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20 जनवरी, 2020|3:08|IST

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कॉप-25: कार्बन बाजार और जलवायु क्षतिपूर्ति पर प्रगति, बाकी पर गतिरोध

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दो सप्ताह चली जलवायु वार्ता के बाद शुक्रवार को कॉप-25 की ओर से एक मसौदा जारी किया गया है। मसौदे में कार्बन बाजार, जलवायु क्षतिपूर्ति की भरपाई, हरित कोष आदि मुद्दों को शामिल किया गया है। खास बात यह है कि दो मुद्दों कार्बन बाजार और जलवायु क्षतिपूर्ति को लेकर भारत की चिंताओं को मसौदे में जगह मिली है। इन दो मुद्दों पर ही प्रगति दिख रही है। अब कॉप-25 में इस मसौदे पर सभी देशों के वार्ताकारों के बीच चर्चा होनी है। उसके बाद जिन मुद्दों पर सहमति बनेगी, उन पर कॉप-25 अध्यक्ष की ओर से शनिवार तक बयान जारी किए जाने की संभावना है।
मसौदे में कई विकल्प सुझाए 
भारत की ओर से मुख्य वार्ताकार वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कार्बन बाजार या क्लीन डवलपमेंट मैनेजमेंट को लेकर मसौदे में कई विकल्प सुझाए गए हैं। हमारे रुख, क्योटो प्रोटोकॉल के तहत जारी कार्बन बाजार के क्रेडिट को आगे जारी रखा जाए, को भी इसमें शामिल किया गया है। विकसित देश जो इसके खिलाफ तर्क दे रहे हैं, उसे भी शामिल किया गया है। मसौदे पर सभी देशों को चर्चा करनी है। उन्होंने कहा कि हमने जिस मुद्दे को रखा है उसकी मंजूरी के लिए प्रयासरत हैं। भारत को विकासशील देशों का साथ मिल रहा है।
विशेषज्ञ समूह का गठन किया जाएगा 
इसी प्रकार जलवायु खतरों से हो रही क्षति की भरपाई को भी मसौदे में शामिल किया गया है। भारत समेत कई देश इस मुद्दे को उठा रहे थे। जलवायु क्षतिपूर्ति के मुद्दे पर दो-तीन बातें मसौदे में कही गईं हैं। एक दूरगामी जलवायु खतरों की भरपाई के उपाय सुझाने के लिए एक विशेषज्ञ समूह का गठन किया जाएगा जो तीन साल में अपनी रिपोर्ट देगा। यह समूह ग्लेशियरों के पिघलने, समुद्र के जलस्तर में बढ़ोतरी जैसे दूरगामी खतरों का आंकलन करेगा।

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वित्त प्रबंधन के मामले में यह कहा गया है कि विकसित देश जलवायु संवेदनशील देशों पर ध्यान दें। स्पष्ट आर्थिक मदद की बात नहीं कही गई है। इसमें एक विकल्प यह दिया गया है कि जो मौजूदा जलवायु फंड है उसी से इन खतरों से प्रभावितों को मुआवजा दिया जाए। हालांकि, भारत इससे सहमत नहीं है क्योंकि इस कोष में विकसित देश धन नहीं दे रहे हैं।
अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे 
प्रसाद ने कहा कि मसौदे पर हम अपना पक्ष मजबूती से आगे भी रखेंगे। मसौदे में 100 अरब डॉलर के हरित कोष, एडॉप्टेशन फंड के के क्रियान्वयन, तकनीकों के हस्तांतरण समेत कई मुद्दों पर नई पहल होती नहीं दिख रही है, जिससे इन मुद्दों पर गतिरोध कायम है। 

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  • Web Title:COP 25 Progress on carbon market and climate compensation stalemate at rest