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15 दिसंबर, 2020|1:53|IST

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इमरान की गलती की सजा भुगतेगी आवाम? सऊदी के बाद अब UAE कर रहा पाकिस्तान पर नकेल कसने की तैयारी, जानें कैसे

imran khan

पाकिस्तान अपनी हरकतों से न सिर्फ दुनियाभर में फजीहत करवाता रहता है, बल्कि इसी वजह से अब उसके रिश्ते भी मुस्लिम देशों से बिगड़ने लगे हैं। कश्मीर मसले पर पहले सऊदी अरब से ठनने के बाद अब पाकिस्तान ने संयुक्त अरब अमीरात से भी दुश्मनी मोल लेने की हिमाकत की है। इजरायल और संयुक्‍त अरब अमीरात में जो शांति समझौता हुआ है, वह पाकिस्तान को खटक रहा है और यही वजह है कि इमरान खान इसकी लगातार आलोचना कर रहे हैं। इस मामले से परिचित लोगों की मानें तो हाल के सप्ताहों में पाकिस्तान और यूएई के बीच संबंध काफी बिगड़े हैं, विशेष रूप से पाकिस्तान के प्रधान मंत्री इमरान खान द्वारा यूएई और इजरायल के बीच शांति समझौता की आलोचना के बाद। 

पाकिस्तान के संयुक्त अरब अमीरात से बिगड़ते रिश्ते की झलक संयुक्त अरब अमीरात में फिलिस्तीन समर्थक पाकिस्तानी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी में भी देखी जा सकती है। इतना ही नहीं, अब छोटे-मोटे अपराधों में भी पाकिस्तानी नागरिकों को गिरफ्तार किया जा रहा है। इस मामले से परिचित लोगों की मानें तो अबू धाबी में सिर्फ अल सवईहान जेल में करीब 5,000 पाकिस्तानी कैदियों को रखा गया है।

इमरान खान की आलोचना करने का असर अब पाकिस्तान के लिए बुरा होता दिख रहा है। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि संयुक्त अरब अमीरात रोजगार की तलाश में अमीरात की यात्रा करने की चाह रखने वाले पाकिस्तानी नागरिकों के लिए सख्त वीजा मानदंड लागू कर सकता है। हमारी सहयोगी वेबसाइट हिन्दुस्तान टाइम्स को पता चलता है कि पाकिस्तानी निवासियों को रेजिडेंट परमिट को नवीनीकृत (रीन्यू) करना मुश्किल हो रहा है और निर्वासन (डिपोर्टेशन) को लेकर भी अब वहां चर्चा तेज हो गई। हालांकि इस संदर्भ में आधिकारिक तौर पर ऐसी कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई है।

हिन्दुस्तान टाइम्स को यह भी पता चला है कि अबू धाबी में पाकिस्तानी राजदूत गुलाम दस्तगीर ने हाल ही में इस संबंध में संयुक्त अरब अमीरात के सत्तारूढ़ सरकार के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की थी। दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान और यूएई के रिश्तों में आई खटास की भले ही एक वजह इमरान खान की टिप्पणी हो सकती है, मगर बीते कुछ समय से यूएई के कुछ कदमों से भी खटास के संकेत मिलते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच कड़वे होते रिश्ते के संकेत कंधार में 2017 के हमले की जांच के निष्कर्षों से मिलता है, जिसमें यूएई के पांच राजनयिकों की मृत्यु हो गई थी। पहले उदाहरण का जिक्र करने वाले लोगों ने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात के जांचकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि हक्कानी नेटवर्क इस हमले के पीछे था और पाकिस्तान की शक्तिशाली जासूस एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस भी सीधे इसमें शामिल थी। हालांकि उस वक्त इस्लामाबाद ने अपनी त्वरित प्रतिक्रिया में हमले के लिए ईरान को दोषी ठहराया था।

इस मामले से परिचित लोगों ने कहा कि यूएई के पाकिस्तान के साथ संबंधों के घटनाक्रम को पाकिस्तान के साथ सऊदी अरब के संबंधों के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए। नई दिल्ली के साथ अपने संबंधों से जुड़े मुद्दों में पश्चिम एशियाई देशों को शामिल करने के इस्लामाबाद के प्रयास दोनों देशों (सउदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात) में अच्छे नहीं रहे हैं। दरअसल, पाकिस्तान हमेशा चाहता रहा है कि ये दोनों देश भारत के खिलाफ उनका खुलकर साथ दे।

यही वजह है कि कश्मीर मुद्दे पर इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी की बैठक बुलाने में सऊदी अरब का समर्थन नहीं मिलने पर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी की बौखलाहट सामने आई थी। पाक विदेश मंत्री कुरैशी ने सऊदी अरब के नेतृत्‍व वाले इस्लामिक सहयोग संगठन यानी ओआईसी बैठक आयोजित नहीं करने को लेकर धमकाया था और इसकी सऊदी की आलोचना की थी। इतना ही नहीं, कुरैशी ने मुस्लिम देशों के इस संगठन को तोड़ने की भी धमकी दी थी।

पाकिस्‍तान के एक लोकल न्‍यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में विदेश मंत्री कुरैशी ने कहा था, 'मैं एक बार फिर से पूरे सम्‍मान के साथ इस्लामिक सहयोग संगठन से कहना चाहता हूं कि विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक हमारी अपेक्षा है। अगर आप इसे बुला नहीं सकते हैं तो मैं प्रधानमंत्री इमरान खान से यह कहने के लिए बाध्‍य हो जाऊंगा कि वह ऐसे इस्‍लामिक देशों की बैठक बुलाएं, जो कश्‍मीर के मुद्दे पर हमारे साथ खड़े होने के लिए तैयार हैं और जो दबाए गए कश्मीरियों का साथ देते हैं।'

पाकिस्तान की इस गलती का खामियाजा उसे न सिर्फ दोस्ती खराब करके चुकानी पड़ी, बल्कि उसे 1 अरब डॉलर का कर्ज वापस करना पड़ा। कुरैशी के बयान से नाराज रियाद ने पाकिस्तान को 1 अरब डॉलर का कर्ज वापस करने को मजबूर कर दिया और 1 अरब डॉलर की और मांग की जा रही है। बताया गया कि पाकिस्तान ने चीन से उधार लेकर एक अरब डॉलर का कर्ज चुकाया। इतना ही नहीं, सऊदी ने कुछ समय पहले तेल और कर्ज पर भी बैन लगाने की बात कही थी। 

और हाल की घटना का जिक्र करें तो सऊदी अरब ने रियाद में पाकिस्तानी दूतावास को 'कश्मीर ब्लैक डे' (27 अक्टूबर) मनाने के लिए किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम को आयोजित नहीं करने के लिए कहा था। बता दें कि संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के साथ बिगड़ते रिश्तों पर  पाकिस्तान को चिंतित होना चाहिए, क्योंकि यह देश वर्षों से पश्चिम एशिया के समर्थन पर जीवित है। इन्हीं देशों के समर्थन की वजह से पाकिस्तान अब तक पूरी तरह से मुस्लिम देशों के बीच अलग-थलग नहीं पड़ा है। इन देशों का अगर पाकिस्तान के ऊपर से हाथ हट गया तो न केवल पाकिस्तान को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचेगा, बल्कि मुस्लिम दुनिया में यह अलग-थलग पड़ जाएगा।

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  • Web Title:First Saudi now UAE is tightening the screws on Imran Khan government