सधी भाषा में भारत ने किया पश्चिम एशिया संघर्ष का जिक्र

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
Follow us on Google News
share

ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत ने पश्चिम एशिया संघर्ष पर चिंता जताई और सभी देशों से संयम बरतने की अपील की। सदस्यों ने महिला नेतृत्व, स्वास्थ्य, कृषि एवं जलवायु परिवर्तन पर भी चर्चा की। स्थानीय करंसी में व्यापार को बढ़ावा देने, भ्रष्टाचार से निपटने और एआई के जोखिमों को कम करने के उपायों पर भी जोर दिया गया।

सधी भाषा में भारत ने किया पश्चिम एशिया संघर्ष का जिक्र

ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान संयुक्त बयान में भारत ने पश्चिम एशिया संघर्ष का जिक्र सधी हुई कूटनीतिक भाषा के साथ किया। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई। सभी देशों से संयम बरतने की अपील की गई। साथ ही ऐसे कदमों से बचने की अपील की गई है जिससे हालात और बिगड़ सकते हैं। यूएई, ईरान या किसी तीसरे देश का जिक्र नहीं है। पश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते संयुक्त बयान जारी होने पर संदेह उत्पन्न हो रहा था लेकिन भारत ने कूटनीतिक सूझबूझ से आखिरी वक्त तक आम राय बनाने के प्रयास जारी रखे। अंतत इस पर सहमति बनी। दिल्ली घोषणा में पश्चिम एशिया संघर्ष का जिक्र सधी हुई कूटनीतिक भाषा के साथ किया गया है। घोषणा पत्र में कहा गया कि ब्रिक्स देश संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धान्तों के मुताबिक आम लोगों से जुड़े बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए। दूसरे, देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान की अपील की गई है। साथ ही बातचीत और कूटनीति पर जोर दिया गया है। सदस्य देशों ने व्यापार, आपूर्ति और ऊर्जा प्रवाह समेत अन्य मुद्दों पर एकसाथ मिलकर काम करने पर जोर दिया।

मध्य पूर्व में शांति पहली प्राथमिकता

चीन, रूस, ईरान और भारत समेत 11 सदस्यीय ब्रिक्स देशों ने मध्य पूर्व में शांति और तनाव कम करने की अपील की। संयुक्त बयान में नागरिक बुनियादी ढांचे और परमाणु प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों की भी निंदा की गई। बयान में गया कि हम नागरिक बुनियादी ढांचे और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की पूर्ण निगरानी में संचालित शांतिपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों पर जानबूझकर किए गए हमलों को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं। ऐसे हमले अंतरराष्ट्रीय कानून और आईएईए के संबंधित प्रस्तावों का उल्लंघन हैं।

स्थानीय मुद्रा में कारोबार

ब्रिक्स घोषणा पत्र में द्विपक्षीय व्यापार को स्थानीय करंसी में करने पर जोर दिया गया है। साथ ही सीमा पार भुगतानों को अधिक तेज, सस्ता, पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए व्यावहारिक उपायों का आह्वान किया। सदस्यों के बीच व्यापार को समर्थन देने के लिए अधिक आत्मनिर्भर ब्रिक्स बीमा परिवेश तैयार करने, ब्रिक्स की सामूहिक क्षमता का उपयोग करने और पुनर्बीमा क्षमताओं को बढ़ाने पर आगे चर्चा की आवश्यकता को स्वीकार किया। सदस्य देशों ने गुजरात के गिफ्ट सिटी इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (आईएफएससी) में 'ब्रिक्स रिस्क लैब' की स्थापना के भारत के प्रस्ताव पर चर्चा को आगे बढ़ाने में रुचि व्यक्त की है। नेताओं ने प्रभावी सीमा पार भुगतान तंत्र के लिए व्यावहारिक समाधान तलाशने की दिशा में ब्रिक्स पेमेंट टास्क फोर्स (बीपीटीएफ) के प्रयासों की सराहना की।

महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने पर जोर

घोषणा पत्र में ब्रिक्स नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव के रूप में महिला नेतृत्व की आवश्यकता जताई है। कहा गया है कि अभी तक कोई महिला इस पद पर नियुक्त नहीं हुई। घोषणापत्र में नेताओं ने यह भी कहा कि वे 'महिला, शांति और सुरक्षा' के वैश्विक एजेंडे के अनुरूप शांति स्थापित करने की प्रक्रिया में महिलाओं की अहम भूमिका को मानते हैं। घोषणापत्र में कहा गया कि हम इस बात की पुष्टि करते हैं कि शासन व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी, उनका वित्तीय और डिजिटल समावेशन, दक्षता विकास एवं उद्यमिता के अवसरों तक पहुंच, उद्यमिता को प्रोत्साहन, उत्पादक और सामाजिक सेवाओं की उपलब्धता तथा जलवायु कार्रवाई, खाद्य सुरक्षा और पोषण में उनकी अहम भूमिका सतत विकास के लिए जरूरी है।

