ऑक्सफोर्ड स्कूल की अकादमिक निदेशक ने ब्रिक्स के मंच पर रखे गंभीर विचार
18वें ब्रिक्स अकादमिक मंच में डॉ. सिमी मेहता ने वैश्विक दक्षिण की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने वैश्विक संस्थागत व्यवस्था और संयुक्त राष्ट्र में सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में विभिन्न देशों के विद्वान और नीति विशेषज्ञों की सहभागिता रही। मुख्य विषय लचीलेपन, नवाचार और सततता था।

मेदिनीनगर, संवाददाता। भारत की वर्ष 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत लखनऊ में आयोजित 18वें ब्रिक्स अकादमिक मंच में इम्पैक्ट एंड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईएमपीआरआई) की ओर से ऑक्सफोर्ड स्कूल की अकादमिक निदेशक डॉ. सिमी मेहता ने सहभागिता की। 23 से 25 अगस्त 2026 तक आयोजित इस मंच का केंद्रीय विषय लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और सततता के लिए निर्माण रहा। कार्यक्रम का आयोजन ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) ने रिसर्च एंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज (आरआईएस) तथा लखनऊ विश्वविद्यालय के सहयोग से किया। इसमें ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों सहित विभिन्न देशों के शिक्षाविद, शोधकर्ता, नीति विशेषज्ञ और थिंक टैंक प्रतिनिधि शामिल हुए।
विभिन्न अकादमिक एवं नीतिगत सत्रों में डॉ. सिमी मेहता ने वैश्विक दक्षिण की भूमिका, बहुपक्षीय व्यवस्था के पुनर्गठन और संयुक्त राष्ट्र में सुधार से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी वैश्विक संस्थागत व्यवस्था आज की राजनीतिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय वास्तविकताओं से पूरी तरह मेल खाती है या नहीं, इस पर गंभीर विचार जरूरी है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में केवल वीटो अधिकार के सवाल तक चर्चा सीमित रखने के बजाय वैश्विक दक्षिण के देशों को उनकी जनसंख्या, अर्थव्यवस्था और वैश्विक योगदान के अनुरूप निर्णय-निर्माण में प्रभावी प्रतिनिधित्व देने की जरूरत पर बल दिया। साथ ही ब्रिक्स से वैश्विक दक्षिण की साझा प्राथमिकताओं को नीतिगत प्रभाव में बदलने की दिशा में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का सवाल उठाया। मंच के दौरान ब्रिक्स थिंक टैंक परिषद की सिफारिशें भारत के विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि को प्रस्तुत की गईं। इनमें आर्थिक एवं जलवायु लचीलापन, नवाचार, तकनीकी सहयोग, सतत विकास और समावेशी बहुपक्षीय व्यवस्था पर जोर दिया गया।


