, जो ब्रिटिश उपभोक्ताओं की स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को भुनाना चाहती हैं
-विज्ञापनदाता सर्च परिणाम में अपने उत्पाद से जुड़े विज्ञापनों को शीर्ष दस में दिखाने के लिए बोली लगाते हैं, इसके अलावा गूगल विज्ञापनों पर होने वाले प्रत्येक क्लिक के बदले भी कंपनियों से औसतन 110 रुपये वसूलता है

यूं समझें कमाई का खेल
गूगल ने मोटापे, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, कैंसर सहित विभिन्न कैचवर्ड फीड कर रखे हैं। यूजर जब इनसे जुड़ा कोई सवाल टाइप करता है, मसलन  ‘हाउ टू बीट ओबेसिटी (मोटापा कैसे दूर करें)’, ‘हर्बल रेमेडीज फॉर ट्रीटिंग डायबिटीज (डायबिटीज से निजात के हर्बल उपाय)’, ‘हर्बल क्योर फॉर कैंसर (कैंसर का हर्वल इलाज)’, ‘वेज टू इंप्रूव मेमोरी (याददाश्त बढ़ाने के उपाय)’ और ‘हाउ टू क्योर इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (यौन उत्तेजना में कमी से कैसे निपटें)’ जैसे सवाल पूछता है तो उनके इलाज का दावा करने वाले उत्पादों के विज्ञापन खुद बखुद सर्च परिणाम में सबसे ऊपर नजर आने लगते हैं।

मालामाल होने का जरिया

1.मोटापा घटाने वाली गोलियां
-1 लाख से अधिक सर्च औसतन हर महीने
-70 रुपये प्रति क्लिक गूगल के खाते में जाते हैं
-फिगर के प्रति अत्यधिक संवेदनशील और मोटापे की समस्या से जूझ रहीं युवतियां जल्दी झांसे में आती हैं

2.पर्सनल लोन की पेशकश
-1 लाख से अधिक सर्च औसतन हर महीने
-230 रुपये हर क्लिक पर गूगल को मिलते हैं
-पैसे की जरूरत वाले उपभोक्ताओं से कम कागजी कार्यवाही के एवज में मोटा ब्याज वसूलती हैं कंपनियां

3.जड़ी-बूटियों से बनी कैंसर की दवा
-1 हजार सर्च औसतन हर महीने
-110 रुपये प्रति क्लिक गूगल को
-कीमोथेरेपी के साइडइफेक्ट झेलने में असमर्थ कैंसर पीड़ितों की भावनात्मक कमजोरी का फायदा उठा रहीं कंपनियां

4.याददाश्त बढ़ाने वाली दवाएं
-10 हजार से अधिक सर्च प्रति माह
-80 रुपये गूगल पाता है हर क्लिक पर
-याददाश्त में कमी की असल वजह जाने बिना इन दवाओं का सेवन बीमारी को और बढ़ा सकता है, खासकर अल्जाइमर्स में

5.बेचैनी दूर करने वाली गोली
-10 लाख औसतन सर्च हर महीने
-70 रुपये प्रति क्लिक गूगल की कमाई
-बेचैनी से राहत के लिए योग-अध्यात्म ज्यादा बेहतर विकल्प, बिना सलाह दवा लेने से अनिद्रा सहित अन्य साइडइफेक्ट का खतरा

आसान शिकार
-मोटापे, टाइप-2 डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, कैंसर, डिप्रेशन, अल्जाइमर्स, डिप्रेशन और एड्स के मरीजों के अलावा मासिक धर्म संबंधी समस्याओं से जूझ रहीं महिलाएं व यौन ऊर्जा में कमी का सामना कर रहे पुरुष। लोन की त्वरित आवश्यकता वाले लोग।

चिंता का सबब
-जानकारों का कहना है कि गूगल जिन उत्पादों के प्रचार में मदद कर रहा है, उनकी चिकित्सकीय उपयोगिता के कोई प्रमाण नहीं हैं। ऐसे में इन्हें आजमाने से न सिर्फ मरीजों को कई साइडइफेक्ट झेलने पड़ सकते हैं, बल्कि इलाज में देरी के चलते उनकी स्थिति ज्यादा बिगड़ भी सकती है।

गूगल की सफाई
-गूगल के मुताबिक उसने दवाओं, स्वास्थ्य उपकरणों और जांच-इलाज पद्धतियों के प्रचार-प्रसार के लिए दिए जाने वाले विज्ञापनों के संबंध में काफी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जो कंपनियां इनका उल्लंघन करती हैं, उनका विज्ञापन साइट से फौरन हटा दिया जाता है।

जागो ग्राहक जागो
-डॉक्टर गूगल की ओर से सुझाई गई दवाओं या उत्पादों के इस्तेमाल से पहले स्वास्थ्य विशेषज्ञों से राय जरूर लें।
-ध्यान रखें कि सर्च परिणाम में सबसे ऊपर दिखाया जाना उत्पादों और सेवाओं की विश्वसनीयता की गारंटी नहीं।
-दवाएं खरीदते वक्त एक्सपायरी डेट सहित अन्य जानकारियों के अलावा निर्माता कंपनी का प्रोफाइल भी जरूर जांचें।
-एक अनुमान के मुताबिक दुनिया भर में दवाओं और स्वास्थ्य सेवाओं की ऑनलाइन बिक्री करने वाली 97 फीसदी कंपनियां नियमों पर खरे नहीं उतरतीं।

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  • Web Title:Google's pocket full of fake products promotion