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कोई इंजीनियर तो कोई वकील, पढ़ाई छोड़ थामी गन; मिजोरम सीमा पर PDF क्यों लड़ रही सेना संग खूनी जंग?

Myanmar PDF anti Junta Rebel Forces: इस समूह में 19 से 30 साल तक की कई युवतियां भी हैं, जो म्यांमार से सैन्य शासन की विदाई और लोकतंत्र की स्थापना चाहती हैं। PDF में कई अनुभवी और रिटायर्ड सैनिक भी हैं।

कोई इंजीनियर तो कोई वकील, पढ़ाई छोड़ थामी गन; मिजोरम सीमा पर PDF क्यों लड़ रही सेना संग खूनी जंग?
Pramod Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 15 Nov 2023 01:46 PM
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Myanmar PDF anti Junta Rebel Forces: देश के सुदूर पर्वोत्तर राज्य मिजोरम से सटे पड़ोसी देश म्यांमार के चिन राज्य में वहां की सत्ताधारी जुंटो सैन्य शासन की सेना के खिलाफ मिलिशिया समूह पीपुल्स डिफेंस फोर्स (PDF) ने खूनी जंग का आगाज कर दिया है। PDF के सशस्त्र लड़ाकों ने जुंटो समर्थित सेना के दो ठिकानों पर जोरदार हमला बोला है। रविवार से ही हो रही PDF की गोलीबारी से भयभीत करीब 5000 ग्रामीण सीमा पार कर भारत के मिजोरम में शरण लेने घुस गए हैं। इनमें कई जख्मी हालत में हैं और कई म्यांमार सेना के सैनिक हैं।

क्या है PDF?
जैसे-जैसे म्यांमार के जंगल में लड़ाई बढ़ती जा रही है, विद्रोही समूह PDF सैन्य तानाशाही के खिलाफ घरेलू ड्रोन और विस्फोटकों का उपयोग करने के लिए मजबूर हो रहे हैं। दो साल पहले तक पीपुल्स डिफेंस फोर्स के ये सैनिक इंजीनियरिंग और कानून के छात्र थे, लेकिन 1 फरवरी 2021 को सैन्य तख्तापलट के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़कर गुरिल्लाओं में शामिल होने का फैसला किया। इसमें कई लोकतंत्र समर्थक युवा भी शामिल हैं। 

म्यांमार में हुए सैन्य तख्तापलट ने आंग सांग सूची की लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया था। आंग सांग सूची म्यांमार की प्रमुख राजनीतिक पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी की नेता हैं। उन्होंने म्यांमार में लोकतंत्र की स्थापना के लिए लंबा संघर्ष किया है और इस वजह से उन्हें लंबे समय तक जेल और नजरबंदी में रहना पड़ा है। सैन्य शासन की स्थापना के बाद 5 मई 2021 को PDF का गठन किया गया था।

इसके बाद जब पीपुल्स डिफेंस फोर्सेज के गुरिल्ला पहली बार म्यांमार में एकजुट हुए, तो कई लोगों ने उन्हें सैन्य तानाशाह से आक्रोशित युवाओं के संगठित समूहों के रूप में देखा और दावा किया गया कि जुंटा के सैन्य बल 'सिट-टैट' उन्हें जल्द ही खत्म कर देंगे लेकिन ऐसा हो ना सका।  पिछले दो साल में पीडीएफ ने आकार, संगठन और क्षमता में बड़ा विस्तार किया है और अब उनलोगों ने जुंटा के सैन्य शासन के खिलाफ विद्रोह का बिगुल बजाकर उनके लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर रहे हैं। 

PDF को जनता का समर्थन प्राप्त
हालाँकि, पीडीएफ के पास भारी सैन्य उपकरण, उन्नत कमांड संरचना और अंतर्राष्ट्रीय समर्थन का अभाव है लेकिन बढ़ते पीडीएफ ने अपनी सामरिक दक्षता और लचीलेपन को साबित किया है। विश्लेषकों के मुताबिक, अगर वे अपनी कमांड संरचना और हथियारों में वृद्धि करते हैं, तो वे जुंटा के सैन्य शासन के पतन को तेज कर सकते हैं। कई टुकड़ों में बंटे होने और जनता का समर्थन हासिल होने की वजह से ये विद्रोही समूह भविष्य के लिए निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

PDF में तीन तरह से सशस्त्र समूह
यूनाइटेड स्टेट इन्स्टीट्यूट ऑफ पीस के मुताबिक, म्यांमार में हुए सैन्य तख्ता पलट के बाद पीपुल्स डिफेंस फोर्स तीन प्रकार के सशस्त्र समूहों के लिए एक व्यापक शब्द बनकर उभरा है। इसके तहत PDF, स्थानीय रक्षा बल (LDF) और पीपुल्स डिफेंस टीम (PDT) आती है। पीडीएफ आम तौर पर राष्ट्रीय एकता सरकार (National Unity Government (NUG)) यानी मुख्य रूप से लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सांसदों द्वारा गठित छाया नागरिक सरकार द्वारा गठित या मान्यता प्राप्त बड़ी सशस्त्र इकाइयाँ हैं। पीडीएफ मुख्य रूप से एनयूजी और कई जातीय सशस्त्र संगठनों (ईएओ) द्वारा स्थापित संयुक्त कमांड सिस्टम के तहत काम करते हैं, जिनमें से कई दशकों से सिट-टैट से लड़ रहे हैं।

एलडीएफ स्थानीय स्तर पर स्वायत्त रूप से काम करने वाली स्थानीय मिलिशिया हैं, जो अक्सर एनयूजी से अलग अपने स्वयं के मिशनों को आगे बढ़ाती हैं। इसके अलावा पीडीटी स्थानीय रक्षा और सुरक्षा उद्देश्यों के लिए बनाई गई स्थानीय गुरिल्ला इकाइयाँ हैं। इनमें पीडीएफ सबसे अधिक नियोजित सैन्य इकाइयां हैं जो टाउनशिप और राज्यों/क्षेत्रों में काम कर रही हैं, जबकि एलडीएफ और पीडीटी सामुदायिक स्तर पर काम करने वाली आत्मरक्षा या सामुदायिक सुरक्षा मिलिशिया हैं।

पीडीएफ की सैन्य ताकत
यूनाइटेड स्टेट इन्स्टीट्यूट ऑफ पीस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि PDF में कुल सैनिकों की संख्या करीब 65,000 हैं। इनके 20 प्रतिशत सैनिक सैन्य-ग्रेड हथियारों से लैस हैं जबकि 40 फीसदी के पास घरेलू हथियार हैं। अक्टूबर 2022 तक, 200 से 500 सैनिकों वाली लगभग 300 पीडीएफ बटालियनें थीं। अभी भी 63 अतिरिक्त बटालियनें राष्ट्रीय एकता सरकार से मान्यता की प्रतीक्षा कर रही हैं।

PDF क्यों लड़ रही खूनी जंग?
जुंटा समर्थित सेना के हिंसक दमन ने इस विद्रोही युवा समूह को म्यांमार में लोकतंत्र की वापसी के साझा लक्ष्य की प्राप्ति के लिए एकजुट कर दिया है। हालांकि, उनमें से हरेक के पास गुरिल्ला सेनानी बनने के पीछे एक अलग कहानी है। डायचे वेले की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समूह में 19 साल से 30 साल तक की कई युवतियां भी हैं, जो म्यांमार से सैन्य शासन की विदाई  और लोकतंत्र की स्थापना चाहती हैं। पीडीएफ में कई अनुभवी और रिटायर्ड सैनिक भी हैं जो कमांड देने और रणनीति बनाने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

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