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भारत में अशांति फैलाने को अब चीन ले रहा है आतंकवादी समूहों का सहारा, म्यांमार के 'अराकान सेना' को पैसे और हथियार से मदद

एजेंसी,म्यांमारPublished By: Himanshu Jha
Thu, 02 Jul 2020 12:43 PM
भारत में अशांति फैलाने को अब चीन ले रहा है आतंकवादी समूहों का सहारा, म्यांमार के 'अराकान सेना' को पैसे और हथियार से मदद

चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। भारत में शांति व्यवस्था भंग करने की मंशा से चीन अब आतंकवादियों की मदद लेने से भी गुरेज नहीं कर रहा है। स्थानीय लाइसस समाचार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन म्यांमार के आतंकी संगठनों को पैसे और आत्याधुनिक हथियार की आपूर्ति कर रहा है। चीन के द्वारा नयपिटाव आतंकवादी समूह अराकान सेना को मदद की जा रही है।

दक्षिण-पूर्व एशिया की जानकारी रखने वाले एक सैन्य सूत्र ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि चीन अराकन सेना के खर्चे का लगभग 95 प्रतिशत तक दे रहा है। उन्होंने बताया कि अराकान सेना के पास लगभग 50 MANPADS (मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम) सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें हैं।

सूत्र से मिली जानकारी के मुताबिक, चीन की रणनीति अपने प्रभाव को अपनी सीमा के दक्षिण में अच्छी तरह से धकेलने के लिए है। अरकान सेना को समर्थन देने की इस रणनीति ने चीन को पश्चिमी म्यांमार यानी भारत-म्यांमार सीमा की ओर अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार करने में सक्षम बनाया है।

एक ऑस्ट्रेलियाई विद्वान ने कहा, "चीन दक्षिण एशिया में एक बहुआयामी खेल-खेल रहा है। चीन भारत को कमजोर करना चाहता है। भारत पाकिस्तान संबंध अच्छे नहीं हैं और म्यांमार को नया दुश्मन बनाना चाहता है। एक भारतीय सूत्र के अनुसार, चीन नहीं चाहता है कि म्यांमार में भारतीय प्रभाव बढ़े। वह एकाधिकार चाहता है। म्यांमार में भारत के निर्माण के खिलाफ अराकान सेना का चीन का समर्थन स्पष्ट रूप से काफी प्रभावी रहा है।

जून 2017 में भारत के सी एंड सी कंस्ट्रक्शन को 220 मीलियन डॉलर के सड़क निर्माण का ठेका मिला था। म्यांमार सरकार ने जनवरी 2018 तक मंजूरी में देरी कर दी। एक बार जब निर्माण कार्य चल रहा था, तो अराकन सेना ने भारतीय नागरिकों, अग्निशामकों सहित चालक दल, म्यांमार के संसद सदस्य का अपहरण कर लिया।

सुबीर भौमिक के एकमलेख के अनुसार, चीन से हाल ही में हथियारों की डिलीवरी की है। इस खेप में 500 असॉल्ट राइफल, 30 यूनिवर्सल मशीन गन, 70,000 गोला-बारूद थे, जो समुद्र के रास्ते पहुंचाया गया। फरवरी के तीसरे सप्ताह में म्यांमार और बांग्लादेश के तटीय जंक्शन से ज्यादा दूर मोनाखली समुद्र तट पर हथियारों को उतार दिया गया था।

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