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दावा: कैलकुलेटर बताएगा, टीकाकरण के बावजूद कोरोना से मरने का कितना खतरा

एजेंसी,नई दिल्लीPublished By: Mrinal Sinha
Sun, 19 Sep 2021 06:46 AM
दावा: कैलकुलेटर बताएगा, टीकाकरण के बावजूद कोरोना से मरने का कितना खतरा

ब्रिटेन में वैज्ञानिकों ने एक ऐसा कैलकुलेटर बनाने का दावा किया है, जो यह बताएगा कि टीकाकरण के बावजूद कोरोना से मरने का कितना खतरा है। पुरुषों और बुजुर्गों में टीका लगाने के बाद भी अस्पताल में भर्ती होने या मरने खतरा सबसे ज्यादा है, लेकिन इस कैलकुलेटर की मदद से खतरे की जानकारी पहले मिल जाएगी।

पिछले साल ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने एक प्रोग्राम को अपडेट करने के लिए टीकाकरण के डाटा का इस्तेमाल किया था। इसका मकसद यह पता लगाना था कि वायरस से सबसे ज्यादा खतरा किसे है। डाटा से पता चला कि टीके की दोनों खुराक लेने के बाद भी किडनी ट्रांसप्लांट, डाउन सिंड्रोम और सिकल सेल के मरीजों को कोरोना से सबसे अधिक खतरा था। हालांकि टीकों ने तो मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने या फिर उनके मरने की संभावना को काफी हद तक कम कर दिया, लेकिन उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता स्वस्थ लोगों की तरह मजबूत नहीं थी। विशेषज्ञों ने बताया कि कुछ इसी तरह का खतरा बुजुर्गों और टीका नहीं लेने वाले लोगों भी देखा गया था।

उधर, नॉटिंघम विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर कैरल कपलैंड ने कहा कि कुल मिलाकर टीकाकरण से पहले खतरा बहुत कम है, लेकिन इसने लोगों के बीच मतभेदों को पूरी तरह से दूर नहीं किया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि टीके की दोनों डोज लेने के बाद कीमोथेरेपी, एचआईवी, डेमेंशिया या पार्किंसंस के मरीजों को कोरोना का खतरा औसत से अधिक रहता है।

तीन करोड़ वयस्कों बूस्टर डोज दी जाएगी

भारतीय या पाकिस्तानी मूल के लोगों में टीकाकरण के बाद भी गंभीर बीमारी की उच्च दर दिखाई दी है। एनएचएस (नेशनल हेल्थ सर्विस) ने टीके लगाने वाले करीब 52 लाख ब्रितानियों के आंकड़े को कैलकुलेटर की मदद से अपडेट किया था। इसका उद्देश्य यह था कि डॉक्टर यह पता लगा सके कि किन रोगियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। कैलकुलेटर द्वारा उच्च जोखिम के रूप में पहचाने जाने वाले सभी लोगों को सर्दियों में बूस्टर डोज दी जाएगी। इसमें तीन करोड़ से ज्यादा वयस्कों को तीसरी खुराक मिलेगी। किंग्स कॉलेज लंदन के प्रोफेसर पेनी वार्ड अध्ययन में शामिल नहीं थे, लेकिन उन्होंने कहा कि हम पहले से ही जानते हैं कि संक्रमण रोकने में टीका अत्यधिक प्रभावी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि टीकाकरण बीमारी को रोकने में 100 प्रतिशत तक प्रभावी नहीं है।

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