एशिया-प्रशांत में वृद्धि दर धीमी पड़ने की आशंकाः मूडीज
एक रिपोर्ट के अनुसार, उच्च जिंस कीमतें, सख्त मौद्रिक नीतियां, और गर्म व शुष्क मौसम के कारण एशिया-प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि दर 2026 और 2027 में धीमी हो सकती है। हालांकि, एआई से जुड़े निवेश ने कुछ स्तर पर वृद्धि को सहारा दिया है। 2025 में यह दर 4.3% से घटकर 2027 में 3.6% हो सकती है।

नई दिल्ली, एजेंसी। ऊंची जिंस कीमतें, सख्त मौद्रिक एवं राजकोषीय नीतियां और असामान्य रूप से गर्म एवं शुष्क मौसम की वजह से वर्ष 2026 और 2027 में एशिया-प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि दर धीमी पड़ सकती है। मूडीज़ एनालिटिक्स ने बृहस्पतिवार को यह अनुमान जताया। मूडीज ने एक रिपोर्ट में कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष के बावजूद एशिया-प्रशांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्था अपेक्षित सुस्ती से बची रही है। कृत्रिम मेधा (एआई) से जुड़े निवेश और निर्यात में मजबूती ने हाल के समय में वृद्धि को सहारा दिया है। हालांकि, मूडीज़ ने जिंसों की वैश्विक कीमतों के ऊंचे स्तर पर बने रहने, अमेरिकी शुल्कों से व्यापार को लेकर पैदा हो रही अनिश्चितता और सख्त नीतिगत रुख के असर को देखते हुए चेतावनी भी दी है।रिपोर्ट
कहती है कि इस परिदृश्य में एपीएसी क्षेत्र की वृद्धि दर 2025 के 4.3 प्रतिशत से घटकर 2026 में 4.1 प्रतिशत और 2027 में 3.6 प्रतिशत रह सकती है। एआई से मिलने वाला प्रोत्साहन धीरे-धीरे कम होने के कारण ऐसा होने की आशंका है।


