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विदेशचीन ने टेरर फंडिंग से लड़ने के लिए पाकिस्तान की कोशिशों को सराहा

भाषा,बीजिंगPublished By: Rakesh
Fri, 21 Feb 2020 07:54 PM
चीन ने टेरर फंडिंग से लड़ने के लिए पाकिस्तान की कोशिशों को सराहा

चीन ने आतंकवाद के मकसद से दिए जाने वाले वित्तपोषण से लड़ने में अपने करीबी सहयोगी पाकिस्तान के ''बड़े प्रयासों'' की शुक्रवार (21 फरवरी) को प्रशंसा की और उन खबरों को खारिज कर दिया कि उसने हाल ही में पेरिस में संपन्न हुई एफएटीएफ की बैठक में इस्लामाबाद के खिलाफ भारत और अन्य देशों का साथ दिया।

एफएटीएफ आतंकवाद के वित्तपोषण पर नजर रखने वाली संस्था है, जिसने पाकिस्तान को 'ग्रे' सूची में बरकरार रखा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग से यहां ऑनलाइन मीडिया ब्रीफिंग में यह पूछा गया कि क्या चीन ने पाकिस्तान को एक मजबूत संदेश देने और उससे आतंकवाद के वित्त पोषण तथा धन शोधन से लड़ने का आग्रह करते हुए भारत और अन्य देशों का साथ दिया? इस पर शुआंग ने कहा वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) ने पाकिस्तान को धनशोधन और आतंकवाद के वित्तपोषण पर अपनी कार्य योजना को लागू करने के लिए और समय देने का फैसला किया है।

उन्होंने कहा, ''संबंधित मुद्दे पर चीन के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। पाकिस्तान ने अपनी आतंकवाद वित्तपोषण रोधी प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए बड़े प्रयास किए हैं, जिसे एफएटीएफ के अधिकतर सदस्यों ने पेरिस में 20 फरवरी को संपन्न अपनी बैठक में स्वीकार किया है।'' गेंग ने कहा, ''बैठक में यह निर्णय लिया गया कि पाकिस्तान को अपनी कार्य योजना को लागू करने के लिए और समय दिया जाए।''

एफएटीएफ ने पाक को 'ग्रे' सूची में ही रखा, आतंकवाद को वित्तीय मदद नहीं रोकने पर कार्रवाई की चेतावनी
वहीं दूसरी ओर, वैश्विक आतंकवाद वित्तपोषण निगरानी संस्था एफएटीएफ ने शुक्रवार (21 फरवरी) को पाकिस्तान को 'ग्रे' सूची में ही रखे रहने का फैसला किया और उसे चेतावनी दी कि अगर वह लश्कर ए तैयबा और जैश ए मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों को धन देना बंद नहीं करता है तो उसे कड़ी कार्रवाई का सामना करना होगा। सूत्रों ने यह जानकारी दी। पेरिस में 'वित्तीय कार्रवाई कार्यबल' (एफएटीएफ) के चल रहे पूर्ण सत्र में यह फैसला किया गया।

एक सूत्र ने बताया कि एफएटीएफ ने पाकिस्तान को 'ग्रे' सूची में ही रखने का फैसला किया। उसने कहा कि एफएटीएफ ने पाकिस्तान को यह चेतावनी भी दी कि अगर वह जून महीने तक पूरी कार्य योजना नहीं बनाता है तो उसके कामकाज पर असर पड़ सकता है। पूर्ण सत्र में कहा गया कि पाकिस्तान ने लश्कर, जैश और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी समूहों को वित्तीय सहायता पर लगाम कसने के लिए दिए गए 27 कार्यों में से कुछ ही किए हैं।  सूत्रों के अनुसार एफएटीएफ ने कहा कि पाकिस्तान को अपनी कार्ययोजना त्वरित तरीके से जून तक पूरी करनी होगी।

पाकिस्तान के 'ग्रे' सूची में ही बने रहने से उसके लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), विश्व बैंक, एडीबी और यूरोपीय संघ से वित्तीय सहायता प्राप्त करने में कठिनाई आएगी और इस तरह आर्थिक संकट का सामना कर रहे देश के लिए समस्याएं और बढ़ जाएंगी। अगर पाकिस्तान एफएटीएफ के निर्देशों का पालन नहीं करता है तो पूरी संभावना है कि उसे उत्तर कोरिया और ईरान के साथ 'काली सूची' में डाल दिया जाए।

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