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10 अप्रैल, 2020|3:00|IST

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फ्रांस में इमाम और मुस्लिम शिक्षकों के प्रवेश पर रोक, देश में कट्टरपंथ रोकने के लिए फैसला

france president emmanuel macron

फ्रांस सरकार ने विदेशी इमाम और मुस्लिम शिक्षकों के देश में आने पर रोक लगा दी है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बुधवार (19 फरवरी) को कहा कि यह फैसला कट्टरपंथ और अलगाववाद रोकने के लिए लिया है। साथ ही स्पष्ट किया कि फ्रांस में मौजूद सभी इमामों को फ्रेंच सीखना अनिवार्य होगा। उन्होंने आगाह किया कि फ्रांस में रहने वालों को कानून का सख्ती से पालन करना होगा।

राष्ट्रपति मैक्रों ने पूर्वी फ्रांस के मुस्लिम बाहुल्य मुलहाउस शहर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि हम विदेशी इमामों और मुस्लिम शिक्षकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा रहे हैं। इनकी वजह से देश में कट्टरपंथ और अलगाववाद का खतरा बढ़ा है। इसके अलावा विदेशी दखलंदाजी भी नजर आती है। दिक्कत तब होती है, जब मजहब के नाम पर कुछ लोग खुद को अलग समझने लगते हैं और देश के कानून का सम्मान नहीं करते।

43 साल पुराना समझौता 2020 में खत्म
पिछले साल फ्रांस की कुल जनसंख्या करीब 6.7 करोड़ थी। इसमें करीब 65 लाख मुस्लिम हैं। फ्रांस का वर्ष 1977 में चार देशों से एक समझौता किया था, जिसके तहत अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, मोरक्को और तुर्की फ्रांस में इमाम, मुस्लिम शिक्षक भेज सकते हैं। समझौते में यह भी शर्त थी कि फ्रांस में अधिकारी इन इमामों या शिक्षकों के काम की निगरानी नहीं करेंगे। हर साल 300 इमाम करीब 80 हजार छात्रों को शिक्षा देने फ्रांस आते थे। वर्ष 2020 के बाद समझौता खत्म हो जाएगा। सरकार ने फ्रेंच मुस्लिम काउंसिल को आदेश दिया है कि वह इमामों को स्थानीय भाषा सिखाए और किसी पर इस्लामिक विचार न थोपे जाएं।

मैक्रों बोले, देश के कानून का सम्मान करें
मैक्रों ने एक सवाल के जवाब में कहा कि फ्रांस सरकार के पास अब ज्यादा अधिकार हैं। हम इस्लामिक कट्टरपंथ के खिलाफ हैं। बच्चों की शिक्षा, मस्जिदों को मिलने वाली आर्थिक मदद और इमामों के प्रशिक्षण पर ध्यान देंगे। इससे विदेशी प्रभाव कम होगा। हम सुनिश्चित करना चाहेंगे कि यहां रहने वाला हर व्यक्ति फ्रांस के कानून का पालन और सम्मान करे। फ्रांस में तुर्की का कानून नहीं चल सकता।

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  • Web Title:France Ban Foreign Imam Muslims Teacher To Stop secessionism Says Emmanuel Macron