चलते-चलते-- आज ही के दिन...1959
पहली बार चांद पर पहुंचा इंसान का बनाया यान इंसान ने 67 साल

पहली बार चांद पर पहुंचा इंसान का बनाया यान इंसान ने 67 साल पहले आज ही के दिन पहली बार किसी दूसरे खगोलीय पिंड पर अपना बनाया यान पहुंचाया था। यह था तत्कालीन सोवियत संघ का लूना 2। यह चंद्रमा तक पहुंचने वाला दुनिया का पहला मानव निर्मित अंतरिक्ष यान बना। यह मिशन सिर्फ अंतरिक्ष विज्ञान की बड़ी उपलब्धि नहीं था, बल्कि उस दौर में अमेरिका और सोवियत संघ के बीच चल रही अंतरिक्ष होड़ में भी बेहद महत्वपूर्ण घटना थी。
मिशन का आरंभ
- लूना 2 को 12 सितंबर 1959 को सोवियत संघ ने लॉन्च किया था। उस समय अंतरिक्ष की दुनिया में अमेरिका से उसकी कड़ी प्रतिस्पर्धा चल रही थी।
मिशन का विवरण
- इस यान को चंद्रमा पर उतरने के लिए नहीं, बल्कि उससे टकराने के लिए भेजा गया था। इसका लक्ष्य चंद्रमा की सतह तक सफलतापूर्वक पहुंचना था।
- करीब 36 घंटे की यात्रा के बाद लूना 2 चंद्रमा तक पहुंचा। अंतरिक्ष यान लगभग 3 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से चंद्रमा की सतह से टकराया।
वैज्ञानिक अनुसंधान
- यह उस इलाके में पहुंचा जहां बड़े क्रेटर मौजूद हैं। इस सफलता ने साबित किया कि इंसान किसी अंतरिक्ष यान को बेहद सटीक तरीके से चंद्रमा की ओर भेज सकता है।
- लूना 2 के जरिए वैज्ञानिकों ने कॉस्मिक किरणों, चुंबकीय क्षेत्र और अंतरिक्ष में मौजूद बेहद छोटे कणों यानी माइक्रोमीटियोराइट्स का अध्ययन किया।
- इस मिशन के आंकड़ों से पता चला कि चंद्रमा के पास पृथ्वी जैसा कोई चुंबकीय क्षेत्र नहीं है।
अमेरिका की प्रतिक्रिया
- इसके करीब छह महीने बाद अमेरिका ने भी अपना मिशन पायनीर 4 लॉन्च किया, लेकिन यह चांद से करीब 60,000 किमी. दूर से निकल गया और कक्षा में प्रवेश नहीं कर सका।
- हालांकि, अमेरिका ने इस रेस में आगे निकलते हुए चांद पर सबसे पहले इंसान को उतारा।


