राहत:युद्ध से पहले वाली स्थिति की तरफ बढ़ रहा है कच्चा तेल
पश्चिम एशिया में तनाव घटने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 77.76 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। भारत जैसे आयातक देशों के लिए यह राहत की खबर है क्योंकि इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में गिरावट हो सकती है। ईरान-भारत के बीच व्यापारिक संबंध फिर से प्रबल हो सकते हैं।

नई दिल्ली, हिन्दुस्तान ब्यूरो। पश्चिम एशिया में तनाव घटने के बाद कच्चे तेल में नरमी के संकेत दिखने लगे हैं। युद्ध के चरम के दौरान ब्रेंट क्रूड की कीमत 138 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल 74.60 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट 77.76 डॉलर प्रति बैरल का भाव छू चुका है। पिछले चार दिन में करीब 18 फीसदी दाम टूट चुके हैं। कीमतें धीरे-धीरे उस स्तर की ओर लौट रही हैं, जहां वे युद्ध से पहले थीं। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने से पहले ब्रेंट 64 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 67 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। तेल कीमतों में यह गिरावट भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए राहत की खबर मानी जा रही है, क्योंकि इससे पेट्रोल और डीजल के दाम घटने की संभावना बढ़ सकती है。
फिर जिंदा होगा ईरान-भारत का पुराना नाता
अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में शुक्रवार को होने वाले ऐतिहासिक शांति समझौते से भारत और ईरान का पुराना व्यापारिक नाता फिर से जिंदा होने की पूरी संभावना है। करीब सात साल के लंबे अंतराल के बाद ईरानी कच्चे तेल की भारत में बड़े पैमाने पर आमद का रास्ता साफ हो जाएगा। प्रतिबंधों में अस्थायी ढील के दौरान इसी साल अप्रैल में भारतीय रिफाइनर्स ने 44,000 मीट्रिक टन ईरानी तेल खरीदकर यह साबित कर दिया था कि वे पाबंदियां हटते ही दोबारा पूरी रफ्तार से खरीदारी के लिए तैयार हैं।
भारतीय रिफाइनर्स के लिए ‘बंपर लॉटरी’
साल 2019 में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत को ईरान से तेल खरीदना बंद करना पड़ा था। उससे पहले भारत हर दिन करीब तीन लाख बैरल ईरानी कच्चे तेल का आयात करता था और ईरान हमारे शीर्ष तीन तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल था। वित्त वर्ष 2017 से 2019 के बीच भारत के कुल तेल आयात में ईरान की हिस्सेदारी 10-13% थी। ईरान का रास्ता खुलने से भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों को न सिर्फ सस्ता तेल मिलेगा, बल्कि माल ढुलाई का खर्च भी आधा हो जाएगा।
ईरान से सस्ती ढुलाई और खुली उधारी
ईरान से तेल खरीदने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि वहां से भारत तक तेल लाने का भाड़ा बेहद कम है। ईरान से माल ढुलाई का खर्च महज 30 से 55 सेंट प्रति बैरल आता है, जबकि अफ्रीकी देशों से यह 1-2 डॉलर और अमेरिका या वेनेजुएला से 2-4 डॉलर प्रति बैरल बैठता है। इसके अलावा, ईरान भारतीय कंपनियों को 60 से 90 दिनों की लंबी उधारी भी देता है, जिससे कंपनियों के पास नकदी का संकट नहीं होता।
रुपये में कारोबार और व्यापार को बढ़ावा
प्रतिबंधों के दौर में भारत ‘रुपया निपटान प्रणाली’ के तहत भुगतान करता था। इस पैसे से ईरान भारत से चावल और दवाएं जैसी जरूरी चीजें खरीदता था। अमेरिकी पाबंदियों के अलावा नीतिगत स्तर पर भारत के सामने कोई अन्य रुकावट नहीं है। साफ है कि ईरान की वापसी से भारत को वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव से निपटने में बड़ी मदद मिलेगी।
पेट्रोल-डीजल के दाम घटाने का बन सकता है दबाव
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों से प्रभावित होती हैं। यदि कच्चा तेल नरम पड़ता है तो तेल कंपनियों पर ईंधन कीमतों में कटौती का दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल के मोर्चे पर राहत मिलने की उम्मीद की जा सकती है।
इन सेक्टरों को हो सकता है सबसे अधिक फायदा
-एविएशन सेक्टर बन सकता है सबसे बड़ा लाभार्थी-तेल विपणन कंपनियों के लिए बेहतर माहौल-ऑटो सेक्टर को मिल सकती है रफ्तार-एफएमसीजी कंपनियों के मार्जिन सुधरने की उम्मीद-पेंट, केमिकल और एडहेसिव कंपनियों को राहत-लॉजिस्टिक्स और शिपिंग सेक्टर को भी फायदा
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