रिपोर्ट:: भुखमरी की स्थिति सुधारने में भारत की भूमिका अहम
दुनियाभर में भुखमरी की दर में गिरावट आई है। भारत के कल्याणकारी योजनाओं और कृषि उत्पादकता में तेजी के चलते भुखमरी की दर 10 फीसदी से नीचे आ गई है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार गाजा में खाद्य आपूर्ति बढ़ी है, लेकिन बच्चों में कुपोषण और महिलाओं में एनीमिया की चुनौतियाँ बरकरार हैं।

दुनियाभर में भुखमरी की दर में गिरावट आई है। एशियाई देशों में भुखमरी की दर में सुधार का सबसे बड़ा कारण भारत है। संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट से ये खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में लगातार तीसरे साल भुखमरी की समस्या में कमी दर्ज की गई है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में दुनिया की लगभग 64.5 करोड़ आबादी, यानी 7.8 फीसदी लोग भूख से प्रभावित रहे। यह आंकड़ा 2024 में 8.1 प्रतिशत और 2022 में 8.6 प्रतिशत था। दुनिया की लगभग पांचवें हिस्से की आबादी वाले भारत में भूख की दर 10 फीसदी से नीचे आ गई है। ऐसा कल्याणकारी योजनाओं और कृषि उत्पादकता में तेजी के चलते हुआ है। अफ्रीका के कई देशों में भी सकारात्मक बदलाव दिखे हैं। इथियोपिया, तंजानिया, जिम्बाब्वे, सेनेगल और जाम्बिया में भूख की स्थिति में सुधार के संकेत मिले हैं। वहीं, डोमिनिकन गणराज्य अब वैश्विक भूख मानचित्र में शामिल देशों की श्रेणी से बाहर हो गया है。
गाजा में खाद्य आपूर्ति बढ़ी
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि गाजा में जारी युद्ध का वैश्विक भूख के आंकड़ों पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। गाजा में खाद्य आपूर्ति बढ़ी है। हालांकि युद्ध से कृषि ढांचे को भारी नुकसान हुआ है।
बच्चों में कुपोषण चुनौती
रिपोर्ट के अनुसार भूख की समस्या में कमी आई है, लेकिन रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि बच्चों में कुपोषण अब भी गंभीर चुनौती बना हुआ है। इसके अलावा महिलाओं में एनीमिया के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है और वयस्कों में मोटापे की समस्या भी लगातार बढ़ रही है।
जलवायु संकट बड़ी चुनौती
रिपोर्ट में दुनिया को एक चेतावनी देते हुए कहा है कि जलवायु परिवर्तन से जुड़ी आपदाएं और वैश्विक व्यापार में व्यवधान इस प्रगति को प्रभावित कर सकते हैं।
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