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नौकर से ज्यादा तो कुत्तों पर ही खर्च किया, कारोबारी हिंदुजा परिवार को सजा देने की मांग

ब्रिटेन के सबसे अमीर हिंदुजा परिवार पर अपने नौकरों के साथ शोषण का आरोप लगा है। सरकारी वकील ने परिवार को सजा देने और मुआवजे की मांग की है। वहीं हिंदुजा ग्रुप ने आरोपों को खारिज किया है।

नौकर से ज्यादा तो कुत्तों पर ही खर्च किया, कारोबारी हिंदुजा परिवार को सजा देने की मांग
Jagritiहिंदुस्तान टाइम्स,नई दिल्लीTue, 18 Jun 2024 01:02 PM
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ब्रिटेन के सबसे अमीर परिवार हिंदुजा फैमिली ने अपने पालतू कुत्ते पर नौकर से भी ज़्यादा पैसे खर्च किए। सरकारी वकील ने स्विस कोर्ट से परिवार पर कर्मचारियों की तस्करी और शोषण के आरोप लगाया है। साथ ही उन्हें जेल की सज़ा देने की मांग की है। कोर्ट में सरकारी वकील यवेस बर्टोसा ने कहा, "उन्होंने अपने एक नौकर से भी ज़्यादा पैसे एक कुत्ते पर खर्च किए।" उसने दावा किया कि परिवार ने एक महिला से हफ़्ते में सात दिन तक 18 घंटे तक काम कराया और बदले में सिर्फ़ सात स्विस फ़्रैंक (£6.19) दिए। 

वकील ने यह भी कहा कि कर्मचारियों के कॉन्ट्रैक्ट में काम के घंटे या छुट्टी के दिन नहीं बताए गए थे। नौकरी कर रहे लोगों को ज़रूरत के हिसाब से उपलब्ध रहना था। उसने कोर्ट से कहा कि नौकरों के पासपोर्ट भी जब्त कर लिए गए थे और उनके पास खर्च करने के लिए स्विस फ़्रैंक नहीं थे क्योंकि उन्हें वेतन भारत में दिया जाता था। उन्होंने कहा कि नौकर अपने मालिक की अनुमति के बिना घर से बाहर नहीं जा सकते थे और उन्हें बिल्कुल भी आजादी नहीं थी। वकील ने अजय हिंदुजा और उनकी पत्नी नम्रता के लिए जेल की सजा की मांग की और परिवार से अदालती खर्च के लिए 1 मिलियन स्विस फ़्रैंक और कर्मचारियों के लिए 3.5 मिलियन फ़्रैंक का मुआवजा देने की मांग की।

आरोपों पर हिंदुजा समूह ने क्या कहा

हिंदुजा परिवार के वकीलों ने दावों को खारिज कर दिया है। उन्होंने इसके लिए उन नौकरों की गवाही का हवाला दिया जिन्होंने कहा कि उनके साथ अच्छा व्यवहार किया गया था। हिंदुजा परिवार ने प्रॉसिक्यूटर पर यह आरोप भी लगाया कि उन्होंने कर्मचारियों को दिए जाने वाले भुगतान के बारे में झूठी जानकारियां पेश की है। उनके वकील ने कहा कि वेतन कर्मचारियों के सही भुगतान को पूरी तरह नहीं दर्शाते क्योंकि उन्हें खाना और रहने के लिए घर भी प्रदान दिए गए थे। हिंदुजा परिवार के वकीलों ने कहा कि अठारह घंटे काम करने की बात भी अतिशयोक्ति है। उन्होंने आगे कहा, "जब वे बच्चों के साथ फिल्म देखने बैठते हैं, तो क्या इसे काम माना जा सकता है? मुझे नहीं लगता।" वकीलों ने आगे कहा कि इस मामले में सही निर्णय किया जाना चाहिए।