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मुझे और मेरे परिवार को बचा लो...13 साल पहले बर्फीली तूफान में फंसे बाइडेन को बचाने वाले अफगानी की अमेरिका से गुहार

हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीPublished By: Shankar Pandit
Wed, 01 Sep 2021 11:29 AM
मुझे और मेरे परिवार को बचा लो...13 साल पहले बर्फीली तूफान में फंसे बाइडेन को बचाने वाले अफगानी की अमेरिका से गुहार

अफगानिस्तान से 31 अगस्त को अमेरिकी सैनिकों के लौटते ही अमेरिका का मिशन पूरा हो गया। अमेरिका ने अपने सैनिकों और नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया है, मगर अब भी कई लोग हैं जो अमेरिका से मदद की गुहार लगा रहे हैं। इनमें से एक शख्स ऐसा है, जिसने आज से 13 साल पहले कंपकंपी सर्दी में बर्फीली पहाड़ों पर 30 घंटे तक खड़े रहकर जो बाइडेन को रेस्क्यू करने में मदद की थी। दरअसल, 2008 में अफगानिस्तान के बर्फीली पहाड़ों में फंसे तत्कालीन सीनेटर जो बाइडेन को वापस लाने में मदद करने वाला अफगान दुभाषिया अफगान में ही छूट गया है और वह अब व्हाइट हाउस से मदद की गुहार लगा रहा है। 

बता दें कि अमेरिका ने अपना मिशन पूरा होने के बाद अफगान के अनेक सहयोगियों को अफगानिस्तान में उन्हें उनकी हाल पर छोड़ दिया है। इन्हीं में से एक हैं अफगान दुभाषिया मोहम्मद, जिन्होंने  2008 में बर्फीली तूफान में फंसे जो बाइडेन के रेस्क्यू ऑपरेशन में बड़ी भूमिका निभाई थी। द वॉल स्ट्रीट जनरल से मोहम्मद ने कहा, ' हेल्लो मिस्टर प्रेसीडेंट: मुझे और मेरे परिवार को बचा लो। यहां मूझे मत भूल जाना। मैं यहां डरा हुआ हूं और घर छोड़ने को भी तैयार हूं।' बता दें कि मोहम्मद ने अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपना असली नाम नहीं बताया है। 

मोहम्मद फिलहाल, अपनी बच्चे और चार बच्चों के साथ छिपे हुए हैं। वह उस टीम का हिस्सा थे, जिसने 2008 में तत्कालीन सीनेटर जो बाइडेन और पूर्व सीनेटर्स चक हेगल, आर-नेब, जॉन केरी, डी-मास को बचाने में मदद की थी, जब उनके हेलीकॉप्टरों को अफगानिस्तान में एक सुदूर घाटी में बर्फीले तूफान की वजह से उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा था। मोहम्मद के साथ काम करने वाले सेना के दिग्गजों के अनुसार, वह उस समय अमेरिकी सेना के लिए एक दुभाषिया थे।

हालांकि, द वॉल स्ट्रीट जनरल ने लिखा है कि ऐसा लगता है कि मोहम्मद की अपील राष्ट्रपति जो बाइडेन के कानों तक पहुंच गई है क्योंकि व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जेन साकी ने कहा कि अमेरिका उन्हें और उनके परिवार को अफगानिस्तान से निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रेस सचिव ने कहा, 'हम आपको बाहर निकालेंगे, हम आपकी सेवा का सम्मान करेंगे और हम ऐसा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।' मोहम्मद ने जब बाइडेन की मदद की थी, तब उनकी उम्र 36 साल थी। बता दें कि मोहम्मद की तरह अफगानिस्तान में 20 साल के युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना की मदद करने वाले कई अफगान सहयोगी देश पर कब्जा करने वाले तालिबान से प्रतिशोध के डर में जी रहे हैं। 

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