ईरान पर फिर बरसे अमेरिकी बम, युद्ध और भड़का
- जॉर्डन पर मिसाइल हमले के बाद जवाबी कार्रवाई - जॉर्डन ने ईरान

वॉशिंगटन/काहिरा, एजेंसी। जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान के मिसाइल हमले के जवाब में अमेरिका ने गुरुवार तड़के ईरान में दर्जनों ठिकानों पर हमले किए। इससे पश्चिम एशिया में जारी जंग और भड़क गई है। साथ ही अब इसकी चपेट में कई नए देश भी आ गए हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड का बयान
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने एक्स पर कहा कि हमले के दौरान ईरान के दर्जनों सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उस सैन्य क्षमता को कमजोर करना है, जिससे वह क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों, अमेरिका के अरब सहयोगियों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए खतरा पैदा कर रहा है। इस बीच ईरान ने उत्तरी कुवैत में एक इमारत को निशाना बनाया, जिसमें एक कर्मचारी की मौत हो गई और इमारत को भारी नुकसान पहुंचा। कुवैत की सेना ने इसकी पुष्टि की। वहीं जॉर्डन ने कहा कि उसने ईरान की ओर से दागी गई पांच मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। बता दें कि पिछले सप्ताह अमेरिका और ईरान ने कूटनीतिक प्रयासों को मौका देने के लिए हमले अस्थायी रूप से रोक दिए थे, लेकिन मंगलवार रात यह विराम समाप्त हो गया।
कुवैत में चीनी कंपनी की इमारत पर हमला, एक की मौत
जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरानी मिसाइल हमले के जवाब में अमेरिका ने गुरुवार तड़के ईरान के दर्जनों सैन्य ठिकानों पर बड़ा हमला किया। इसके कुछ ही घंटों बाद ईरान ने उत्तरी कुवैत में एक चीनी कंपनी की इमारत को निशाना बनाया, जिसमें एक कर्मचारी की मौत हो गई और इमारत को भारी नुकसान पहुंचा।
बुनियादी ढांचे को निशाना नहीं बनाया
ट्रंप ने बुधवार को व्हाइट हाउस में कहा कि अब हमारी बारी है और हम उन पर बहुत कड़ा प्रहार करेंगे। उन्हें पता है कि आगे क्या होने वाला है। हालांकि शुरुआती जानकारी के अनुसार अमेरिका के ताजा हमलों में किसी नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना नहीं बनाया गया है। ट्रंप पहले कई बार ईरान के पुलों और बिजली संयंत्रों पर हमले की चेतावनी दे चुके हैं ताकि तेहरान को नए शांति समझौते के लिए मजबूर किया जा सके।
होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी जारी
सेंटकॉम ने कहा कि उसकी सेनाएं ईरान के खिलाफ होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी को लागू करना जारी रखे हुए है। इस नाकेबंदी का मुख्य उद्देश्य ईरान के तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को रोकना है।
सऊदी और इराक भी टकराव में शामिल
सऊदी अरब और इराक भी अब इस टकराव में सीधे प्रभावित हो गए हैं। सऊदी अरब ने इस सप्ताह अपने तेल प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों के जवाब में अमेरिका के साथ मिलकर इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया ठिकानों पर कार्रवाई की। वहीं, यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा करने के बाद लाल सागर में सऊदी पोतों पर भी हमले किए हैं।
सऊदी तेल प्रतिष्ठानों पर हमले का आरोप
सऊदी अरब ने आरोप लगाया है कि हाल के दिनों में इराक की ईरान समर्थित मिलिशिया ने उसके तेल प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमले किए हैं। हालांकि इराकी मिलिशिया के एक गठबंधन ने इन आरोपों से इनकार किया है। वहीं, यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने अलग, लेकिन संबंधित अभियान के तहत सऊदी ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले किए हैं। सूत्रों के अनुसार सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान ने बुधवार को अलग-अलग बैठकों में राष्ट्रपति ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सऊदी अरब अपने तेल उद्योग और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमले बर्दाश्त नहीं करेगा।
होर्मुज से रवाना हुआ कतर का पोत
कतर ने लगभग तीन सप्ताह बाद पहली बार होर्मुज के रास्ते एलएनजी का एक पोत रवाना किया है। इससे संकेत मिलता है कि कतरएनर्जी ने 7 जुलाई को अल रेकय्यात गैस वाहक पर हमले के बाद रोकी गई एलएनजी आपूर्ति फिर शुरू करनी शुरू कर दी है।
कच्चे तेल की कीमत बढ़ी
युद्ध तेज होने के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ब्रेंट क्रूड का भाव गुरुवार को 1.4 प्रतिशत बढ़कर 92 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में इसमें लगभग 8 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी।


