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विदेशमोदी-बाइडन समेत चार नेताओं के साथ आने से घबराया चीन, बोला- छोड़ दें कोल्ड वॉर की मानसिकता

सुतीर्थो पैट्रानोबिस, हिन्दुस्तान टाइम्स,बीजिंगPublished By: Madan Tiwari
Mon, 15 Mar 2021 06:10 PM
मोदी-बाइडन समेत चार नेताओं के साथ आने से घबराया चीन, बोला- छोड़ दें कोल्ड वॉर की मानसिकता

भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया को मिलाकर बने क्वाड ग्रुप ने चीन की नींदें उड़ा दी हैं। ड्रैगन इस कदर डर गया है कि इस ग्रुप को लेकर लगातार अनाप-शनाप बोल रहा है। चीन ने सोमवार को कहा है कि अगर क्वाड ग्रुप अपने वैचारिक पूर्वाग्रह और शीत युद्ध की मानसिकता को नहीं छोड़ते हैं तो फिर यह बिना किसी परिणाम को हासिल किए ही खत्म हो जाएगा। 

क्वाड जिसमें-भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान शामिल हैं- उनके प्रमुखों की बैठक पिछले शुक्रवार को वर्चुअल तरीके से आयोजित की गई थी। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और जापान के पीएम येशिहिदे सुगा शामिल हुए थे। इस बैठक की चीन द्वारा उस दिन भी आलोचना की गई थी। माना जाता है कि इंडो-पैसिफिक रीजन और साउथ चाइना सी में चीन की बढ़ती ताकत को काउंटर करने के लिए ये देश एक साथ आए हैं और आने वाले समय में ड्रैगन को और दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने बीते दिनों कहा था कि चारों नेताओं ने चीन द्वारा खड़ी की गई चुनौतियों पर चर्चा की और माना कि डेमोक्रेसी ही ऑटोक्रेसी से सामना कर सकती है। इससे चीन को और मिर्ची लगी थी। जब इस बैठक को लेकर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने पूछा गया तो उन्होंने कहा कि चीन की धमकी अतिरंजित है। झाओ ने सोमवार को मंत्रालय की नियमित ब्रीफिंग में कहा, "पिछले कुछ समय से कुछ देश तथाकथित चीन के खतरे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं। चीन ने संबंधों के बीच कलह को रोकने के लिए क्षेत्रीय देशों के बीच एक अभियान चलाने की चुनौती दी है।"

प्रवक्ता ने आगे कहा कि उन्होंने जो किया है वह उस समय के ट्रेंड के खिलाफ है जो शांति के विकास और विन-विन कॉरपोरेशन का है जोकि इस क्षेत्र के लोगों की आम आकांक्षाओं के लिए काउंटर है।" झाओ ने कहा कि वह कोई भी समर्थन हासिल नहीं कर पाएगा और बिना कुछ हासिल किए खत्म हो जाएगा। झाओ ने यह भी कहा कि देशों के बीच आपसी समझ और विश्वास में सुधार के लिए राज्य-से-राज्य का आदान-प्रदान और सहयोग अनुकूल होना चाहिए और तीसरे पक्ष के हितों के खिलाफ और लक्षित नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा, "प्रासंगिक देशों को शीत युद्ध की मानसिकता और वैचारिक पूर्वाग्रह को छोड़ देना चाहिए। विशेष प्रकार के समूह नहीं बनाने चाहिए और एकजुटता, एकता, क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए अनुकूल तरीके से कार्य करना चाहिए।'' वहीं, बैठक से पहले झाओ ने कहा था कि देशों के बीच आदान-प्रदान एवं सहयोग देशों के बीच की आपसी समझ एवं भरोसे को बढ़ाने में योगदान के लिए होना चाहिए बजाय तीसरे पक्ष को निशाना बनाने या तीसरे पक्ष के हितों को नुकसान पहुंचाने के लिए।

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