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14 जुलाई, 2020|2:48|IST

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'कोरोना महामारी 2020 के अंत तक 8.6 करोड़ बच्चों को गरीबी में धकेल सकती है'

poverty in bangladesh   afp file photo

कोरोना वायरस महामारी से पैदा हुए आर्थिक संकट के कारण 2020 के अंत तक कम और मध्यम आय वाले देशों में गरीब घरों में रहने वाले बच्चों की संख्या 8.6 करोड़ तक बढ़ सकती है। जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के अनुसार इस वायरस से पूरी दुनिया में 56,95,290 लोग संक्रमित हुए हैं, जबकि 3,55,692 लोगों की मौत हो चुकी है।

यूनिसेफ और मानवतावादी संगठन 'सेव द चिल्ड्रेन' के संयुक्त अध्ययन में कहा गया है कि कोरोना वायरस महामारी 2020 के अंत तक 8.6 करोड़ और बच्चों को पारिवारिक गरीबी में धकेल सकती है। विश्लेषण में कहा गया है कि यदि महामारी के कारण होने वाली वित्तीय कठिनाइयों से परिवारों को बचाने के लिए तत्काल कार्रवाई नहीं की गई, तो कम और मध्यम आय वाले देशों में राष्ट्रीय गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले बच्चों की कुल संख्या वर्ष के अंत तक 67.2 करोड़ तक पहुंच सकती है।

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विश्लेषण में कहा गया है कि इनमें से लगभग दो-तिहाई बच्चे उप-सहारा अफ्रीका और दक्षिण एशिया में रहते हैं। सबसे अधिक 44 प्रतिशत वृद्धि यूरोप और मध्य एशिया के देशों में देखी जा सकती है। लैटिन अमेरिका और कैरिबियाई देशों में 22 प्रतिशत की वृद्धि देखी जा सकती है।

रूस में कोरोनो वायरस संक्रमण के मामलों में वृद्धि
वहीं, रूस में कोरोना वायरस संक्रमण के बृहस्पतिवार (28 मई) को आठ हजार 371 नए मामले सामने आए, जिससे देश में वायरस से संक्रमितों की संख्या बढ़ कर तीन लाख 79 हजार पर पहुंच गई। कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में रूस अमेरिकी और ब्राजील के बाद दुनिया में तीसरे स्थान पर है।

रूस सरकार के कोरोना वायरस निरोधक कार्यबल ने बताया कि बृहस्पतिवार को कोरोना संक्रमण के देश भर में आठ हजार 371 नए मामले सामने आए हैं । यह आंकड़ा कल के बराबर है और इस महीने की शुरुआत में एक दिन में आए सर्वाधिक ग्यारह हजार मामलों से कम है। 

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  • Web Title:Coronavirus pandemic may push 86 million more children into household poverty by 2020 end