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सत्ता में आया तो अमेरिका से खदेड़ दूंगा, ट्रंप ने फिलिस्तीन समर्थकों पर कार्रवाई की खाई कसम

इस महीने की शुरुआत में, संभावित रिपब्लिकन उम्मीदवार ने मुख्य रूप से यहूदी डोनर्स के एक छोटे समूह से कहा था कि अगर वह चुने जाते हैं तो वह छात्र प्रदर्शनकारियों को अमेरिका से बाहर निकाल देंगे।

सत्ता में आया तो अमेरिका से खदेड़ दूंगा, ट्रंप ने फिलिस्तीन समर्थकों पर कार्रवाई की खाई कसम
donald trump promises crackdown on pro-palestinian protests if elected
Amit Kumarलाइव हिन्दुस्तान,वाशिंगटनTue, 28 May 2024 05:51 PM
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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वादा किया है कि अगर वह 2024 का अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव जीतते हैं तो कॉलेज परिसरों में फिलिस्तीन समर्थक विरोध प्रदर्शनों पर कड़ी कार्रवाई करेंगे। बता दें कि अमेरिका में पांच नवंबर को चुनाव होने हैं। देश में 1912 के बाद पहली बार मौजूदा राष्ट्रपति और पूर्व राष्ट्रपति के बीच मुकाबला होगा। दक्षिणपंथी नेता डोनाल्ड ट्रंप इजरायल-हमास युद्ध के बीच खुलकर इजरायल को समर्थन देने की बात कह चुके हैं। अब उन्होंने अपने देश में हो रहे फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनों पर नकेल कसने का वादा किया है।

द वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस महीने की शुरुआत में, संभावित रिपब्लिकन उम्मीदवार ने मुख्य रूप से यहूदी डोनर्स के एक छोटे समूह से कहा था कि अगर वह चुने जाते हैं तो वह छात्र प्रदर्शनकारियों को अमेरिका से बाहर खदेड़ देंगे। इन छात्र प्रदर्शनकारियों के बारे में ट्रंप का कहना है कि वे "कट्टरपंथी क्रांति" का हिस्सा हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने बैठक में कहा, "अगर आप मुझे चुनाव जिताते हैं... तो हम उस आंदोलन को 25 या 30 साल पीछे धकेल देंगे। आपको मुझे जिताना चाहिए।" पूर्व राष्ट्रपति ने अप्रैल के अंत में कोलंबिया विश्वविद्यालय के परिसर को खाली कराने के लिए न्यूयॉर्क पुलिस की भी तारीफ की और कहा कि अन्य शहरों को भी इसकी राह पर चलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि "इसे अब रोकना होगा"।

गाजा पर इजरायली युद्ध के खिलाफ छात्रों के विरोध प्रदर्शन ने पिछले कुछ हफ्तों में अमेरिका को हिलाकर रख दिया है। इसके चलते अमेरिकी कॉलेजों के कई परिसरों में पुलिस कार्रवाई हुई और 2,000 से अधिक गिरफ्तारियां हुईं हैं। अप्रैल के मध्य में, कोलंबिया विश्वविद्यालय में गाजा एकजुटता शिविर लगाया गया था, जिसमें छात्रों ने संस्थान से इजरायल से जुड़ी कंपनियों से अलग होने का आग्रह किया। यह आंदोलन कैलिफोर्निया, टेक्सास और कई अन्य राज्यों के परिसरों में फैल गया। विश्वविद्यालय प्रशासकों ने फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनकारियों पर यहूदी विरोधी भाषा का इस्तेमाल करने और परिसर में असुरक्षित माहौल बनाने का आरोप लगाया। लेकिन छात्रों ने उन दावों को खारिज कर दिया।