निर्बाध ऊर्जा प्रवाह पर मंथन

घोषणा पत्र में विविध आपूर्ति स्रोतों, मजबूत बुनियादी ढांचे और स्थिर ऊर्जा बाजारों के माध्यम से मजबूत ऊर्जा सुरक्षा का आह्वान किया। जीवाश्म ईंधन विशेष रूप से उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए वैश्विक ऊर्जा मिश्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे। समूह ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा के लिए ऊर्जा बाजार में स्थिरता और विविध स्रोतों से ऊर्जा का निर्बाध प्रवाह बनाए रखना आवश्यक है, साथ ही मजबूत मूल्य शृंखलाएं और सीमा पार सुविधाओं सहित महत्वपूर्ण ऊर्जा बुनियादी ढांचे का संरक्षण भी जरूरी है।

वित्तीय व्यवस्था में सुधार की मांग

नेताओं ने वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में व्यापक सुधारों की मांग की। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोश और विश्व बैंक में उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को अधिक प्रतिनिधित्व और अपनी बात रखने का अधिकार मिलना चाहिए। साथ ही ब्रिक्स ने एकतरफा शुल्क (टैरिफ), व्यापार प्रतिबंधों और आर्थिक प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना की। ब्रिक्स ने कहा कि हम एकतरफा शुल्क और गैर-शुल्क उपायों में वृद्धि को लेकर चिंतित हैं। इससे व्यापार प्रभावित होता है और ये विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुसार नहीं हैं।

ठगी नेटवर्क को खत्म करने का संकल्प

ब्रिक्स देशों ने संगठित ठगी करने वाले नेटवर्कों को खत्म करने और अवैध धन का पता लगाने के लिए समन्वित अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई का संकल्प लिया। घोषणा-पत्र में सदस्य देशों ने कहा कि डिजिटल तकनीक, भुगतान प्रणालियों और वित्तीय लेनदेन के नए माध्यमों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने और कमजोर परिस्थितियों वाले लोगों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। इससे निपटने के लिए ने सीमा शुल्क अधिकारियों, वित्तीय खुफिया इकाइयों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, कर अधिकारियों और नियामक संस्थाओं के बीच सीमा पार खुफिया जानकारी साझा करने की अपील की।

स्वास्थ्य क्षेत्र में सदस्य देश बढ़ाएंगे तालमेल

सदस्य देशों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग मजबूत करने की बात कही है। नेताओं ने तपेदिक (टीबी), डिजिटल स्वास्थ्य सेवा, स्वस्थ जीवनशैली, मानसिक स्वास्थ्य और पारंपरिक चिकित्सा से जुड़ी कई पहलों का समर्थन किया। घोषणा में नेताओं ने सभी लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं। नेताओं ने टीबी को वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती बताते हुए कहा कि संक्रामक रोगों का प्रकोप, पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाली बीमारियों का खतरा गंभीर है। इसलिए मजबूत निगरानी प्रणालियों, शुरुआती चेतावनी तंत्र और आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों को बढ़ाने पर जोर देना होगा।

किसानों से जुड़ी चार पहलों को मंजूरी

ब्रिक्स नेताओं ने पूरे समूह के लिए अनाज व्यापार मंच स्थापित करने और किसानों पर केंद्रित चार नई पहलों को मंजूरी दी। इन पहलों में बीज, कृषि इनपुट, कृषि-पारिस्थितिकी और डिजिटल कृषि शामिल हैं। भारत ने 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान खाद्य सुरक्षा को लेकर केवल चर्चा करने के बजाय ठोस कदम उठाने पर जोर दिया। घोषणा-पत्र में कहा गया कि हम मानते हैं कि ब्रिक्स देश वैश्विक खाद्य उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए कृषि उत्पादकता और स्थिरता बढ़ाने तथा वैश्विक खाद्य सुरक्षा और पोषण सुनिश्चित करने में उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

