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रेनसमवेयर हमलाः भारत समेत 100 देशों में बड़ा साइबर हमला

भारत समेत दुनिया के करीब 100 देशों में शुक्रवार रात बड़ा साइबर हमला हुआ। इसकी शुरुआत ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस से हुई। इसके बाद कई देशों में अस्पतालों, बड़ी कंपनियों और सरकारी कार्यालयों की...

100 देशों पर रेनसमवेयर अटैक
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99 देशों के कंप्यूटर हैक
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दुनिया के लगभग 100 देशों में रैनसमवेयर का साइबर हमला
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लाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीSat, 13 May 2017 09:26 PM
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भारत समेत दुनिया के करीब 100 देशों में शुक्रवार रात बड़ा साइबर हमला हुआ। इसकी शुरुआत ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस से हुई। इसके बाद कई देशों में अस्पतालों, बड़ी कंपनियों और सरकारी कार्यालयों की वेबसाइट्स को शिकार बनाया गया। यह हमला अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी से चोरी किए गए साइबर हथियारों की मदद से किए गए। 

सबसे पहले यहां हमला
अमेरिकी मीडिया के अनुसार, सबसे पहले स्वीडन, ब्रिटने और फ्रांस से साइबर हमले की खबर मिली। सुरक्षा सॉफ्टवेयर कंपनी अवैस्ट ने बताया कि मालवेयर की गतिविधि बढ़ने की बात शुक्रवार को पता चली। कंपनी ने कहा कि यह जल्द ही व्यापक स्तर पर फैल गया। 

ब्रिटेन सबसे ज्यादा प्रभावित
साइबर हमले से सबसे ज्यादा प्रभावित ब्रिटेन हुआ है। इस हमले से नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) से जुड़े कंप्यूटर्स को निशाना बनाया गया है। इसके तहत हैकर्स ने लंदन, ब्लैकबर्न और नॉटिंघम जैसे शहरों के अस्पतालों और ट्रस्ट के कंप्यूटर्स को निशाना बनाया। कंप्यूटर के डाटा नहीं खुलने के चलते अस्पतालों और क्लीनिकों को मरीजों को वापस भेजना पड़ा। गृह सुरक्षा विभाग के तहत अमेरिका कंप्यूटर इमरजेंसी रेडीनेस टीम (यूएससीईआरटी) ने कहा कि उसे विश्व भर के कई देशों में वॉनाक्राई रैनसमवेयर वायरस हमले की कई खबरें मिली हैं। स्पेन में दूरसंचार कंपनी टेलीफोनिया समेत बड़ी कंपनियां इस हमले का शिकार हुई। अमेरिका की कोरियर कंपनी फेडएक्स ने एक बयान में कहा कि वह साइबर हमले का बुरी तरह शिकार हुई है। 

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बिटकॉइन में मांगी फिरौती

बताया जा रहा है जो भी कंप्यूटर कथित तौर पर साइबर अटैक शिकार हुए हैं उसे खोलने पर फाइल रिकवर करने के बदले 300-600 डॉलर के बिटक्वाइन की मांग की गई है। मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार ब्रिटेन के कई अस्पतालों का कहना है कि इस साइबर अटैक की वजह से उन्हें कंप्यूटर ऑन करने में परेशानी हो रही है। सुरक्षा शोधकर्ताओं के मुताबिक कुछ पीडि़तों ने डिजिटल करेंसी बिटकॉइन के जरिये भुगतान भी किया है लेकिन उनको यह नहीं पता कि अब तक कितना भुगतान साइबर हमलावरों को दिया गया है.

फिरौती में देरी पर फाइल डिलीट करने की धमकी

हैकर्स का कहना है कि पैसे देने में जितना समय लगेगा फिरौती की रकम उतनी बढ़ेगी और ज्यादा टाइम होने पर सभी फाइल्स को डिलीट कर दिया जाएगा। हैकरों ने रकम की मांग बिटक्वाइन के रूप में की है। बिटक्वाइन को हैकर्स अपने रैंजम के तौर पर यूज करते हैं ताकि उन्हें आसानी से ट्रेस न किया जा सकेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि अगर कोई इमरजेंसी नहीं है तो फिलहाल मरीज अस्पताल न आएं। हैकिंग के तरीके से साफ है कि यह रैंजम के लिए की गई हैकिंग है। यानी हैकर्स फाइल रिकवर करने और कंप्यूटर को अनलॉक करने के लिए अब पैसे मांग रहे हैं। 

