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कतर आ सकते हैं LGBTQ समुदाय के लोग, लेकिन हमें बदलने की कोशिश न करें; ऊर्जा मंत्री की चेतावनी

पश्चिमी देशों को जवाब देते हुए ऊर्जा मंत्री ने कहा कि LGBTQ समुदाय के सदस्य देश का दौरा कर सकते हैं, लेकिन 'वे लोग' हमें यह न बताएं कि कतरियों को किस पर यकीन करना चाहिए और किस पर नहीं।

कतर आ सकते हैं LGBTQ समुदाय के लोग, लेकिन हमें बदलने की कोशिश न करें; ऊर्जा मंत्री की चेतावनी
Amit Kumarलाइव हिन्दुस्तान,दोहाWed, 30 Nov 2022 07:48 PM

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फीफा वर्ल्ड कप 2022 की मेजबानी कर रहे कतर ने LGBTQ समुदाय के लोगों को अपने देश आने की इजाजत दे ही है। हालांकि साथ ही एक चेतावनी भी दी है कि LGBTQ समुदाय कतर के लोगों को बदलने का प्रयास न करे। कतर के ऊर्जा मंत्री साद शेरिदा अल-काबी ने यह बयान दिया है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब एलजीबीटीक्यू को लेकर अरब देश के रुख पर पश्चिम देश आलोचना कर रहे हैं। 

पश्चिमी देशों को जवाब देते हुए ऊर्जा मंत्री ने कहा कि LGBTQ समुदाय के सदस्य देश का दौरा कर सकते हैं, लेकिन 'वे लोग' हमें यह न बताएं कि कतरियों को किस पर यकीन करना चाहिए और किस पर नहीं। फीफा विश्व कप 2022 के मेजबान कतर को समलैंगिकता पर अपने कानूनों के लिए काफी विरोध का सामना करना पड़ा है। ऊर्जा मामलों के राज्य मंत्री अल-काबी ने LGBTQ समुदाय के बारे में बुधवार को कहा, "अगर वे कतर जाना चाहते हैं, तो जाएं। हमें इससे कोई समस्या नहीं है।"

उन्होंने आगे कहा, "अगर आप मुझे बदलना चाहते हैं, और चाहते हैं कि मैं कहूं कि मैं एलजीबीटीक्यू में यकीन रखता हूं, मेरा परिवार एलजीबीटीक्यू होना चाहिए, मैं अपने देश में एलजीबीटीक्यू को स्वीकार करता हूं, मैं पश्चिमी देशों को संतुष्ट करने के लिए अपने कानूनों और इस्लामी कानूनों को बदल दूं - तो यह बिल्कुल भी मंजूर नहीं है।"

अरब देश में समलैंगिक संबंध अवैध हैं। अन्य मानवाधिकार मुद्दों और देश में प्रवासी मजदूरों के साथ दुर्व्यवहार को लेकर कतर पहले से ही आलोचनाओं के घेरे में रहा है। लेकिन विश्व कप 2022 के दौरान LGBTQ अधिकारों को लेकर कतर एक बार फिर से सुर्खियों में है। देश विदेश से लोग इस अरब देश में अपनी टीम को सपोर्ट करने के लिए पहुंच रहे हैं। ऐसे में LGBTQ पर प्रतिबंधों को लेकर लोगों के अंदर डर का माहौल है।

फीफा विश्व कप में कम से कम 7 यूरोपीय टीमों ने भेदभाव विरोधी आर्मबैंड पहनने का फैसला किया था। उन्होंने इस आर्मबैंड को 'वन लव आर्मबैंड' का नाम दिया था। लेकिन फुटबॉल की सबसे बड़ी संस्था फीफा ने कतर के विरोध के चलते टीमों को चेताया कि अगर उन्होंने 'वन लव आर्मबैंड' पहना को उन्हें प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। जिसके बाद, टीमों ने अपना प्लान बदल लिया। लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाने के लिए फीफा और कतर की कड़ी आलोचना हुई। यहां तक कि जर्मनी के खिलाड़ियों ने जापान के खिलाफ फीफा विश्व कप के पहले मैच से पहले राष्ट्रगान के दौरान मुंह पर हाथ रखकर 'विरोध' दर्ज कराया था।