एआई से जुड़े जोखिमों को कम करना जरूरी

ब्रिक्स देशों ने एआई संसाधनों तक व्यापक पहुंच और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एआई को सुरक्षित, भरोसेमंद, समावेशी और विश्वसनीय बनाने के साथ इससे जुड़े जोखिमों को कम करना जरूरी है। घोषणा-पत्र में कहा गया कि एआई में सभी देशों के लिए आर्थिक विकास और सतत विकास को बढ़ावा देने की अपार क्षमता है। देशों ने खास तौर पर ग्लोबल साउथ के देशों के लिए न्यायपूर्ण, निष्पक्ष, समान और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित करने पर जोर दिया। सदस्यों ने 'ब्रिक्स यूनिवर्सिटी ग्लोबल रैंकिंग और मूल्यांकन प्रणाली' को विकसित करने की दिशा में आगे की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

भ्रष्टाचार से निपटने को प्रतिबद्ध ब्रिक्स

भ्रष्टाचार रोकने और उससे निपटने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए ब्रिक्स देशों ने भ्रष्टाचार के मामलों में वांछित भगोड़े आरोपियों का पता लगाने और प्रत्यर्पण में मदद के लिए अनौपचारिक सहयोग और अवैध संपत्तियों की बरामदगी पर विशेषज्ञ नेटवर्क की स्थापना का स्वागत किया। सदस्य देशों ने कहा कि हम भ्रष्टाचार की रोकथाम और उससे निपटने में ब्रिक्स सहयोग को बढ़ावा देने तथा इस संबंध में प्रासंगिक अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लगातार लागू करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं।

जलवायु परिवर्तन पर दिखी एकजुटता

ब्रिक्स देशों के नेताओं ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा सम्मेलन और उसके पेरिस समझौते के उद्देश्य, सिद्धांतों और लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए एकजुट रहने का संकल्प लिया। नेताओं ने कहा, जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए उत्सर्जन में कमी, जलवायु अनुकूलन, जलवायु परिवर्तन से होने वाली क्षति और नुकसान तथा विकासशील देशों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने से जुड़े प्रावधानों को सही तरीके से लागू होना चाहिए। नेताओं ने एकतरफा, दंडात्मक, भेदभावपूर्ण और संरक्षणवादी उपायों का विरोध किया। इसमें कार्बन-बॉर्डर-एडजस्टमेंट मैकेनिज्म जैसे उपाय भी शामिल हैं।

सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा लागू करने पर जोर

ब्रिक्स देशों ने सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा को लागू करने और इसके व्यापक, जन-केंद्रित लक्ष्यों एवं उद्देश्यों को संतुलित और एकीकृत तरीके से हासिल करने के लिए लगातार प्रयास करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। नेताओं ने माना कि अत्यधिक गरीबी समेत सभी रूपों और आयामों में गरीबी का उन्मूलन दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती है और सतत विकास के लिए यह बेहद जरूरी है। नेताओं ने कहा कि 2030 एजेंडा को नवाचार, समन्वय, पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार, खुले और साझा तरीके से आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण है। उन्होंने वैश्विक असमानता को लेकर चल रही उच्चस्तरीय चर्चाओं का भी संज्ञान लिया गया।

सामान्य प्रश्न

✦ब्रिक्स सम्मेलन में किस विषय पर चर्चा हुई?−
ब्रिक्स सम्मेलन में पश्चिम एशिया संघर्ष, महिला नेतृत्व, स्वास्थ्य, कृषि, जलवायु परिवर्तन और वित्तीय प्रणाली में सुधार पर चर्चा हुई।
Hindustan | Bureau

लेखक के बारे में

Hindustan | Bureau

हिन्दुस्तान भारत का एक प्रतिष्ठित हिंदी समाचार-पत्र है, जिसकी स्थापना 1936 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने की थी। स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को समेटे यह प्रकाशन आज भारत के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले हिंदी समाचार-पत्रों में दूसरे स्थान पर है। WAN-IFRA के अनुसार, 2016 में 'हिन्दुस्तान' विश्व के शीर्ष 13 सर्वाधिक प्रसारित अखबारों में शामिल था। हर रोज 5 राज्‍यों सह‍ित देश की राजधानी द‍िल्‍ली और एनसीआर (नोएडा, गाज‍ियाबाद, गुरुग्राम) में 23 संस्‍करण प्रकाश‍ित होते हैं। ‘पाठक सर्वोपर‍ि’ हिन्दुस्तान की संपादकीय नीति है। समय पर, शोध और गहन खोजबीन के बाद व‍िस्‍तार से न्‍यूज र‍िपोर्ट प्रकाश‍ित की जाती है। हर खबर में सभी पक्षों और दृष्टिकोणों को संतुलित रूप से पेश किया जाता है।

और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।

Hindi Newsविदेश न्यूज़सधी भाषा में भारत ने किया पश्चिम एशिया संघर्ष का जिक्र