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हिंदी न्यूज़ विदेशपाकिस्तान में बन ही गए श्रीलंका जैसे हालात, पेट्रोल पंप पर लगीं लंबी कतारें; राहत के कोई आसार नहीं

पाकिस्तान में बन ही गए श्रीलंका जैसे हालात, पेट्रोल पंप पर लगीं लंबी कतारें; राहत के कोई आसार नहीं

मोटरसाइकिल सवार ने कहा कि फकीराबाद इलाके में एक फिलिंग स्टेशन पर करीब 50 मिनट तक इंतजार करना पड़ रहा है। पेट्रोल की कमी के कारण मनसेहरा जिले में बड़े पैमाने पर पेट्रोल पंप बंद होने की खबर है।

पाकिस्तान में बन ही गए श्रीलंका जैसे हालात, पेट्रोल पंप पर लगीं लंबी कतारें; राहत के कोई आसार नहीं
Amit Kumarलाइव हिन्दुस्तान,इस्लामाबादWed, 25 Jan 2023 06:49 PM
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आर्थिक बदहाली से जूझ रहे पाकिस्तान के हालात अब श्रीलंका जैसे नजर आ रहे हैं। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद सहित खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में कई फिलिंग स्टेशनों पर कारों और मोटरसाइकिलों की लंबी कतारें देखी गईं। पाकिस्तान स्थित डॉन अखबार की खबर के मुताबिक, यह संकट तेल कंपनियों द्वारा कम आपूर्ति के कारण और गहराया है। पेट्रोल डीलरों का कहना है कि प्राइवेट बैंकों द्वारा पेट्रोल आयात करने के वास्ते ऋण पत्र (एलसी) जारी करने में काफी देरी हुई है। इसके चलते कंपनियां पेट्रोल आयात नहीं कर पाई हैं। यही वजह है कि इन कंपनियों ने पाकिस्तान के कई प्रांतों में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति में कटौती की है।

पाकिस्तान में अधिकांश फिलिंग स्टेशन बंद 

पेशावर में ड्राइवरों ने कहा कि शहर के अधिकांश पेट्रोल पंप बंद हैं। इस बीच पाकिस्तान स्टेट ऑयल के स्वामित्व वाले फिलिंग स्टेशनों पर पेट्रोल की बिक्री जारी है। इसके चलते इन्हीं पेट्रोल पंपों पर सबसे ज्यादा भीड़ देखी जा रही है। एक मोटरसाइकिल सवार शरीफ खान ने बताया कि इस्लामाबाद के जीटी रोड, दलजक रोड और चारसद्दा रोड पर अधिकांश फिलिंग स्टेशन बंद हैं। डॉन अखबार के हवाले से उन्होंने कहा, "जीटी रोड पेट्रोल पंप पर तेल भराने के लिए मुझे लगभग आधे घंटे तक इंतजार करना पड़ा।" उन्होंने कहा कि कम से कम 20 लोग और वहां खड़े हैं।

मोटरसाइकिल सवार ने कहा कि फकीराबाद इलाके में एक फिलिंग स्टेशन पर करीब 50 मिनट तक इंतजार करना पड़ रहा है। पेट्रोल की कमी के कारण मनसेहरा जिले में बड़े पैमाने पर पेट्रोल पंप बंद होने की खबर है। खैबर पख्तूनख्वा सीएनजी प्रशासन ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 31 दिसंबर को प्रांतीय राजधानी में सभी सीएनजी स्टेशनों को एक महीने के लिए बंद कर दिया था।

सभी सीएनजी स्टेशन एक महीने के लिए बंद!

रिपोर्ट के मुताबिक, कमिश्नर ने बताया कि गृह एवं आदिवासी मामलों के विभाग और सुई नॉर्दर्न गैस पाइपलाइन लिमिटेड की सिफारिश पर यह फैसला किया गया है। सरहद पेट्रोलियम और कार्टेज डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अब्दुल मजीद, ने दावा किया कि सीएनजी स्टेशन एक महीने से बंद हैं इसलिए पेट्रोल की मांग में वृद्धि हुई है क्योंकि पहले वे सभी CNG का इस्तेमाल करते थे।

उन्होंने यह भी कहा कि तेल कंपनियों ने प्रांत को आपूर्ति कम कर दी है, जिससे कई फिलिंग स्टेशन बंद हो गए हैं और पेट्रोलियम उत्पादों की कमी हो गई है। उन्होंने कहा, 'कई कंपनियां बैंकों द्वारा एलसी में देरी के कारण पेट्रोलियम उत्पादों के आयात के लिए संघर्ष कर रही हैं।' द न्यूज इंटरनेशनल ने इस सप्ताह रिपोर्ट दी कि पाकिस्तान में गैस संकट फरवरी में और बिगड़ने वाला है। इसकी वजह यह है कि पाकिस्तान में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) ट्रेडिंग कंपनी ईएनआई एलएनजी कार्गो से पीछे हट गई है जो 6-7 फरवरी को पाक में आने वाला था।

खाना बनाने के लिए भी गैस में कटौती

पेट्रोलियम डिवीजन के शीर्ष अधिकारी घटनाक्रम को लेकर चिंतित हैं क्योंकि पाकिस्तान पहले से ही गैस संकट का सामना कर रहा है। शहर के कुछ प्रमुख इलाकों में खाना बनाने के लिए भी गैस के लाले पड़े हैं। सरकार ने अपनी गैस लोड प्रबंधन योजना के तहत घरेलू उपभोक्ताओं को सर्दियों में खाना पकाने के समय, सुबह 6 बजे से 9 बजे तक तीन घंटे, दोपहर 12 बजे से दोपहर 2 बजे तक दो घंटे और शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक तीन घंटे गैस आपूर्ति का वादा किया था। हालांकि, जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।

सरकारी कर्मचारियों के वेतन में 10 प्रतिशत कटौती पर विचार

पाकिस्तान में भारी आर्थिक संकट के बीच सरकार के सभी विभागों के कर्मचारियों के वेतन में 10 प्रतिशत कटौती करने समेत कई प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है। बुधवार को जारी एक मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। पाकिस्तान विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आने के बाद हाल के वर्षों में सबसे बड़े आर्थिक संकट से जूझ रहा है।

‘जियो न्यूज’ ने बताया कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा गठित राष्ट्रीय मितव्ययिता समिति (एनएसी) सभी विभागों के सरकारी कर्मचारियों के वेतन में 10 प्रतिशत की कमी करने समेत विभिन्न प्रस्तावों पर विचार कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, एनएसी मंत्रालयों/विभागों के व्यय में 15 प्रतिशत की कमी करने, संघीय, राज्य मंत्रियों और सलाहकारों की संख्या 78 से घटाकर 30 करने पर विचार कर रही है।