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19 अक्तूबर, 2020|11:37|IST

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चीन में कोरोना वायरस की ट्रायल वैक्सीन लगवाने की होड़, दूसरे देशों में विश्वास घटा

coronavirus vaccine

दुनिया के अधिकांश देशों में कोरोना वायरस के संभावित टीके (वैक्सीन) को लेकर विश्वास घटा है, लेकिन चीन में लोग प्रयोगात्मक (ट्रायल) टीका लगवाने के लिए ही अस्पतालों की ओर दौड़ पड़े। बीते शनिवार को यहां ट्रायल टीके की डोज लगवाने की ऐसी होड़ देखने को मिली कि ढाई घंटे के अंदर ही सैंकड़ों खुराक बिक गईं।चीन में अभी कोविड-19 का टीका तैयार नहीं हुआ है पर यहां की एक राज्य सरकार ने प्रयोग के तौर पर इसकी खुराक का वितरण जनता के लिए खोल दिया। दरअसल चीन के झेजियांग राज्य के स्वामित्व वाली वैक्सीन निर्माता कंपनी सिनोवैक बायोटेक कोविड-19 का एक टीका बनाने के लिए प्रयोग कर रही है। कंपनी ने प्रयोगात्मक टीके के शुरुआती परीक्षण में इसे सुरक्षित पाया, जिसके बाद अब इस डोज का बड़ी संख्या में इंसानों पर परीक्षण किया जा रहा है।

लाइन लगाकर खरीदी महंगी डोज  
सिनोवैक बायोटेक ने झेजियांग राज्य के ईयू शहर में प्रयोगात्मक टीके की खुराकों की बिक्री कराई। एक खुराक की कीमत लगभग 3,800 रुपये रखी गई, जिसे खरीदने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सैंकड़ों लोगों की लाइनें लगीं और ये डोज ढाई घंटे में ही बिक गईं।  

शरीर पर प्रतिकूल असर की चेतावनी से भी नहीं डरे
टीका खरीदने वाले हर व्यक्ति को एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने को कहा गया, जिसमें लिखा था कि इस प्रयोगात्मक टीके की खुराक का शरीर पर नकारात्मक असर भी हो सकता है। फिर भी लोगों ने बिना डरे इंजेक्शन के जरिए ये खुराक लगवाई। खुराक लेने वाले सभी लोगों को 28 दिन बाद दोबारा बुलाया गया है, उनके शरीर में इस डोज के असर को देखा जाएगा।

सुरक्षा की गारंटी के बिना ही उपयोग शुरू
अभी यह टीका बनकर तैयार नहीं हुआ है और न ही इसके पूरी तरह सुरक्षित होने के प्रमाण ही सामने आए हैं लेकिन चीनी सरकार ने इसे संक्रमित मरीज के आपातकालीन इलाज में इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी है।

चार देशों में परीक्षण
सिनोवैक बायोटेक द्वारा बनाई जा रही वैक्सीन को कोरोनावैक नाम दिया गया है। अभी इसका ट्रायल ब्राजील, इंडोनेशिया व दो अन्य देशों में चल रहा है, जिसके नाम गोपनीय रखे गए हैं।

51% अमेरिकियों को टीके पर भरोसा नहीं
विश्वविद्यालय ने अध्ययन में पाया कि 51% लोगों को इस बात पर भरोसा नहीं है कि जब कोविड-19 का टीका बाजार में उपलब्ध हो जाएगा तो वह उनकी सेहत के लिए सुरक्षित होगा। सर्वे के मुताबिक, 31% लोग अभी इस बारे में आश्वस्त नहीं हैं जबकि 20% का जवाब न है। केवल 49% अमेरिकियों ने ही कहा कि टीका उपलब्ध होने पर वे इसे लगवाएंगे।

यूरोप में मास्क विरोधी टीके के भी खिलाफ  
यूरोपीय देशों में मास्क पहनने को लेकर बहुत ज्यादा विरोध देखा गया। फ्रांसीसी थिंक टैंक जीन जौरेस फाउंडेशन ने फेसबुक पर सक्रिय मास्कविरोधी समूहों के अध्ययन में पाया कि ऐसे 94% लोग टीके के भी विरोधी हैं।  

टीका बनाने की जल्दबाजी ने डराया
आमतौर पर टीका बनने में 10 से 12 साल लगते हैं पर यही वैज्ञानिक प्रक्रिया लगभग डेढ़ साल के भीतर पूरी की जा रही है। ऐसे में लोगों को डर लग रहा है कि जल्दबाजी में तैयार किया जा रहा कोविड-19 का टीका कहीं उनके लिए खतरनाक साबित न हो जाए।

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  • Web Title:Competition to get Corona virus trial vaccine in China confidence in other countries decreased