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हैकरों ने चोरी किया प्रोग्राम

साइबर विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इस प्रोग्राम को अमेरिकी राष्‍ट्रीय सुरक्षा एजेंसी ने विकसित किया था। इसको चुराकर हैकरों ने इस तरह का बड़ा साइबर हमला किया है।  साइबर विशेषज्ञ रिच बार्जर के मुताबिक यह अब तक का सबसे बड़ा रैंसमवेयर हमला है जिसको साइबर समुदाय हालिया दौर में देखा है। एक बार यदि यह मालवेयर कंप्‍यूटर वायरस कंप्‍यूटर सिस्‍टम में प्रवेश कर जाता है तो इस फिर इसको रोकना बहुत मुश्किल होता है। 

विंडोज एक्सपी को बनाया जा रहा है निशाना
आपको बता दें कि यह साइबर अटैक विंडोज (Windows) कंप्यूटर्स में हो रहा है और खास कर उनमें जिनमें एक्सपी (XP) है। खबरों के मुताबिक, ब्रिटेन के जिन अस्पतालों के कंप्यूटर्स हैक हो रहे हैं, उनमें ज्यादातर विंडोज एक्सपी पर चलते हैं। माइक्रोसॉफ्ट ने इस ऑपरेटिंग सिस्टम का सपोर्ट पहले ही बंद कर दिया है, इसलिए इसे यूज करना किसी चुनौती से कम नहीं है। 

विकिलीक्स ने किया था लिक

साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स और एथिकल हैकर्स का मानना है कि यह एक शुरुआत है, क्योंकि इस बार हैकर्स ने NSA के लीक्ड टूल को हथियार बनाया है, जिसे एनएसए ने अपने हैकिंग के लिए बनाया था। हाल ही में विकिलीक्स ने इस हैकिंग टूल को लीक कर दिया था और इसी का फायदा उठाते हुए हैकर्स ऐसा कर रहे हैं। 

गौरतलब है कि एनएसए का यह हैकिंग टूल शैडो ब्रोकर्स नाम के एक ग्रुप ने लीक करने का दावा किया था। उन्होंने एनएसए के इस हैकिंग टूल को लीक किया और खुद लोगों को बताया। हालांकि माइक्रोसॉफ्ट ने मार्च में ही इस खामी को ठीक करने के लिए एक पैच अपडेट दिया, लेकिन हैकर्स फिर भी इसमें सेंध लगाने में कामयाब होते दिख रहे हैं। 

क्या है रेनसमवेयर कंप्यूटर वायरस

कई देशों में रेनसमवेयर नाम के कंप्यूटर वायरस को साइबर हमले के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। रेनसमवेयर एक ऐसा वायरस है जो कंप्यूटर्स फाइल को बर्बाद करने की धमकी देता है। धमकी दी जाती है कि यदि अपनी फाइलों को बचाना है तो फीस चुकानी होगी। ये वायरस कंप्यूटर में मौजूद फाइलों और वीडियो को इनक्रिप्ट कर देता है और उन्हें फिरौती देने के बाद ही खोला जा सकता है। 

साइबर अटैक से बचाएं अपना कंप्यूटर 
मार्च में माइक्रोसॉफ्ट ने विंडोज यूजर्स के लिए एक सिक्योरिटी पैच अपडेट किया था। आपने अगर इसे इंस्टॉल नहीं किया है तो अब इसे इंस्टॉल कर लें। इसके अलावा आप अपने सिस्टम में किसी अच्छी कंपनी का एंटी वायरस डालें। एंटी वायरस की आखिरी तारीख याद रखें और उसे अपडेट कराते रहें। जब भी अपने कंप्यूटर को मोबाइल, पैन ड्राइव या किसी दूसरे डिवाइस से जोड़ें तो उसे स्कैन करें। किसी ऑनलाइन साइट से कुछ डाउनलोड करें या कुछ देखें तो पहले देख लें कि वो साइट रजिस्टर्ड हो। अपने सिस्टम को समय समय पर फॉर्मेट कराते रहें। 

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